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रखवाली कर रहे बुजुर्ग को फरसे से काट डाला
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 22 May 2016 02:21 AM IST
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किसान की हत्या
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खेत की रखवाली को गए गांव असदनगर निवासी बुजुर्ग दलित काश्तकार की बीती रात खेत में फरसे से काटकर नृशंस तरीके से हत्या कर दी गई। खेत पर उसके साथ रहने वाले साझीदार किसान की भूमिका पर संदेह जताते हुए पुलिस उसे हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वहीं, मृतक के पुत्र ने हालिया दुश्मनी को आधार बनाकर दूसरे पक्ष के चार लोगों पर हत्या का मुकदमा कराया है।
असदनगर उर्फ भैरपुरा निवासी 60 वर्षीय हरचरनलाल वाल्मीकि और गांव के ही नत्थूलाल लोधी आदि के बीच करीब तीन महीने से रंजिश चल रही है। नत्थूलाल के परिवार की एक लड़की से छेड़छाड़ में हरचरन का सबसे छोटा बेटा गुड्डू जेल में बंद है। हरचरन समझौते की कोशिश में लगे थे। बताते हैं कि दलित परिवार के लड़के की हिमाकत को प्रभावशाली नत्थूलाल आदि भुला नहीं पा रहे थे। गांव के ही लालाराम मौर्य के साझे में हरचरन ने रामेश्वर का 15 बीघा खेत ठेके पर लेकर मक्का, घुइया, तोरई, मिर्च आदि की खेती की थी। खेत में झोपड़ी डालकर लालाराम और हरचरन फसल की रखवाली करते थे। शुक्रवार सुबह हरचरन की पत्नी विमला रोटी लेकर खेत पर गई थीं। तब हरचरन ने रोटी खाकर पत्नी को शाम को खाना न लाने को कह दिया था। कहा था कि दोनों खेत पर ही खाना बनाकर खा लेंगे। लालाराम और हरचरन अक्सर रात में खेत पर ही सोते थे। शुक्रवार रात भी दोनों खेत पर ही रह गए। आरोप है कि इसी बीच हत्यारों ने धावा बोला और हरचरन को खेत में दौड़ाकर फरसे से काट डाला। लाठी और भाले से भी उनके शरीर पर प्रहार किए गए। जान बचाने की कोशिश में हरचरन ने फरसे का वार बाल्टी पर रोकने की कोशिश की तो लोहे की बाल्टी कट गई। हमलावरों ने फूस की झोपड़ी, अंदर पड़ी चारपाई भी तोड़फोड़ डाली। शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे बदहवास लालाराम ने गांव पहुंचकर मृतक के घर वालों को इस वारदात की जानकारी दी। सूचना पर एसओ बच्चू सिंह यादव फोर्स लेकर पहुंचे। शव पोस्टमार्टम को भेजा गया। पूछताछ के लिए पुलिस ने पहले तो लालाराम को ही हिरासत में ले लिया। मृतक के पुत्र राजेश की तहरीर पर नत्थूलाल लोधी और उसके परिवार के कुंवरसेन, लखपत, बनवारी के विरुद्ध रंजिशन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने दबिश दी तो नामजद आरोपी नहीं मिले।
लालाराम की बातों में विरोधाभास
लालाराम के बताए घटनाक्रम और अपनी रंजिश को जोड़कर बनाई तहरीर के आधार पर राजेश ने विरोधियों के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज करा दी पर लालाराम की भूमिका को लेकर ही संदेह कायम है। लालाराम के ही मुताबिक हरचरन पर हमला रात में किया गया। ऐसे में लालाराम ने सुबह उसके घर आकर सूचना क्यों दी? वह चाहते तो घटना के दौरान ही गांव आकर जानकारी दे सकते थे। दूसरा सवाल उठता है कि आरोपियों ने जब इतनी निर्ममता से हरचरन को मारा तो उनके सहयोगी और घटना के चश्मदीद लालाराम को ऐसे ही क्यों जाने दिया? शायद ऐसे ही सवालों के जवाब खोजने को पुलिस ने लालाराम को हिरासत में लिया है। देर शाम तक उसने कुछ नहीं उगला था।
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सिर में चोट और फेफड़ा फटने से हुई मौत
हरचरन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बयां करती है कि किस तरह निर्ममता से उसे मारा गया। शरीर पर काटने और गोदने के अनगिनत निशान मिले हैं। लाठी डंडों की चोट भी स्पष्ट हैं। मौत की वजह सिर में लगी गंभीर चोट और किसी तेज आघात की वजह से फेफड़ा फटना पुष्ट हुई है।
पीड़ित पक्ष के मुताबिक लड़की से छेड़छाड़ के मामले में कार्रवाई कराने के बाद भी नत्थूलाल पक्ष इन लोगों से रंजिश मानता था जिसकी वजह से यह हत्या हुई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लालाराम से भी कई अहम जानकारी मिल सकती हैं। - नरेश कुमार, सीओ मीरगंज
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असदनगर उर्फ भैरपुरा निवासी 60 वर्षीय हरचरनलाल वाल्मीकि और गांव के ही नत्थूलाल लोधी आदि के बीच करीब तीन महीने से रंजिश चल रही है। नत्थूलाल के परिवार की एक लड़की से छेड़छाड़ में हरचरन का सबसे छोटा बेटा गुड्डू जेल में बंद है। हरचरन समझौते की कोशिश में लगे थे। बताते हैं कि दलित परिवार के लड़के की हिमाकत को प्रभावशाली नत्थूलाल आदि भुला नहीं पा रहे थे। गांव के ही लालाराम मौर्य के साझे में हरचरन ने रामेश्वर का 15 बीघा खेत ठेके पर लेकर मक्का, घुइया, तोरई, मिर्च आदि की खेती की थी। खेत में झोपड़ी डालकर लालाराम और हरचरन फसल की रखवाली करते थे। शुक्रवार सुबह हरचरन की पत्नी विमला रोटी लेकर खेत पर गई थीं। तब हरचरन ने रोटी खाकर पत्नी को शाम को खाना न लाने को कह दिया था। कहा था कि दोनों खेत पर ही खाना बनाकर खा लेंगे। लालाराम और हरचरन अक्सर रात में खेत पर ही सोते थे। शुक्रवार रात भी दोनों खेत पर ही रह गए। आरोप है कि इसी बीच हत्यारों ने धावा बोला और हरचरन को खेत में दौड़ाकर फरसे से काट डाला। लाठी और भाले से भी उनके शरीर पर प्रहार किए गए। जान बचाने की कोशिश में हरचरन ने फरसे का वार बाल्टी पर रोकने की कोशिश की तो लोहे की बाल्टी कट गई। हमलावरों ने फूस की झोपड़ी, अंदर पड़ी चारपाई भी तोड़फोड़ डाली। शनिवार सुबह साढ़े पांच बजे बदहवास लालाराम ने गांव पहुंचकर मृतक के घर वालों को इस वारदात की जानकारी दी। सूचना पर एसओ बच्चू सिंह यादव फोर्स लेकर पहुंचे। शव पोस्टमार्टम को भेजा गया। पूछताछ के लिए पुलिस ने पहले तो लालाराम को ही हिरासत में ले लिया। मृतक के पुत्र राजेश की तहरीर पर नत्थूलाल लोधी और उसके परिवार के कुंवरसेन, लखपत, बनवारी के विरुद्ध रंजिशन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने दबिश दी तो नामजद आरोपी नहीं मिले।
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लालाराम की बातों में विरोधाभास
लालाराम के बताए घटनाक्रम और अपनी रंजिश को जोड़कर बनाई तहरीर के आधार पर राजेश ने विरोधियों के खिलाफ रिपोर्ट तो दर्ज करा दी पर लालाराम की भूमिका को लेकर ही संदेह कायम है। लालाराम के ही मुताबिक हरचरन पर हमला रात में किया गया। ऐसे में लालाराम ने सुबह उसके घर आकर सूचना क्यों दी? वह चाहते तो घटना के दौरान ही गांव आकर जानकारी दे सकते थे। दूसरा सवाल उठता है कि आरोपियों ने जब इतनी निर्ममता से हरचरन को मारा तो उनके सहयोगी और घटना के चश्मदीद लालाराम को ऐसे ही क्यों जाने दिया? शायद ऐसे ही सवालों के जवाब खोजने को पुलिस ने लालाराम को हिरासत में लिया है। देर शाम तक उसने कुछ नहीं उगला था।
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सिर में चोट और फेफड़ा फटने से हुई मौत
हरचरन की पोस्टमार्टम रिपोर्ट बयां करती है कि किस तरह निर्ममता से उसे मारा गया। शरीर पर काटने और गोदने के अनगिनत निशान मिले हैं। लाठी डंडों की चोट भी स्पष्ट हैं। मौत की वजह सिर में लगी गंभीर चोट और किसी तेज आघात की वजह से फेफड़ा फटना पुष्ट हुई है।
पीड़ित पक्ष के मुताबिक लड़की से छेड़छाड़ के मामले में कार्रवाई कराने के बाद भी नत्थूलाल पक्ष इन लोगों से रंजिश मानता था जिसकी वजह से यह हत्या हुई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। लालाराम से भी कई अहम जानकारी मिल सकती हैं। - नरेश कुमार, सीओ मीरगंज