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जाओ ट्रेनिंग लो और सरहद पर तैनात हो जाना
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Fri, 15 Jul 2016 01:18 AM IST
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चारों युवकों ने जिस दलाल से सेना भर्ती के फर्जी नियुक्तिपत्र हासिल किए, वह खुद को दिल्ली भर्ती कार्यालय के अफसर का ड्राइवर बताता था। युवकों के मुताबिक, उसका नाम रेशम है और वह उनसे दिल्ली के सदर बाजार में मिलता था। वहीं, उसने पैसे लिए और नियुक्तिपत्र दिए। युवकों ने बताया कि रेशम ने उनको फर्जी नियुक्तिपत्र देकर बोला था, जाओ बरेली चले जाओ, अब तुम्हारी नौकरी पक्की हो गई। ट्रेनिंग लो और सरहद पर तैनात हो जाना। इसके बाद चारो युवक बरेली जाट सेंटर चले आए।
सेना की ओर से कैंट थाना पुलिस के हवाले किए गए चारो युवकों को अब पछतावा हैँ। हालांकि वह पहले ही जानते थे कि सेना में भर्ती के लिए रैली में शामिल होकर दौड़ निकालना, मेडिकल और लिखित परीक्षा में पास होना जरूरी है। उन्हें यह भी अंदेशा था कि उनका नियुक्ति पत्र फर्जी हो सकता है और वह फंस सकते हैं लेकिन रवि ने कहा, रेशम ने जिस तरह से उनको झांसे में लिया, वह आश्वस्त हो गए कि अब सेना में उनकी भर्ती पक्की है। युवकों ने बताया कि अफसर से बात करके उसने सारी सैटिंग करा दी है। दौड़, मेडिकल और लिखित परीक्षा में भले ही वह शामिल नहीं हुए लेकिन उनके साइन वहां हो गए हैं। कागजों में कोई कमी नहीं है। धर्मचंद्र और रवि आपस में दोस्त हैं। उन्होंने बताया कि पांच मई को गुडगांव के देवीलाल स्टेडियम में सेना की भर्ती रैली थी। वे दोनों उसमें शामिल होने गए थे, लेकिन दौड़ में शामिल नहीं हो पाए, वहीं रेशम उनको मिल गया और बोला- अगर तुम शामिल होना चाहते हो बोले। उन्होंने हामी भर दी और रेशम का नंबर लेकर चले आए। इसके बाद दिल्ली के सदर बाजार में रेशम से उनकी मुलाकात होने लगी। बकौल रवि उसने रेशम को साढ़े तीन लाख और धर्मचंद्र ने पांच लाख रुपये दिए। इसके बाद रेशम ने उनको नियुक्तिपत्र दिया। चारों युवकों ने बताया कि रेशम ने उन्हें पूरी रकम नियुक्ति के बाद देने को कहा था। तीन युवकों को जब उसने नियुक्ति पत्र दिए, उसके बाद कैश में रकम वसूली, जबकि चौथे युवक रवि ने बाद में पैसा देने की बात कही थी।
बनने चले थे सैनिक
संदीप
पुलिस हिरासत में उसने खुद को हरियाणा के बिबड़ी थाना के बाठवां गांव का निवासी बताया। बोला- 12वीं तक पढ़ा हुआ है। किसान पिता के दो बेटों में बड़ा है। युवक के अनुसार, उसने रेशम को नियुक्ति के लिए साढ़े चार लाख रुपए दिए।
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रवि
खुद को हरियाणा के महेंद्रगढ़ के नागर चौधरी दौसपुर का निवासी बताया। 12वीं तक पढ़ा हुआ। पिता को मजदूर बताया। बोला- साढ़े तीन लाख रुपए में नियुक्ति का सौदा तय हुआ। युवक ने बताया कि रेशम ने नियुक्ति के बाद रुपए देने को बोला था, उसने अभी तक रेशम को रकम नहीं दी है।
धरमचंद्र
खुद को हरियाणा के महेंद्रगड़ के नुजौता गांव का निवासी बताया। वह रवि का दोस्त है। उसने रेशम को पांच लाख रुपए देने का दावा किया। बोला- सेना भर्ती देखने जाते समय रेशम से मुलाकात हुई थी। उसके बाद झांसे में आ गया।
मनीष
कागजों में उसका पता भले ही पलवल का दर्ज है लेकिन हवालात में उसने खुद को बुलंदशहर के स्याना थाना के बरौली गांव का निवासी बताया। मनीष ने बताया कि रेशम उसे डेढ़ साल पहले दिल्ली के सदर बाजार में मिला था। इसके बाद उसे नौकरी लगवाने का झांसा देकर डेढ़ साल तक फंसाए रखा और चार लाख रुपए ले लिए।
तीन बीघा जमीन बेचकर दिए थे रुपए
मनीष के फर्जीवाड़े होने की बात खुली तो उसके परिवार को भी सूचना कर दी गई। मनीष की मां अनीता कैंट थाना पहुंची, उन्होंने बताया बेटा नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। वह रेशम की बातों में आ गया, हमने भी सेना के अफसर का चालक होने की बात सुनकर विश्वास कर लिया। बोलीं मेरे पति ने चार लाख रुपए देने के लिए तीन बीघा जमीन बेची थीं।
रास्ते में किया फर्जीवाड़ा
आईआरओ से 17 ट्रेनियों को उनकी शैक्षिक जानकारी व लेटर के साथ 15 दिन पहले जाट रेजिमेंट ट्रेनिंग सेंटर के लिए भेजा गया था। सेना का कहना है कि रास्ते में कही पर 16 ट्रेनियों के साथ चार अन्य साथियों को जोड़ दिया गया। साथ ही जिस लिफाफ में ट्रेनियों की लिस्ट थी उसमें चार का नाम भी जोड़ा गया था। ट्रेनिंग सेंटर में जब चार अधिक ट्रेनियों को देखा गया, जिनकी पहले से जानकारी विभाग के पास नहीं थी। तब जाट सेंटर ने आर्मी हेड क्वार्टर को इन चार युवकों की जानकारी भेजने का कहा। हेड क्वार्टर की ओर से भेजी गई लिस्ट में पकड़े गए चारों युवकों की जानकारी न होने पर इनका फर्जी तरह से नियुक्त होना सत्यापित हुआ।
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सेना की ओर से कैंट थाना पुलिस के हवाले किए गए चारो युवकों को अब पछतावा हैँ। हालांकि वह पहले ही जानते थे कि सेना में भर्ती के लिए रैली में शामिल होकर दौड़ निकालना, मेडिकल और लिखित परीक्षा में पास होना जरूरी है। उन्हें यह भी अंदेशा था कि उनका नियुक्ति पत्र फर्जी हो सकता है और वह फंस सकते हैं लेकिन रवि ने कहा, रेशम ने जिस तरह से उनको झांसे में लिया, वह आश्वस्त हो गए कि अब सेना में उनकी भर्ती पक्की है। युवकों ने बताया कि अफसर से बात करके उसने सारी सैटिंग करा दी है। दौड़, मेडिकल और लिखित परीक्षा में भले ही वह शामिल नहीं हुए लेकिन उनके साइन वहां हो गए हैं। कागजों में कोई कमी नहीं है। धर्मचंद्र और रवि आपस में दोस्त हैं। उन्होंने बताया कि पांच मई को गुडगांव के देवीलाल स्टेडियम में सेना की भर्ती रैली थी। वे दोनों उसमें शामिल होने गए थे, लेकिन दौड़ में शामिल नहीं हो पाए, वहीं रेशम उनको मिल गया और बोला- अगर तुम शामिल होना चाहते हो बोले। उन्होंने हामी भर दी और रेशम का नंबर लेकर चले आए। इसके बाद दिल्ली के सदर बाजार में रेशम से उनकी मुलाकात होने लगी। बकौल रवि उसने रेशम को साढ़े तीन लाख और धर्मचंद्र ने पांच लाख रुपये दिए। इसके बाद रेशम ने उनको नियुक्तिपत्र दिया। चारों युवकों ने बताया कि रेशम ने उन्हें पूरी रकम नियुक्ति के बाद देने को कहा था। तीन युवकों को जब उसने नियुक्ति पत्र दिए, उसके बाद कैश में रकम वसूली, जबकि चौथे युवक रवि ने बाद में पैसा देने की बात कही थी।
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बनने चले थे सैनिक
संदीप
पुलिस हिरासत में उसने खुद को हरियाणा के बिबड़ी थाना के बाठवां गांव का निवासी बताया। बोला- 12वीं तक पढ़ा हुआ है। किसान पिता के दो बेटों में बड़ा है। युवक के अनुसार, उसने रेशम को नियुक्ति के लिए साढ़े चार लाख रुपए दिए।
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रवि
खुद को हरियाणा के महेंद्रगढ़ के नागर चौधरी दौसपुर का निवासी बताया। 12वीं तक पढ़ा हुआ। पिता को मजदूर बताया। बोला- साढ़े तीन लाख रुपए में नियुक्ति का सौदा तय हुआ। युवक ने बताया कि रेशम ने नियुक्ति के बाद रुपए देने को बोला था, उसने अभी तक रेशम को रकम नहीं दी है।
धरमचंद्र
खुद को हरियाणा के महेंद्रगड़ के नुजौता गांव का निवासी बताया। वह रवि का दोस्त है। उसने रेशम को पांच लाख रुपए देने का दावा किया। बोला- सेना भर्ती देखने जाते समय रेशम से मुलाकात हुई थी। उसके बाद झांसे में आ गया।
मनीष
कागजों में उसका पता भले ही पलवल का दर्ज है लेकिन हवालात में उसने खुद को बुलंदशहर के स्याना थाना के बरौली गांव का निवासी बताया। मनीष ने बताया कि रेशम उसे डेढ़ साल पहले दिल्ली के सदर बाजार में मिला था। इसके बाद उसे नौकरी लगवाने का झांसा देकर डेढ़ साल तक फंसाए रखा और चार लाख रुपए ले लिए।
तीन बीघा जमीन बेचकर दिए थे रुपए
मनीष के फर्जीवाड़े होने की बात खुली तो उसके परिवार को भी सूचना कर दी गई। मनीष की मां अनीता कैंट थाना पहुंची, उन्होंने बताया बेटा नौकरी की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। वह रेशम की बातों में आ गया, हमने भी सेना के अफसर का चालक होने की बात सुनकर विश्वास कर लिया। बोलीं मेरे पति ने चार लाख रुपए देने के लिए तीन बीघा जमीन बेची थीं।
रास्ते में किया फर्जीवाड़ा
आईआरओ से 17 ट्रेनियों को उनकी शैक्षिक जानकारी व लेटर के साथ 15 दिन पहले जाट रेजिमेंट ट्रेनिंग सेंटर के लिए भेजा गया था। सेना का कहना है कि रास्ते में कही पर 16 ट्रेनियों के साथ चार अन्य साथियों को जोड़ दिया गया। साथ ही जिस लिफाफ में ट्रेनियों की लिस्ट थी उसमें चार का नाम भी जोड़ा गया था। ट्रेनिंग सेंटर में जब चार अधिक ट्रेनियों को देखा गया, जिनकी पहले से जानकारी विभाग के पास नहीं थी। तब जाट सेंटर ने आर्मी हेड क्वार्टर को इन चार युवकों की जानकारी भेजने का कहा। हेड क्वार्टर की ओर से भेजी गई लिस्ट में पकड़े गए चारों युवकों की जानकारी न होने पर इनका फर्जी तरह से नियुक्त होना सत्यापित हुआ।