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जिला अस्पताल में स्टॉफ और तीमारदार में मारपीट
बरेली।
Updated Thu, 11 May 2017 01:16 AM IST
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Strike in the district hospital
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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जिला अस्पताल में बुधवार को दो बार स्टाफ और तीमारदार के बीच मारपीट की नौबत आ गई। पहली घटना सुबह साढ़े सात बजे हुई जब बर्न वार्ड में एक गंभीर बच्चे को देखने के लिए इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर मौके पर पहुंचे। उनके पहुंचते ही बच्चे की मौत हो गई। इस पर तीमारदाराें ने वार्ड ब्वाय को कमरे में बंद कर खूब पीटा और डॉक्टर के साथ ही हल्की मारपीट की। यहां का मामला पुलिस थाने पहुंचा ही था कि हार्ट वार्ड में एक तीमारदार को स्टाफ ने पीट दिया। तीमारदार अपने आप को रिटायर्ड फौजी और एक गांव का प्रधान बता रहा है। दोनो मामले को लेकर पूरे दिन अस्पताल में गहमागहमी रही। स्टाफ ने दो घंटे के लिए काम भी ठप कर दिया। अस्पताल प्रशासन की ओर से दोनों मामलों पर विपक्षियाें के खिलाफ तहरीर कोतवाली भेजी गई है। डॉक्टर व स्टाफ के साथ मारपीट मामले में तीमारदाराें के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है, जबकि तीमारदार के साथ मारपीट मामले में समझौता कराया गया।
रात का गुस्सा स्टाफ ने सुबह उतारा
भरतपुर बड़ा रामनगर देवरनियां की रहने वाली परमेश्वरी दयाल (40) को मंगलवार रात में दो बजे जिला अस्पताल इमरजेंसी लाया गया था। दिल की बीमारी से जूझ रहीं परमेश्वरी के लिए उनके छोटे भाई रिटायर्ड फौजी और अपने आप को प्रधान बता रहे जयराम व अन्य परिजनाें ने हंगामा कर दिया। वह सिर्फ ईएमओ से संतुष्ट नहीं हुए और डॉक्टर बुलाने की मांग की। रात करीब दो बजे डॉ. वागीश वैश्य इमरजेंसी कॉल पर परमेश्वरी को देखकर गए, तब जाकर परमेश्वरी दयाल के परिजन शांत हुए। सुबह रिटायर्ड फौजी जयराम की वार्ड ब्वाय राजेश कुमार के साथ बहस हो गई। पहले से तिलमिलाये कर्मचारियों को गुस्सा उतारने का मौका मिल गया और दोनो पक्षाें में जमकर मारपीट हुई। रिटायर्ड फौजी को भी पीटे गए। जयराम ने कोतवाली में तहरीर दी है, जबकि अस्पताल प्रशासन की ओर से भी परिजनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
बच्चे की मौत का गुस्सा डॉक्टर व वार्ड ब्वाय को पीटकर निकाला
सीबीगंज क्षेत्र के गांव सरनियां निवासी मैसर अली का 12 वर्षीय पुत्र शमद अली सोमवार को गर्म दूध गिरने से 60 फीसदी झुलस गया था। उसे 8 मई को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, बुधवार सुबह छह बजे शमद की हालत बिगड़ी। तीमारदारों ने स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय से डॉक्टर को बुलाने को कहा। चूंकि बर्न वार्ड जिला अस्पताल के सामने रोड पार है, इसलिए ईएमओ डॉ. अखिलेश्वर के पहुंचने में थोड़ी देर हो गई। इस बीच शमद ने दम तोड़ दिया। तीमारदारों ने हंगामा शुरू कर दिया। कहासुनी बढ़ी तो मारपीट होने लगी। डॉ. अखिलेश्वर और स्टाफ नर्स को तीमारदारों ने दौड़ाकर पीटा। वार्ड ब्वाय आलम को कमरे में बंद करके पिटाई की। अस्पताल का सामान भी इधर उधर फेंक दिया। मौके पर पुलिस पहुंच गई। स्टाफ के दबाव में पुलिस ने शमद के भाई जाबिर और चाचा नाजिर को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही डॉ. अखिलेश्वर की ओर से शमद के पिता आदि तीमारदारों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया।
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कोतवाली पहुंचे दरगाह वालों पर गरम हुए कोतवाल
दरगाह आला हजरत से जुड़े एक सज्जन भीड़ के साथ कोतवाली पहुंचे और कोतवाल से पूरे मामले की जानकारी करते हुए दोनों तरफ से कार्रवाई करने की बात कही। इस पर कोतवाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल कर्मियों के साथ मारपीट हुई है, इसलिए उनकी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और तीमारदारों की ओर से दी गई तहरीर पर जांच की जा रही है। इसी बीच भीड़ में मौजूद लोग तेज आवाज में बोलते हुए अस्पताल वालों पर गंभीर आरोप लगाने लगे। इस पर कोतवाल ने उन्हें डांटकर शांत किया और भीड़ को कोतवाली से बाहर जाने को कह दिया। कई राजनीतिक दलों के लोग भी पहुंच गए।
स्टाफ ने दो घंटे के लिए ठप किया काम
हंगामे के बाद सभी कर्मचारी प्रमुख अधीक्षक कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए। उन्होंने आरोपियाें के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। न तो ओपीडी में कर्मचारी गए और न ही वार्डों में कोई काम किया गया। डॉक्टरों के राउंड के दौरान भी कर्मचारी साथ नहीं आए। प्रमुख अधीक्षक डॉ. केएस गुप्ता ने पुलिस को तहरीर दी, तब करीब दो घंटे बाद कर्मचारी शांत हुए।
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रात का गुस्सा स्टाफ ने सुबह उतारा
भरतपुर बड़ा रामनगर देवरनियां की रहने वाली परमेश्वरी दयाल (40) को मंगलवार रात में दो बजे जिला अस्पताल इमरजेंसी लाया गया था। दिल की बीमारी से जूझ रहीं परमेश्वरी के लिए उनके छोटे भाई रिटायर्ड फौजी और अपने आप को प्रधान बता रहे जयराम व अन्य परिजनाें ने हंगामा कर दिया। वह सिर्फ ईएमओ से संतुष्ट नहीं हुए और डॉक्टर बुलाने की मांग की। रात करीब दो बजे डॉ. वागीश वैश्य इमरजेंसी कॉल पर परमेश्वरी को देखकर गए, तब जाकर परमेश्वरी दयाल के परिजन शांत हुए। सुबह रिटायर्ड फौजी जयराम की वार्ड ब्वाय राजेश कुमार के साथ बहस हो गई। पहले से तिलमिलाये कर्मचारियों को गुस्सा उतारने का मौका मिल गया और दोनो पक्षाें में जमकर मारपीट हुई। रिटायर्ड फौजी को भी पीटे गए। जयराम ने कोतवाली में तहरीर दी है, जबकि अस्पताल प्रशासन की ओर से भी परिजनों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।
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बच्चे की मौत का गुस्सा डॉक्टर व वार्ड ब्वाय को पीटकर निकाला
सीबीगंज क्षेत्र के गांव सरनियां निवासी मैसर अली का 12 वर्षीय पुत्र शमद अली सोमवार को गर्म दूध गिरने से 60 फीसदी झुलस गया था। उसे 8 मई को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, बुधवार सुबह छह बजे शमद की हालत बिगड़ी। तीमारदारों ने स्टाफ नर्स और वार्ड ब्वाय से डॉक्टर को बुलाने को कहा। चूंकि बर्न वार्ड जिला अस्पताल के सामने रोड पार है, इसलिए ईएमओ डॉ. अखिलेश्वर के पहुंचने में थोड़ी देर हो गई। इस बीच शमद ने दम तोड़ दिया। तीमारदारों ने हंगामा शुरू कर दिया। कहासुनी बढ़ी तो मारपीट होने लगी। डॉ. अखिलेश्वर और स्टाफ नर्स को तीमारदारों ने दौड़ाकर पीटा। वार्ड ब्वाय आलम को कमरे में बंद करके पिटाई की। अस्पताल का सामान भी इधर उधर फेंक दिया। मौके पर पुलिस पहुंच गई। स्टाफ के दबाव में पुलिस ने शमद के भाई जाबिर और चाचा नाजिर को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही डॉ. अखिलेश्वर की ओर से शमद के पिता आदि तीमारदारों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया।
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कोतवाली पहुंचे दरगाह वालों पर गरम हुए कोतवाल
दरगाह आला हजरत से जुड़े एक सज्जन भीड़ के साथ कोतवाली पहुंचे और कोतवाल से पूरे मामले की जानकारी करते हुए दोनों तरफ से कार्रवाई करने की बात कही। इस पर कोतवाल ने नाराजगी जताते हुए कहा कि अस्पताल कर्मियों के साथ मारपीट हुई है, इसलिए उनकी रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है और तीमारदारों की ओर से दी गई तहरीर पर जांच की जा रही है। इसी बीच भीड़ में मौजूद लोग तेज आवाज में बोलते हुए अस्पताल वालों पर गंभीर आरोप लगाने लगे। इस पर कोतवाल ने उन्हें डांटकर शांत किया और भीड़ को कोतवाली से बाहर जाने को कह दिया। कई राजनीतिक दलों के लोग भी पहुंच गए।
स्टाफ ने दो घंटे के लिए ठप किया काम
हंगामे के बाद सभी कर्मचारी प्रमुख अधीक्षक कार्यालय के बाहर इकट्ठा हो गए। उन्होंने आरोपियाें के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। न तो ओपीडी में कर्मचारी गए और न ही वार्डों में कोई काम किया गया। डॉक्टरों के राउंड के दौरान भी कर्मचारी साथ नहीं आए। प्रमुख अधीक्षक डॉ. केएस गुप्ता ने पुलिस को तहरीर दी, तब करीब दो घंटे बाद कर्मचारी शांत हुए।