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नींद से जागा प्रॉक्टोरियल बोर्ड, कैंपस में सख्ती शुरू
बरेली।
Updated Sat, 14 Oct 2017 01:11 AM IST
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दस दिनों में छेड़छाड़ की दो घटनाएं होने के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय का प्रॉक्टोरियल बोर्ड आखिरकार नींद से जाग उठा। अभी तक कागजों पर चल रही 18 लोगों की टीम कुलपति की फटकार के बाद शुक्रवार को मुख्य गेट और गेट नंबर तीन पर सक्रिय नजर आई। चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर बीआर कुकरेती खुद गेट पर वाहनों की चेकिंग करते नजर आए। कुलपति भी सुबह गेट पर पहुंचे।
केंद्रीय पुस्तकालय में पांच अक्तूबर की घटना के बाद भी विवि प्रशासन नहीं जागा, लिहाजा गुरुवार को मुख्य गेट पर एक और छात्रा से छेड़खानी हो गई। पहले भी कैंपस में कई घटनाएं हो चुकी है। कुछ महीने पहले गेट नंबर दो पर भी एक छात्रा पर धारदार हथियार से हमला हुआ था। उसके बाद कुछ दिन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। दो घटनाएं होने के बाद शुक्रवार को चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर बीआर कुकरेती पूरी टीम के साथ गेट पर वाहनों की चेकिंग की। बाहरी लोगों के वाहन गेट के पास पार्किंग में ही रोके गए। आईडी दिखाने पर प्रवेश दिया गया। आईडी न होने पर काफी छात्रों को लौटा भी दिया गया।
अब हर रोज कैंपस का राउंड लेंगी टीमें
चीफ प्रॉक्टर ने शुक्रवार को प्रॉक्टोरियल बोर्ड की बैठक भी की। तय हुआ कि पांच-पांच सदस्यों की टीम मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को कैंपस का राउंड लेंगीं। शनिवार और सोमवार को पूरी टीम कैंपस का भ्रमण करेगी। चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि तीन चार दिन में सुरक्षा को लेकर कुछ कड़े निर्णय लिए जाएंगे।
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50 लाख से तीन शौचालय बनवा दिए, कैमरा नहीं लगा सके
रूसा के बजट से विवि प्रशासन ने पचास लाख की लागत से तीन शौचालय तो बनवा दिए, लेकिन कैंपस के सार्वजनिक स्थानों पर कैमरा लगाना मुनासिब नहीं समझा जबकि रूसा की बजट से ही कैमरे लगने हैं। अगर कैमरे लगे होते तो घटना की सारी सच्चाई एक मिनट में सामने आ जाती। अब भी विवि प्रशासन रूसा के बजट का रोना रो रहा है। पचास लाख से बने तीन शौचालयों का कोई प्रयोग तक नहीं कर रहा है।
पुलिस को नहीं मिला अलंकार उपाध्याय
आरोपी छात्र अलंकार उपाध्याय की तलाशी में गई पुलिस की दोनों टीमों के हाथ खाली हैं। दोनों टीमें शुक्रवार को लौट आईं। छात्र को मोबाइल बंद जा रहा है। उसका कोई सुराग नहीं लग ेरहा है। वहीं सूत्रों का कहना है कि कुछ राजनीति लोग मामले में मध्यस्थता में लगे हैं। उन्हीं के कहने पर कुछ छात्र गुरुवार को बारादरी थाने में गए थे। हालांकि पुलिस ने सारी बातों से इंकार किया है। बताया कि छात्र की तलाश की जा रही है। वहीं शासन तक मामला पहुंचने से विवि प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बन रहा है।
केंद्रीय पुस्तकालय में पांच अक्तूबर की घटना के बाद भी विवि प्रशासन नहीं जागा, लिहाजा गुरुवार को मुख्य गेट पर एक और छात्रा से छेड़खानी हो गई। पहले भी कैंपस में कई घटनाएं हो चुकी है। कुछ महीने पहले गेट नंबर दो पर भी एक छात्रा पर धारदार हथियार से हमला हुआ था। उसके बाद कुछ दिन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही उसके बाद मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। दो घटनाएं होने के बाद शुक्रवार को चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर बीआर कुकरेती पूरी टीम के साथ गेट पर वाहनों की चेकिंग की। बाहरी लोगों के वाहन गेट के पास पार्किंग में ही रोके गए। आईडी दिखाने पर प्रवेश दिया गया। आईडी न होने पर काफी छात्रों को लौटा भी दिया गया।
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अब हर रोज कैंपस का राउंड लेंगी टीमें
चीफ प्रॉक्टर ने शुक्रवार को प्रॉक्टोरियल बोर्ड की बैठक भी की। तय हुआ कि पांच-पांच सदस्यों की टीम मंगलवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार को कैंपस का राउंड लेंगीं। शनिवार और सोमवार को पूरी टीम कैंपस का भ्रमण करेगी। चीफ प्रॉक्टर ने बताया कि तीन चार दिन में सुरक्षा को लेकर कुछ कड़े निर्णय लिए जाएंगे।
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50 लाख से तीन शौचालय बनवा दिए, कैमरा नहीं लगा सके
रूसा के बजट से विवि प्रशासन ने पचास लाख की लागत से तीन शौचालय तो बनवा दिए, लेकिन कैंपस के सार्वजनिक स्थानों पर कैमरा लगाना मुनासिब नहीं समझा जबकि रूसा की बजट से ही कैमरे लगने हैं। अगर कैमरे लगे होते तो घटना की सारी सच्चाई एक मिनट में सामने आ जाती। अब भी विवि प्रशासन रूसा के बजट का रोना रो रहा है। पचास लाख से बने तीन शौचालयों का कोई प्रयोग तक नहीं कर रहा है।
पुलिस को नहीं मिला अलंकार उपाध्याय
आरोपी छात्र अलंकार उपाध्याय की तलाशी में गई पुलिस की दोनों टीमों के हाथ खाली हैं। दोनों टीमें शुक्रवार को लौट आईं। छात्र को मोबाइल बंद जा रहा है। उसका कोई सुराग नहीं लग ेरहा है। वहीं सूत्रों का कहना है कि कुछ राजनीति लोग मामले में मध्यस्थता में लगे हैं। उन्हीं के कहने पर कुछ छात्र गुरुवार को बारादरी थाने में गए थे। हालांकि पुलिस ने सारी बातों से इंकार किया है। बताया कि छात्र की तलाश की जा रही है। वहीं शासन तक मामला पहुंचने से विवि प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बन रहा है।