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जन कल्याण आवास सहकारी समिति का कथित सचिव गिरफ्तार
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 22 Jan 2017 12:39 AM IST
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पुलिस
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जनकल्याण आवासीय सहकारी समिति के कथित सचिव पंकज मिश्रा को इज्जतनगर पुलिस ने दबिश देकर गिरफ्तार करके थाने ले आई। विरोध करती हुई थाने पहुंची पंकज की तीन बहनें उन्हें जबरन उठाकर ले जाने की कोशिश करने लगीं। महिला सिपाहियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की तो विरोध करते हुए उनसे हाथापाई कर दी। इसके बाद तो थाने में काफी देर हंगामा होता रहा। महिलाओं ने पुलिस को थाने में ही जमकर खरी-खोटी सुनाईं। प्रभारी निरीक्षक ने समझाने की कोशिश की तो उनसे भी भिड़ गईं। मामले में पंकज के तीनों बहनों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा लिखकर हिरासत में लेकर महिला थाने भिजवा दिया है।
थाना इज्जतनगर की आशुतोष सिटी निवासी पंकज मिश्रा खुद को जनकल्याण आवासीय सहकारी समिति के सचिव हैं। पुलिस के मुताबिक करीब साढ़े चार महीने पहले थाना भोजीपुरा के मनहेरा गांव के विनोद कुमार ने पंकज के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 386, 420, 467, 468 आदि धाराओं में पंकज मिश्रा के खिलाफ मुकदमा लिखाया था। उप निरीक्षक हरकेश सिंह इस मामले की विवेचना कर रहे थे। दो दिन पहले एसएसपी के ओआर में डांट पड़ी तो विवेचक अपने एक साथी के साथ पंकज मिश्रा के घर शनिवार की दोपहर करीब ढाई बजे ही दबिश देने पहुंच गए। पुलिस को पंकज घर के बाहर ही बैठे मिल गए। इस पर पुलिस उन्हें पकड़कर थाने की गाड़ी में बैठाकर ले आई। पीछे से पंकज की बहन प्रियंका मिश्रा, मनी मिश्रा और नीलू मिश्रा थाने पहुंच गईं। उन्होंने थाने में पहुंचते ही हंगामा खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं वह पंकज का हाथ पकड़कर थाने के दफ्तर से उठाकर ले जाने की कोशिश करने लगीं। इससे थाने में हड़कंप मच गया। महिला दरोगा और सिपाहियों ने विरोध किया तो तीनों बहनें उनसे भिड़ गईं। आरोप है कि उनके साथ हाथापाई करके पंकज को छुड़ाने की कोशिश की गई। प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने पंकज की बहनों को समझाकर शांत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पुलिस को बुरा भला कहना शुरू कर दिया। थाने में ही मारपीट पर उतारू थीं। मामले में विवेचक की तहरीर पर तीनों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा लिखकर हिरासत में लेकर उन्हें महिला थाने भिजवा दिया है।
यह तो प्लाट के खेल हैं
पुलिस के मुताबिक विनोद ने पंकज पर लिखाए गए मुकदमे में कहा था कि उसने पुराने नक्शे से 73 नंबर प्लाट खरीदा था। बाद में नया नक्शा बनवाकर उसी प्लाट का नंबर पंकज ने 31 करके दूसरे को बेच दिया। सोसायटी के नियमों में यह था कि दो साल में जो प्लाट में मकान का निर्माण नहीं कराएगा उसका बैनामा निरस्त माना जाएगा, लेकिन उसे तो प्लाट खरीदे हुए दो साल नहीं हुए थे।
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पुलिस बिना वजह परेशान कर रही है
पंकज मिश्रा का कहना है कि पुलिस उन्हें बिना वजह परेशान कर रही है। प्लाट के मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। ऐसा ही था तो पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में इतना समय क्यों लगा दिया। पुलिस मोटी रकम की डिमांड कर रही थी। देने से मना करने पर उनकी गिरफ्तारी कर ली गई।
पुलिस ने हमारे साथ मारपीट की
पंकज की तीनों बहनों का कहना है कि हम तो भाई से मिलने के लिए थाने आए थे। पुलिस से पंकज को गिरफ्तार करने की वजह पूछी तो उन्हें भगाने की कोशिश की गई। विरोध करने पर महिला पुलिस कर्मियों को बुलाकर उनके साथ बदसलूकी कराकर उल्टे उन्हीं के खिलाफ मुकदमा लिखाकर गिरफ्तार कर लिया।
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थाना इज्जतनगर की आशुतोष सिटी निवासी पंकज मिश्रा खुद को जनकल्याण आवासीय सहकारी समिति के सचिव हैं। पुलिस के मुताबिक करीब साढ़े चार महीने पहले थाना भोजीपुरा के मनहेरा गांव के विनोद कुमार ने पंकज के खिलाफ आईपीसी की धारा 147, 148, 386, 420, 467, 468 आदि धाराओं में पंकज मिश्रा के खिलाफ मुकदमा लिखाया था। उप निरीक्षक हरकेश सिंह इस मामले की विवेचना कर रहे थे। दो दिन पहले एसएसपी के ओआर में डांट पड़ी तो विवेचक अपने एक साथी के साथ पंकज मिश्रा के घर शनिवार की दोपहर करीब ढाई बजे ही दबिश देने पहुंच गए। पुलिस को पंकज घर के बाहर ही बैठे मिल गए। इस पर पुलिस उन्हें पकड़कर थाने की गाड़ी में बैठाकर ले आई। पीछे से पंकज की बहन प्रियंका मिश्रा, मनी मिश्रा और नीलू मिश्रा थाने पहुंच गईं। उन्होंने थाने में पहुंचते ही हंगामा खड़ा कर दिया। इतना ही नहीं वह पंकज का हाथ पकड़कर थाने के दफ्तर से उठाकर ले जाने की कोशिश करने लगीं। इससे थाने में हड़कंप मच गया। महिला दरोगा और सिपाहियों ने विरोध किया तो तीनों बहनें उनसे भिड़ गईं। आरोप है कि उनके साथ हाथापाई करके पंकज को छुड़ाने की कोशिश की गई। प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने पंकज की बहनों को समझाकर शांत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने पुलिस को बुरा भला कहना शुरू कर दिया। थाने में ही मारपीट पर उतारू थीं। मामले में विवेचक की तहरीर पर तीनों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में मुकदमा लिखकर हिरासत में लेकर उन्हें महिला थाने भिजवा दिया है।
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यह तो प्लाट के खेल हैं
पुलिस के मुताबिक विनोद ने पंकज पर लिखाए गए मुकदमे में कहा था कि उसने पुराने नक्शे से 73 नंबर प्लाट खरीदा था। बाद में नया नक्शा बनवाकर उसी प्लाट का नंबर पंकज ने 31 करके दूसरे को बेच दिया। सोसायटी के नियमों में यह था कि दो साल में जो प्लाट में मकान का निर्माण नहीं कराएगा उसका बैनामा निरस्त माना जाएगा, लेकिन उसे तो प्लाट खरीदे हुए दो साल नहीं हुए थे।
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पुलिस बिना वजह परेशान कर रही है
पंकज मिश्रा का कहना है कि पुलिस उन्हें बिना वजह परेशान कर रही है। प्लाट के मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। ऐसा ही था तो पुलिस ने उसकी गिरफ्तारी में इतना समय क्यों लगा दिया। पुलिस मोटी रकम की डिमांड कर रही थी। देने से मना करने पर उनकी गिरफ्तारी कर ली गई।
पुलिस ने हमारे साथ मारपीट की
पंकज की तीनों बहनों का कहना है कि हम तो भाई से मिलने के लिए थाने आए थे। पुलिस से पंकज को गिरफ्तार करने की वजह पूछी तो उन्हें भगाने की कोशिश की गई। विरोध करने पर महिला पुलिस कर्मियों को बुलाकर उनके साथ बदसलूकी कराकर उल्टे उन्हीं के खिलाफ मुकदमा लिखाकर गिरफ्तार कर लिया।