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28 ड्राइवरों के लाइसेंस फर्जी, रिपोर्ट होगी
बरेली
Updated Fri, 13 Mar 2015 01:44 AM IST
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बदायूं डिपो में फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पर नियुक्ति कराने के बाद पांच सालों से नौकरी कर रहे 34 संविदा ड्राइवरों की छुट्टी कर उन्हें बस चलाने से रोक दिया गया है। आरएम के निर्देश पर एआरएम बदायूं ने यह कार्रवाई की है। इन 34 ड्राइवरों में से 28 के लाइसेंस फर्जी पाए गए जबकि छह की फाइलें लापता हैं।
करीब पांच साल पहले बदायूं डिपो में बड़े पैमाने पर संविदा ड्राइवरों की भर्ती हुई थी। इनमें 40 से ज्यादा ड्राइवरों के लाइसेंस फतेहगढ़ एआरटीओ कार्यालय से बने थे। फर्जीवाड़े का गढ़ माने जाने वाले फतेहगढ़ से बने ड्राइविंग लाइसेंस उस वक्त भी संदेह के घेरे में थे मगर तत्कालीन अफसरों ने इस पर आंखें मूंद लीं। कई साल बाद इन्हें सत्यापन के लिए भेजा गया। करीब 15 दिन पहले फतेहगढ़ एआरटीओ देवमणि भारती ने 34 ड्राइवरों के सत्यापन की रिपोर्ट स्थानीय अफसरों को भेज दी जिसके मुताबिक 28 ड्राइवरों के लाइसेंस फर्जी पाए गए जबकि छह की पत्रावलियां ही नहीं मिलीं। एआरटीओ फतेहगढ़ की इस रिपोर्ट को बदायूं के एआरएम दबाकर बैठ गए थे। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया तो आरएम एसके शर्मा ने एआरएम बदायूं से पत्रावली तलब कर कार्रवाई के निर्देश दिए। एआरएम ने सभी 34 ड्राइवरों की संविदा खत्म कर उनके ड्यूटी पर जाने से रोक लगा दी।
इनकी गई नौकरी
धर्मेंद्र सिंह, सलमान खां, मंगूलाल, दिनेश, विनीत कुमार मिश्रा, पप्पू, कमल कुमार, सर्वेश कुमार, शिवरतन, दानिश जहांगीर, कमलेश शर्मा, मुनीश कुमार, उमेश पाल, शैलेंद्र, सत्येंद्र पाल, हृदयेश, मुदित, मनवीर, विजयपाल, मुनेंद्र सिंह, राजेश कुमार, गौरव शर्मा, सुनील, जयसिंह, योगेंद्र पाल, अवधेश, जितेंद्र, अमर सिंह, अनिल कुमार और अरविंद। इनमें रानू और संतोष के भी नाम हैं जिनकी संविदा अन्य कारणों से पहले ही खत्म की जा चुकी है।
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करीब पांच साल पहले बदायूं डिपो में बड़े पैमाने पर संविदा ड्राइवरों की भर्ती हुई थी। इनमें 40 से ज्यादा ड्राइवरों के लाइसेंस फतेहगढ़ एआरटीओ कार्यालय से बने थे। फर्जीवाड़े का गढ़ माने जाने वाले फतेहगढ़ से बने ड्राइविंग लाइसेंस उस वक्त भी संदेह के घेरे में थे मगर तत्कालीन अफसरों ने इस पर आंखें मूंद लीं। कई साल बाद इन्हें सत्यापन के लिए भेजा गया। करीब 15 दिन पहले फतेहगढ़ एआरटीओ देवमणि भारती ने 34 ड्राइवरों के सत्यापन की रिपोर्ट स्थानीय अफसरों को भेज दी जिसके मुताबिक 28 ड्राइवरों के लाइसेंस फर्जी पाए गए जबकि छह की पत्रावलियां ही नहीं मिलीं। एआरटीओ फतेहगढ़ की इस रिपोर्ट को बदायूं के एआरएम दबाकर बैठ गए थे। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया तो आरएम एसके शर्मा ने एआरएम बदायूं से पत्रावली तलब कर कार्रवाई के निर्देश दिए। एआरएम ने सभी 34 ड्राइवरों की संविदा खत्म कर उनके ड्यूटी पर जाने से रोक लगा दी।
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इनकी गई नौकरी
धर्मेंद्र सिंह, सलमान खां, मंगूलाल, दिनेश, विनीत कुमार मिश्रा, पप्पू, कमल कुमार, सर्वेश कुमार, शिवरतन, दानिश जहांगीर, कमलेश शर्मा, मुनीश कुमार, उमेश पाल, शैलेंद्र, सत्येंद्र पाल, हृदयेश, मुदित, मनवीर, विजयपाल, मुनेंद्र सिंह, राजेश कुमार, गौरव शर्मा, सुनील, जयसिंह, योगेंद्र पाल, अवधेश, जितेंद्र, अमर सिंह, अनिल कुमार और अरविंद। इनमें रानू और संतोष के भी नाम हैं जिनकी संविदा अन्य कारणों से पहले ही खत्म की जा चुकी है।
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एआरएम बदायूं ने शायद होली पर संचालन प्रभावित होने की वजह से कार्रवाई में देर की होगी। अब सारे दोषियों को नौकरी से हटा दिया है। फर्जी सर्टिफिकेट वाले 28 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश भी एआरएम को दिए गए हैं। - एसके शर्मा, आरएम बरेली