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बिथरी चैनपुर में पकड़ा राशन माफिया

Thu, 30 Mar 2017 01:19 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Thu, 30 Mar 2017 01:19 AM IST
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Ration Mafia caught in Bithri Chainpur
Ration
बिथरी चैनपुर के उड़ला जागीर गांव में एसडीएम सदर अपूर्वा दुबे ने एसएफसी के गोदाम में छापा मार कर राशन माफिया का भांडा फोड़ा है। ब्लैक करने की नीयत से गोदाम से पड़ोस के बारात घर में रखा गया 105 क्विंटल गेहूं गोदाम में रखवाने के एक ठेकेदार को पकड़ लिया। जबकि दूसरे का बेटा फरार हो गया। एसडीएम ने एसएपसी के गोदाम को सील कर दिया है। गोदाम प्रभारी समेत तीन के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज होगा।
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उड़ला जागीर गांव से उमरिया रोड पर एसएफसी का गोदाम है। इस गोदाम के प्रभारी हैं गुलाब सिंह यादव। नरियावल निवासी मुन्ने अंसारी और फिरासत अंसारी ठेकेदार हैं। इनके पास परिवहन और लेबर का ठेका है। मंगलवार को पता लगा कि गोदाम से माल को ब्लैक के लिए गेहूं को फिरासत के बारात घर में शिफ्ट किया जा रहा है। रात करीब 8.30 बजे एसडीएम सदर ने पुलिस फोर्स लेकर अचानक गोदाम में छापा मार दिया। 105 क्विंटल गेहूं  शिफ्ट करते हुए टीम ने फिरासत को रंगे हाथ दबोच लिया। पार्टनर मुन्ने अंसारी का बेटा नाजिम मौके से भाग गया। एसडीएम ने गोदाम में रखवाने के बाद उसे सील करा दिया। फिरासत को थाने भिजवा दिया। 
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नेता जी की मेहरबानी से जीप चालक गोदाम प्रभारी बना
सपा नेताओं और आपूर्ति विभाग के अफसरों की मेहरबानी से गोदाम प्रभारी बने प्रेमनगर में रहने वाले गुलाब सिंह यादव की भी अपनी कहानी है। गुलाब सिंह यादव की सपा के एक कद्दावर नेता के करीबी हैं। वह जिला प्रबंधक के चालक थे। नेता जी मेहरबानी की वजह से चार महीने पहले उन्हें बिथरी चैनपुर के एसएफसी गोदाम का प्रभारी बना दिया गया। चार महीने पहले यह गोदाम नरियावल में अशफाक खां के यहां था। सपा नेता के ठेकेदारों से नजदीकियां होने की वजह से गोदाम उड़ला जागीर गांव के सुनसान इलाके में पहुंच गया। गोदाम के बराबर में ही फिरासत का बारात घर है। 
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इंस्पेक्टर कुछ और बोल रहे हैं
बिथरी चैनपुर के इंस्पेक्टर किरन पाल सिंह यादव फिरासत हुसैन के थाने में होने के बाद से इनकार कर रहे हैं। उनका कहना था कि गोदाम में हम भी एसडीएम के साथ गए थे। वहां कुछ नहीं मिला। कोई पकड़ा भी नहीं गया। तहरीर आएगी तो मुकदमा लिखकर कार्रवाई की जाएगी। जबकि आईएएस अधिकारी एसडीएम सदर अपूर्वा दुबे खुद उसे पुलिस को देकर आई थीं। थाने का एक दरोगा भी फोर्स के साथ एसडीएम के साथ रहा।


सबका कमीशन तय है
गरीबों को कोटेदार दो रुपये किलो गेहूं और तीन रुपये किलो चावल देते हैं। जिले के गोदाम से ही खेल शुरू हो जाता है। कोटेदारों से लेकर ऊपर तक सभी का कमीशन तय है। कहां माल बिकना है। यह पहले से ही तय होता है। सरकार से इस पर कोटेदारों को कमीशन देती है, लेकिन गोदाम में ही खेल हो जाता है। गरीब के घर तक आसानी से गेहूं नहीं पहुंच पाता है। ठेकेदार इसे बाजार से कुछ कम रेट में व्यापारियों को बेच देते हैं। इसके बाद गरीबों के पेट का यह भोजन बाजार में ब्लैक हो जाता है। 
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