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सैन्य कर्मी रंगदारी के लिए करता था व्यापारियों को फोन, गिरफ्तार 

Tue, 27 Jun 2017 01:04 AM IST
बरेली।  
बरेली।   Updated Tue, 27 Jun 2017 01:04 AM IST
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Military workers used to call for merchandise, arrested
Military workers used to call for merchandise, arrested - फोटो : बरेली, अमर उजाला
बारादरी, फतेहगंज पूर्वी व तिलहर के चार व्यापारियों को सैन्य कर्मी धमकी भरे मैसेज भेजकर दस लाख रुपये रंगदारी मांग रहा था। पुलिस लाइंस में एसएसपी जोगेंद्र कुमार और एसपी क्राइम रमेश भारती ने व्यापारियों को धमकाने के मामले का खुलासा कर दिया है।
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गिरफ्तार आरोपी फतेहगंज पूर्वी के गांव कादरगंज निवासी राजवीर यादव (30) ने खुद को जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले में 28वीं आरआर बटालियन में जीडी रनर के पद पर तैनात बताया है। राजवीर ने पुलिस को बताया कि वह बीती 5 जून को छुट्टी लेकर गांव आया था। क्राइम पेट्रोल देखकर रुपये कमाने के लिए उसने योजना बनाई और दुकानों के बोर्ड से व्यापारियों के नाम और नंबर इकट्ठा किए। पुलिस अब उसके भाई और साले की भूमिका की भी जांच कर रही है। 
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व्यापारियों के पास धमकी भरे मैसेज और कॉल पहुंचने के बाद तिलहर में दो, बारादरी में एक, फतेहगंज पूर्वी में एक मुकदमा दर्ज हुआ। सभी रिपोर्ट के तार फतेहगंज पूर्वी से जुड़े, क्योंकि सभी व्यापारियों की दुकान फतेहगंज पूर्वी में थी। सर्विलांस की मदद से पुलिस को सफलता तब मिली, जब आरोपी ने एक ही मोबाइल में दो सिम कार्ड का प्रयोग कर धमकियां दी। पुलिस ने उसे ट्रेस कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने राजवीर से पांच मोबाइल बरामद किए हैं। 
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सेठ तुम्हारी सुपारी ली है... 
फतेहगंज पूर्वी के सराफ और मेंथा कारोबारी विश्व मोहन अग्रवाल, तिलहर के सराफ रतन रस्तोगी व प्रदीप अग्रवाल, बारादरी के अरविंद अग्रवाल के पास 5 जून से 7 जून के बीच मोबाइल पर मैसेज पहुंचे थे। इनमें धमकी लिखी गई थी... सेठ तुम्हारी सुपारी ले ली गई है। जान सुरक्षित चाहते हो तो दस लाख स्टेशन के पास पहुंचा देना। रंगदारी नहीं दी तो जान से जाओगे। इसके अलावा विश्व मोहन को 10 से 14 जून के बीच 17 बार फोन किया गया, इसके लिए पांच अलग-अलग फोन का इस्तेमाल किया गया। 

जलालाबाद, तिलहर और फतेहगंज पूर्वी से लिए सिम
रंगदारी की पहली कॉल के लिए राजवीर ने फतेहगंज पूर्वी की दुकान से पहला सिम कार्ड फर्जी आईडी पर लिया। एक सिम जलालाबाद के मोबाइल दुकान मालिक हिमांशु से लिया। तिलहर की दो मोबाइल की दुकानों से भी फर्जी आईडी पर सिम लिए गए थे। राजवीर के मुताबिक, 100 से 150 रुपये में फर्जी आईडी पर आसानी से सिम कार्ड मिल जाता था। 

ट्रेनों की रनिंग लोकेशन में देता था धमकी 
राजवीर को सर्विलांस की अच्छी जानकारी थी। वह हर कॉल के बाद मोबाइल और सिम कार्ड फेंक दिया करता था। रंगदारी के लिए फोन करने को ट्रेन का इस्तेमाल करता था। यही वजह थी कि उसकी लोकेशन गाजियाबाद, फैजाबाद, बनारस, लखनऊ मिलती थी। एसएसपी ने बताया कि राजवीर हैरान था कि पुलिस ने उसे पकड़ा कैसे, वह जानना चाहता था कि आखिर उससे क्या चूक हुई। 

हिमांशु पर पुलिस मेहरबान 
पुलिस ने नंबर ट्रेस कर जलालाबाद के दुकानदार हिमांशु को भी पकड़ा। कार्रवाई करने की जगह पुलिस ने उसे मामले का गवाह बना लिया है। जबकि अनुराग अपहरण कांड में फर्जी आईडी पर सिम कार्ड देने वालों को पुलिस ने जेल भेजा था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि हिमांशु पर पुलिस मेहरबान क्यों हैं। 


कहीं राजवीर भगोड़ा तो नहीं 
राजवीर पुलिस को अपना पहचान पत्र नहीं दिखा सका है। माना जा रहा है कि वह सेना का भगोड़ा या बर्खास्त सिपाही भी हो सकता है। वहीं एसपी क्राइम के मुताबिक, पुलिस की रिपोर्ट के बाद सिपाही की सेना से बर्खास्तगी तय है। फतेेहगंज पूर्वी के पीडी रत्नाकर, कांस्टेबल तस्वीरुल हसन, जितेंद्र सिंह, रामकुमार और ओमवीर, बारादरी थाने के दरोगा रवि करन के अतिरिक्त सर्विलांस के गिरजेश, नितिन, हरेंद्र कुमार की टीम को एसएसपी ने खुलासे के लिए बधाई दी है।
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