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मेंथा टैंक की सफाई के लिए घुसे छात्र की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला बरेली
Updated Sun, 15 May 2016 01:38 AM IST
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दम घुटने से छात्र की मौत
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चार दिन से बंद पडे़ मेंथा टैंक की सफाई करने घुसे कक्षा सात के छात्र की शुक्रवार शाम ढले दम घुटने से मौत हो गई। पोस्टमार्टम कराये बिना घरवालों ने शव की अंत्येष्टि कर दी जिससे मौत की सही वजह भी ज्ञात न हो सकी। किशोर को बचाने के लिए टैंक में घुसे दो ग्रामीणों की भी हालत बिगड़ गई, हालांकि अब वह ठीक हैं।
क्षेत्र के गांव मुतलकपुर गौंटिया निवासी नेमचंद का उनके खेत में ही मेंथा प्लांट है। चार दिन पहले ही उन्होंने कई दिन से बंद चल रहे प्लांट में मेंथा की पिराई की थी। हालांकि उन्होंने टैंक की सफाई नहीं की। शुक्रवार की शाम नेमचंद अपने 14 साल के बेटे पुष्पेंद्र और सिरौली के बडे़गांव निवासी रिश्ते के साले दुष्यंत के साथ टैंक की सफाई करने पहुंचे। टैंक के तले पर स्थित लोहे का जाल उठाने के लिए उसमें चेन फंसानी थी। चेन फंसाने को टैंक में करीब 12 फुट नीचे उतरा पुष्पेंद्र नीचे पहुंचते ही बेहोश हो गया। यह देखकर नेमचंद और दुष्यंत चिल्लाने लगे। तब पड़ोस के खेत में काम करके घर लौट रहे ग्रामीण नौनीराम और यादराम मौके पर आ गए। चेन के सहारे इन्होंने नीचे उतरने की कोशिश की तो इनका भी दम घुटने लगा। हालांकि बेहोश होने से पहले इन्हें बाहर निकाल लिया गया। बाद में काफी ग्रामीण मौके पर आ गए। उन्होंने पुष्पेंद्र के कपड़ों में कुंडा फंसाकर किसी तरह उसे बाहर निकाला। तब तक पुष्पेंद्र की मौत हो चुकी थी। जीवित होने की आस में ग्रामीण उसे पड़ोस के गांव महमूदपुर ले गए। वहां निजी चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। घरवालों ने पुलिस या राजस्व कर्मचारियों को सूचना दिए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। लोगों का अनुमान था कि टैंक ज्यादा दिन बंद रहने के कारण उसमें कोई विषैली गैस बन गई होगी। आशंका यह भी थी कि गैस के प्रभाव से टैंक में आक्सीजन खत्म हो गई होगी।
मना करने के बाद भी उतर गया टैंक में
नेमचंद ने बताया कि उन्होंने पुष्पेंद्र से टैंक में घुसने को मना किया था। प्लांट चलाने के लिए उन्होंने रिश्ते के साले दुष्यंत से साझेदारी की थी। दुष्यंत ने टैंक में घुसने से आनाकानी की। दुष्यंत के मौके से थोड़ा हटते ही पुष्पेंद्र टैंक में उतर गया।
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सभी का लाड़ला था पुष्पेंद्र
नेमचंद गांव के संपन्न किसान हैं। उनके दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। इनमें पुष्पेंद्र बड़ा बेटा और परिवार में सभी का लाड़ला था। वह रेवती गांव के एमके आदर्श विद्यालय में कक्षा सात का छात्र था।
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क्षेत्र के गांव मुतलकपुर गौंटिया निवासी नेमचंद का उनके खेत में ही मेंथा प्लांट है। चार दिन पहले ही उन्होंने कई दिन से बंद चल रहे प्लांट में मेंथा की पिराई की थी। हालांकि उन्होंने टैंक की सफाई नहीं की। शुक्रवार की शाम नेमचंद अपने 14 साल के बेटे पुष्पेंद्र और सिरौली के बडे़गांव निवासी रिश्ते के साले दुष्यंत के साथ टैंक की सफाई करने पहुंचे। टैंक के तले पर स्थित लोहे का जाल उठाने के लिए उसमें चेन फंसानी थी। चेन फंसाने को टैंक में करीब 12 फुट नीचे उतरा पुष्पेंद्र नीचे पहुंचते ही बेहोश हो गया। यह देखकर नेमचंद और दुष्यंत चिल्लाने लगे। तब पड़ोस के खेत में काम करके घर लौट रहे ग्रामीण नौनीराम और यादराम मौके पर आ गए। चेन के सहारे इन्होंने नीचे उतरने की कोशिश की तो इनका भी दम घुटने लगा। हालांकि बेहोश होने से पहले इन्हें बाहर निकाल लिया गया। बाद में काफी ग्रामीण मौके पर आ गए। उन्होंने पुष्पेंद्र के कपड़ों में कुंडा फंसाकर किसी तरह उसे बाहर निकाला। तब तक पुष्पेंद्र की मौत हो चुकी थी। जीवित होने की आस में ग्रामीण उसे पड़ोस के गांव महमूदपुर ले गए। वहां निजी चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया। घरवालों ने पुलिस या राजस्व कर्मचारियों को सूचना दिए बिना ही शव का अंतिम संस्कार कर दिया। लोगों का अनुमान था कि टैंक ज्यादा दिन बंद रहने के कारण उसमें कोई विषैली गैस बन गई होगी। आशंका यह भी थी कि गैस के प्रभाव से टैंक में आक्सीजन खत्म हो गई होगी।
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मना करने के बाद भी उतर गया टैंक में
नेमचंद ने बताया कि उन्होंने पुष्पेंद्र से टैंक में घुसने को मना किया था। प्लांट चलाने के लिए उन्होंने रिश्ते के साले दुष्यंत से साझेदारी की थी। दुष्यंत ने टैंक में घुसने से आनाकानी की। दुष्यंत के मौके से थोड़ा हटते ही पुष्पेंद्र टैंक में उतर गया।
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सभी का लाड़ला था पुष्पेंद्र
नेमचंद गांव के संपन्न किसान हैं। उनके दो पुत्र और तीन पुत्रियां हैं। इनमें पुष्पेंद्र बड़ा बेटा और परिवार में सभी का लाड़ला था। वह रेवती गांव के एमके आदर्श विद्यालय में कक्षा सात का छात्र था।