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अरहर के नाम पर बेच रहे खेसारी
बरेली।
Updated Thu, 27 Apr 2017 01:16 AM IST
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Khersari is selling on the name of Arhar
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग (एफएसडीए) की टीम ने माधोबाड़ी की हर गोविंद दाल मिल मेें छापा मारकर खेसारी के 468 कट्टे बरामद कर गोदाम सील कर दिया। टीम ने खेसारी समेत दो नमूने लेक र जांच के लिए वाराणसी भेजे हैं। माधोबाड़ी से बाजार में आकर यह खेसारी अरहर की दाल के रेट में बिक रही है। टीम ने दो नमूने लेकर जांच के लिए वाराणसी भेज दिए हैं। उधर, एफएसडीए की इस कार्रवाई से दाल मिल मालिकों में हड़कंप मचा हुआ है।
बुधवार शाम करीब सवा चार बजे एफएसडीए की अभिहित अधिकारी (डीओ) ममता कुमारी ने खाद सुरक्षा अधिकारी आरपी पटेल, सोवेंद्र सिंह और दिवाकर के साथ माधोबाड़ी स्थित हर गोविंद दाल मिल में छापा मारा। टीम को तलाशी के दौरान 30 किलो वजन के 468 कट्टे खेसारी के रखे मिले। खेसरी प्रतिबंधित है। इसे अरहर की दाल के तौर पर बाजार में बेचा जा रहा है। बाजार में खेसारी की कीमत 4 लाख 27 हजार रुपये बताई जा रही है। खेसारी का नमूना लेने के बाद टीम ने गोदाम सील कर दिया। मिल में मंसूर की दाल भी बनाई जा रही थी, उसका भी नमूना लिया गया। एफएसडीए के मुताबिक मिल के पास छिलका उतारकर मलका मसूर बनाने का लाइसेंस है। टीम लीडर ने मुताबिक, दाल मिल मालिक सुरेश चंद्र खंडेलवाल ने बताया कि उसका बेटा विवेक खंडेलवाल खेसारी की ट्रेडिंग करता है। दिल्ली से खेसारी लाई जाती है। यहां से उनका बेटा रिटेल में बेचता है, लेकिन कोई कागज मिल मालिक नहीं दिखा पाए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि दोनों ही नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
मिल मालिक को बचा दिया
एफएसडीए की टीम ने मिल मालिक को बचा दिया। एफएसडीए ने मिल के उतने ही हिस्से को सील किया, जितने में खेसारी रखी थी। इसके अलावा डीओ की कार से पीछे चलने वाली लाल कार भी व्यापारियों में चर्चा का विषय बनी रही।
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खेसारी पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके लगातार खाने से ब्रेकडाउन होता है। तराई के इलाके में इसकी पैदावार होती है। यह मध्यप्रदेश और बुदेलखंड से आती है। यूपी के कुछ हिस्से में यह मिल जाती है। देखने अरहर और चने की दाल जैसी लगती है, इसलिए इन दालों में इसे मिला दिया जाता है। खेसारी होलसेल में 40 रुपये प्रति किलो मिल जाती है। इसी का व्यापारी लाभ उठाते हैं।
- सोवेंद्र सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
न रिकार्ड दिखाया न नमूना लेने दिया
परसाखेड़ा में वृंदावन बेवरेज लिमिटेड फैक्ट्री में पहुंचे सहायक आयुक्त फूड अशोक कुमार शर्मा की टीम को वहां के अधिकारियों ने न कोई रिकार्ड दिखाया और न ही नमूना लेने दिया। इसकी वजह से सहायक आयुक्त फूड टीम को बैंरग वापस लेकर लौट आए। बुधवार को सहायक आयुक्त फूड ने टीम के साथ फैक्ट्री पहुंच गए। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री प्रशासन ने उनका सहयोग नहीं किया। फैक्ट्री कोका कोला, लिम्का, स्प्राइट आदि कई शीतल पेयजल बनाती है। इस पेयजल को 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तापमन में रखा जाना चाहिए, लेकिन फैक्ट्री में शीतल पेयजल 45 डिग्री सेल्सियस तापमन में रखा मिला। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। फैक्ट्री के प्रशासन का कहना था कि 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा शीतल पेयजल वह 45 दिन में बेच सकते हैं, लेकिन इसका कोई कागज नहीं दिखा पाए। सहायक आयुक्त फूड ने बताया कि उन्होंने फैक्ट्री के अधिकारियों को नोटिस रिसीव कराने की भी कोशिश की, लेकिन किसी ने नहीं लिया। टीम को उन्होंने नमूना भी लेने नहीं दिया। वह इस मामले में शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी कर रहे हैं। उधर, फैक्ट्री के एचआर मैनेजर राजकुमार शर्मा ने बताया कि उनके यहां एफएसडीए की टीम आई थी। किसी ने नमूना लेने को मना नहीं किया है। बृहस्पतिवार को आकर वह नमूना ले सकते हैं। जो शीतल पेयजल ज्यादा तापमान में रखा मिला है, वह 45 दिन से अंदर बेचा जाता है। इसका सर्टिफिकेट हमारे पास है।
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बुधवार शाम करीब सवा चार बजे एफएसडीए की अभिहित अधिकारी (डीओ) ममता कुमारी ने खाद सुरक्षा अधिकारी आरपी पटेल, सोवेंद्र सिंह और दिवाकर के साथ माधोबाड़ी स्थित हर गोविंद दाल मिल में छापा मारा। टीम को तलाशी के दौरान 30 किलो वजन के 468 कट्टे खेसारी के रखे मिले। खेसरी प्रतिबंधित है। इसे अरहर की दाल के तौर पर बाजार में बेचा जा रहा है। बाजार में खेसारी की कीमत 4 लाख 27 हजार रुपये बताई जा रही है। खेसारी का नमूना लेने के बाद टीम ने गोदाम सील कर दिया। मिल में मंसूर की दाल भी बनाई जा रही थी, उसका भी नमूना लिया गया। एफएसडीए के मुताबिक मिल के पास छिलका उतारकर मलका मसूर बनाने का लाइसेंस है। टीम लीडर ने मुताबिक, दाल मिल मालिक सुरेश चंद्र खंडेलवाल ने बताया कि उसका बेटा विवेक खंडेलवाल खेसारी की ट्रेडिंग करता है। दिल्ली से खेसारी लाई जाती है। यहां से उनका बेटा रिटेल में बेचता है, लेकिन कोई कागज मिल मालिक नहीं दिखा पाए। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि दोनों ही नमूने जांच के लिए भेज दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई होगी।
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मिल मालिक को बचा दिया
एफएसडीए की टीम ने मिल मालिक को बचा दिया। एफएसडीए ने मिल के उतने ही हिस्से को सील किया, जितने में खेसारी रखी थी। इसके अलावा डीओ की कार से पीछे चलने वाली लाल कार भी व्यापारियों में चर्चा का विषय बनी रही।
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खेसारी पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके लगातार खाने से ब्रेकडाउन होता है। तराई के इलाके में इसकी पैदावार होती है। यह मध्यप्रदेश और बुदेलखंड से आती है। यूपी के कुछ हिस्से में यह मिल जाती है। देखने अरहर और चने की दाल जैसी लगती है, इसलिए इन दालों में इसे मिला दिया जाता है। खेसारी होलसेल में 40 रुपये प्रति किलो मिल जाती है। इसी का व्यापारी लाभ उठाते हैं।
- सोवेंद्र सिंह, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
न रिकार्ड दिखाया न नमूना लेने दिया
परसाखेड़ा में वृंदावन बेवरेज लिमिटेड फैक्ट्री में पहुंचे सहायक आयुक्त फूड अशोक कुमार शर्मा की टीम को वहां के अधिकारियों ने न कोई रिकार्ड दिखाया और न ही नमूना लेने दिया। इसकी वजह से सहायक आयुक्त फूड टीम को बैंरग वापस लेकर लौट आए। बुधवार को सहायक आयुक्त फूड ने टीम के साथ फैक्ट्री पहुंच गए। उन्होंने बताया कि फैक्ट्री प्रशासन ने उनका सहयोग नहीं किया। फैक्ट्री कोका कोला, लिम्का, स्प्राइट आदि कई शीतल पेयजल बनाती है। इस पेयजल को 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तापमन में रखा जाना चाहिए, लेकिन फैक्ट्री में शीतल पेयजल 45 डिग्री सेल्सियस तापमन में रखा मिला। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। फैक्ट्री के प्रशासन का कहना था कि 45 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा शीतल पेयजल वह 45 दिन में बेच सकते हैं, लेकिन इसका कोई कागज नहीं दिखा पाए। सहायक आयुक्त फूड ने बताया कि उन्होंने फैक्ट्री के अधिकारियों को नोटिस रिसीव कराने की भी कोशिश की, लेकिन किसी ने नहीं लिया। टीम को उन्होंने नमूना भी लेने नहीं दिया। वह इस मामले में शासन को रिपोर्ट भेजने की तैयारी कर रहे हैं। उधर, फैक्ट्री के एचआर मैनेजर राजकुमार शर्मा ने बताया कि उनके यहां एफएसडीए की टीम आई थी। किसी ने नमूना लेने को मना नहीं किया है। बृहस्पतिवार को आकर वह नमूना ले सकते हैं। जो शीतल पेयजल ज्यादा तापमान में रखा मिला है, वह 45 दिन से अंदर बेचा जाता है। इसका सर्टिफिकेट हमारे पास है।