फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   Just so long to fight a war in the rape victim

इस रेप पीड़ित को अभी तो लंबी जंग लड़नी है

Sun, 16 Oct 2016 01:31 AM IST
Just so long to fight a war in the rape victim
Just so long to fight a war in the rape victim Updated Sun, 16 Oct 2016 01:31 AM IST
विज्ञापन
Just so long to fight a war in the rape victim
पीड़‌िता (प्रतीकात्मक) - फोटो : बरेली, अमर उजाला
एंबुलेंस में बच्चे को जन्म देने वाली नाबालिग लड़की सिर्फ रेप पीड़िता ही नहीं, वह तो पूरे समाज और व्यवस्था से भी पीड़ित है। प्रसूता वार्ड के पहले बेड पर भर्ती लड़की बच्चे को दूध पिलाते दिखी तो उसकी मासूमियत सेे ज्यादा उसमें एक मां सी परिपक्वता झलकी। हालांकि दूध पिलाने केबाद बच्चे को बिस्तर पर लिटाकर जब वह जोर से अपने जख्मखुजलाती है तो उसका बचपना झलकने लगता है। पहले मुहल्ले की एक भाभी साथ में थी। लड़के के घर से धमकी मिली तो भाभी उसी रात लौट गई। वह वार्ड में अकेले ही बच्चे को संभाल रही है, पिता को अंदर जाने की इजाजत नहीं।
विज्ञापन

जिला अस्पताल में शनिवार को प्रसूता वार्ड केबाहर बैठा पिता इंतजार करते रहा कि कब कागज बनें और वह बेटी को लेकर घर जाएं। देर रात तक स्थिति स्पष्ट नहीं हुई। बच्चे और बेटी को लेकर अब क्या सोचा है? केसवाल पर बोले- मोहल्ले के एक भाई मिलने आए थे, बता रहे थे कि दो दिन से गांव में बस यही बातें हो रही हैं, लोग कह रहे हैं कि मैंने पूरे गांव को बदनाम कर दिया है। ऐसे परिवार को गांव में नहीं रहना चाहिए। अभी तक तो गांव वालों ने बहुत साथ दिया है, पर अगर ऐसे हालात बनें तो भी हिम्मत नहीं हारेंगे। लड़की केगर्भ से होने की बात सामने आने केबाद उसकेबड़े और दो छोटे भाइयों ने पहले ही नाता तोड़ लिया था।
विज्ञापन


पढ़ गई होती, तो ये नहीं होता
गांव केप्राइमरी स्कूल में लड़की को पांचवें दर्जे तक पढ़ाया, पिता कहते हैं कि  लल्लीदिमाग से कमजोर है। अपना नाम लिखना तक नहीं सीख पाई थी। थोड़ा सीख जाती तो अपने साथ हो रहे सही गलत को समझ पाती। पीड़िता की दो बहनें और छह भाई हैं, जिसमें सबसे छोटा भाई ढाई साल का है, जबकि एक आंखों से दिव्यांग है। कोई नहीं पढ़ता।
विज्ञापन
विज्ञापन


लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई
आरोपी का पिता कह रहा है कि अगर बच्चे का डीएनए उनके बेटे से मिलता है तो वह लड़की से शादी कराने को तैयार हैं। कहते हैं हमारे पास इतना रुपया नहीं है कि कोई टेस्ट करा पाएं, कर्ज लेकर केस लड़ रहे हैं और आखिरी दम तक लड़ेंगे। हमारी इज्जत तो अब जा चुकी है, क्या गारंटी है कि वो शादी के बाद तलाक नहंीं देगा। बोले, बच्चा अपने पास रखकर न लड़की का भविष्य बनेगा और उसका। मेरे खुद आठ बच्चे हैं, पत्नी भी दिमाग से कमजोर है। खुद ही पूरा घर संभाल रहा हूं। एक और बच्चा नहीं पाल पाऊंगा। बच्चे को गोद में लेकर बैठी नाबालिग पीड़िता बोली कि इसका फैसला अब सिर्फकोर्ट करेगा।

शरण देकर उठाया फायदा
शीशगढ़ क्षेत्र के एक गांव में करीब अस्सी गज कच्चा मकान ही आठ बच्चों के पिता की एक मात्र संपत्ति है। करीब 11 महीना पहले उनका मकान खस गया था। घर के सामने रहने वाले अकील ने उनसे कहा कि परिवार कुछ समय उनके घर की टिन केनीचे आसरा ले सकता है। इसी दौरान ही अकील का दूसरे नंबर का बेटा आरोपी आसिफ पीड़िता पर बुरी नजर रखने लगा था। एक दिन उसकी चाची ने उभर रहे पेट को देखकर पीड़िता से सवाल किया, जिस पर यह मामला खुला। 

पीड़िता बोली, उसे मारापीटा भी गया
पीड़िता बोली, पिता ने गर्भ गिराने की अर्जी कोर्ट में लगाई। हाईकोर्ट के भी कई चक्कर लगे। इतने लंबे समय में वो मियाद गुजर गई जब तक गर्भ गिराया जा सकता था। पीड़िता बताती है कि जब घर में सबको पता लगा कि बच्चा नहीं गिराया जा सकता तो उसे पीटा भी। 


डॉक्यूमेंट्री दर्शाएगी पीड़िता का संघर्ष
रेप पीड़िता और उसकेपरिवार केसंघर्ष के ऊपर एक डॉक्यूमेंट्री बन रही है। फिल्म मेकर विनोद कापड़ी की टीम शनिवार को भी पूरे दिन अस्पताल परिसर में मौजूद रही। टीम सदस्य असिस्टेंट डायरेक्टर मानव ने बताया कि फिल्म में पीड़िता केगर्भवती होने के बाद परिवारिक और सामाजिक विरोध के साथ कानूनी लड़ाई केलिए उसकेसंघर्ष को दर्शाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed