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ऑटो से न कूदती तो रेप के बाद मार डालता शेरा
बरेली।
Updated Tue, 21 Feb 2017 01:03 AM IST
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If not auto jumps Shera killed after rape
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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शिक्षिका अनीता विपरीत हालात में भी अपनी हिम्मत और सूझबूझ से काम न लेतीं तो उसके साथ बहुत बड़ा हादसा हो जाता। उनका अपहरण करने वाले ऑटो चालक ने खुद स्वीकार किया है कि उसकी नीयत खराब हो गई थी और वह रेप के इरादे से अपहरण करना चाहता था जाहिर है कि इसके बाद वह उन्हें जिंदा भी न छोड़ता। उन्हें जब शक हुआ कि इसका इरादा गलत हो गया है तो तुरंत बहन को फोन मिला लिया था इधर वह ऑटो रुकवाने के लिए संघर्ष करने लगीं। ऑटो चालक ने उनका हाथ पकड़ रखा था। उन्होंने हाथ को काटा तो छीना झपटी में आटो की स्पीड कम हुई तो छलांग लगा दी। रविवार रात हुई शिक्षिका के साथ इस घटना से अफसर तक सन्न हैं। पुलिस यह खुलासा करके भले ही अपनी पीठ थपथपाए, खुलासा टीम में शामिल रहे पुलिस वालों को इनाम दे लेकिन शिक्षिका ने अगर खुद कोशिश न की होती तो उनका बचना मुश्किल था।
सप्ताह भर के अंदर यह ऐसा तीसरा वाकया है जिससे साबित होता है कि लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के इंतजाम शहर में मुकम्मल नहीं हैं। फाईक इंक्लेव में विदेशी महिला की बेटी से छेड़छाड़ की घटना पर पुलिस इस तरह चुप रही की शोहदों ने उसका जीना मुश्किल कर दिया। दहशत में उसने कोचिंग जाना छोड़ दिया तो भी अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। दोस्त के साथ घूमने निकली छात्रा को भी शोहदों ने खींचकर गैंगरेप की कोशिश की लेकिन संयोग से वह भी बच गई थी। इन तीनों ही घटनाओं में पुलिस बाद में ही पहुंची है। शिक्षिका अनीता अगर अपनी बहन से बात नहीं कर रही होतीं तो उनको न पुलिस को खबर हो पाती और न वक्त पर अस्पताल में भी भर्ती कराया जा सकता था यह भी संभव था कि शेरा दुबारा लौट कर उन पर हमला करता। पुलिस हर घटना के बाद ऑटो चालकों के सत्यापन, कायदे और नियम की बात तो करती है लेकिन खबर का ज्वार जैसे जैसे कम होता है योजना डब्बे में बंद हो जाती है।
ऐसे पकड़ा गया ऑटो चालक शेरा
घटना के बाद शहर कोतवाल केके वर्मा और उनकी टीम ने जंक्शन पहुंचकर आला हजरत एक्सप्रेस आने के टाइम पर जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में खडे़ ऑटो रिक्शा वालों से पूछताछ की। पता लगाया गया कि रात नौ से दस बजे के बीच के टाइम में कौन कौन ऑटो रिक्शा वाले मौजूद थे। इनके बारे में पता लगाया गया। बकौल, कोतवाल यहां महेश नाम के ऑटो रिक्शा वाले ने शेरा का नाम बताया। इससे शेरा आसानी से पकड़ में आ गया।
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खुलासा करने वाली टीम को दस हजार का इनाम मिला
प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने महिला अपराध का त्वरित कार्रवाई करते हुए खुलासा करने वाली टीम में शामिल शहर कोतवाल केके वर्मा, एसएसआई धर्मेंद्र कुमार, एसआई गौरव विश्नोई, सर्विलांस सेल के एसआई जावेद खां, एसआई ऋषिपाल, सिपाही सर्वेश, अंकुल, शुभम पाठक, मोहित कुमार को दस हजार रुपये इनाम दिया।
जंक्शन पर बदमाशों को जीआरपी का संरक्षण
रात में जंक्शन से घर तक ऑटो से सुरक्षित सफर की कोई गारंटी नहीं है। ऑटो चालकों पर निगरानी नहीं है। हफ्ते महीने के चक्कर में पुलिस और जीआरपी का इनको संरक्षण प्राप्त है। अधिकतर अपराधी प्रवृत्ति ही रात में सवारियों को ढो रहे हैं। जंक्शन इनका ठिकाना है। पुलिस की शह पर ऑटो चालकों के हौसले बुलंद हैं। रविवार रात में हुई घटना के बाद शहर के लोग घबराए हुए हैं। वहीं पुलिस और प्रशासन अभी भी इस पर गंभीर नहीं हैं। पिछले साल अभियान चलाकर 75 फीसदी ऑटो चालकों के वाहनों पर उनके मालिक और चालक का नंबर पेंट कराया गया था। ड्रेस और आईडी कार्ड भी देने की बात हो रही थी लेकिन फिर सब भूल गए।
जंक्शन के बाहर ऑटो खड़ा करने के लिए मात्र 300 लोगों को ही अनुमति है, जबकि यहां एक हजार से अधिक ऑटो खड़े होते हैं। जंक्शन के बाहर खड़े दो ऑटो चालक राकेश और उचित आपस में इसी घटना पर बात कर रहे थे। बोले, कि पिछले दिनों रात में मैंने एक सवारी से राजेंद्रनगर के 100 रुपए मांगे, दूसरे ऑटो ने 80 रुपए मांगे तो सवारी उसकी गाड़ी में बैठ गई। दूसरी ऑटो में चालक के साथ एक अन्य व्यक्ति भी बैठा था, जिस पर सवारी ने आपत्ति जताई और उतरकर मेरी ऑटो में बैठ गया। उन्होंने बताया कि रात में एक ऑटो पर दो लोग चालक के साथ चल रहे हैं। यही अपराध को अंजाम देते हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है।
पुलिस बूथ पर कोई इंतजाम नहीं
लखनऊ व अन्य शहराें में रात में ऑटो की बुकिंग जीआरपी करती है और उसकी रसीद दी जाती है। सवारी छोड़कर लौटने पर ऑटो चालकाें को किराया बूथ पर ही दिया जाता है। बरेली जंक्शन में पुलिस बूथ पर कोई इंतजाम नहीं है। जीआरपी का बूथ लगा हुआ है लेकिन अब यहां कोई नहीं बैठता। सोमवार को सिपाही अजीत कुमार यहां बैठकर लोगाें के एमएसटी फार्म भर रहे थे। वह बताते हैं कि इस बूथ से अब कुछ कंट्रोल नहीं होता है। पहले ऑटो चालकाें से सौ रुपए की पर्ची कटती थी।
जितने भी ऑटो जंक्शन के बाहर खड़े हो रहे हैं उनकी कोई जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की नहीं है। अधिकारियाें को इस बारे में बताया है। रेलवे पुलिस भी इन्हें हटाने में साथ नहीं देती है।
- चेतन स्वरूप शर्मा, स्टेशन अधीक्षक, जंक्शन
पिछले साल ऑटो के बाहर मालिक व चालक का नंबर पेंट करवाया था। ड्रेस और आईडी कार्ड के लिए कोशिश की थी। इसको फॉलो नहीं किया गया। एमवी एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है कि ऑटो चालकों का सत्यापन हो लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा होना जरूरी है। इसके लिए प्रशासन को आगे आना चाहिए तभी लाभ मिलेगा।
-आरआर सोनी, आरटीओ
कप्तान बोले, चालकों का सर्वे करेंगे, वर्दी पहनाएंगे
जब भी कोई संगीन वारदात होती है, तब उच्चाधिकारी मातहतों को अपराधियों पर शिकंजा कसने की हिदायत देते हैं, लेकिन यह हिदायत सिर्फ खानापूरी तक ही निपट जाती है। शिक्षिका के अपहरण की वारदात हो जाने पर एसएसपी ने चालकों का सर्वे कर उन्हें वर्दी पहनाने के निर्देश दिए हैं। अब देखना है कि यह अभियान कितना सफल रहता है, क्योंकि इससे पहले यह कवायद फेल हो गई थी।
शिक्षिका अनीता सिंह के साथ रविवार रात हुई अपहरण की वारदात को संज्ञान में लेते हुए एसएसपी जोगेंद्र सिंह ने कहा कि सभी ऑटो चालकों का सर्वे कराकर उन्हें वर्दी पहनाई जाएगी। संबंधित चौकी, ट्रैफिक बूथों पर उनका नाम पता और टेंपो का नंबर रिकार्ड में रखा जाएगा। एसएसपी ने ऑटो टेंपो में होने वाली वारदातों को रोकने की पूरी प्लानिंग विस्तार पूर्वक बताई। उन्होंने बताया कि अभी यह पता ही नहीं रहता कौन सा ऑटो कौन से रूट पर चल रहा है। इसे ट्रैफिक और सिविल पुलिस से ऑटो टेंपो के स्टैंड के हिसाब से रूट के बारे में तय कराया जाएगा। जिस रूट पर जो ऑटो टेंपो चलता है, उसके चालक का मोबाइल नंबर, नाम, टेंपो नंबर समेत पूरा ब्यौरा संबंधित चौकी पर दर्ज होगा। साथ ही ऑटो टेंपो के अंदर 100 डायल, 1090, कंट्रोल रूम का 100 नंबर के स्टीकर लगाए जाएंगे। जिससे ऑटो टेंपो चालक के जरा भी गड़बड़ी करने का शक होने पर आसानी से सवारी हेल्पर लाइन नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दे सकते हैं।
सेटेलाइट से जंक्शन तक होगा पहले सर्वे
सेटेलाइट बस स्टैंड से जंक्शन की ओर दो तरफ से ऑटो जाते हैं। पहला रूट ईसाईयाें की पुलिया की तरफ से जंक्शन को जाता है और दूसरे रूट पर सेटेलाइट से शहामतगंज, अयूब खां, चौपुला चौराहा होते हुए माल गोदाम रोड से जंक्शन को ऑटो जाते हैं। एसएसपी ने बताया कि पहले चरण में सेटेलाइट से शहामतगंज होते हुए जंक्शन जाने वाले टेंपो वालों का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद अन्य रूट और स्टैंड से चलने वाले टेंपो चालकों का ब्यौरा तैयार किया जाएगा। इसके लिए सभी चौकी इंचार्ज को निर्देश दे दिए गए हैं।
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सप्ताह भर के अंदर यह ऐसा तीसरा वाकया है जिससे साबित होता है कि लड़कियों और महिलाओं की सुरक्षा के इंतजाम शहर में मुकम्मल नहीं हैं। फाईक इंक्लेव में विदेशी महिला की बेटी से छेड़छाड़ की घटना पर पुलिस इस तरह चुप रही की शोहदों ने उसका जीना मुश्किल कर दिया। दहशत में उसने कोचिंग जाना छोड़ दिया तो भी अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। दोस्त के साथ घूमने निकली छात्रा को भी शोहदों ने खींचकर गैंगरेप की कोशिश की लेकिन संयोग से वह भी बच गई थी। इन तीनों ही घटनाओं में पुलिस बाद में ही पहुंची है। शिक्षिका अनीता अगर अपनी बहन से बात नहीं कर रही होतीं तो उनको न पुलिस को खबर हो पाती और न वक्त पर अस्पताल में भी भर्ती कराया जा सकता था यह भी संभव था कि शेरा दुबारा लौट कर उन पर हमला करता। पुलिस हर घटना के बाद ऑटो चालकों के सत्यापन, कायदे और नियम की बात तो करती है लेकिन खबर का ज्वार जैसे जैसे कम होता है योजना डब्बे में बंद हो जाती है।
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ऐसे पकड़ा गया ऑटो चालक शेरा
घटना के बाद शहर कोतवाल केके वर्मा और उनकी टीम ने जंक्शन पहुंचकर आला हजरत एक्सप्रेस आने के टाइम पर जंक्शन के सर्कुलेटिंग एरिया में खडे़ ऑटो रिक्शा वालों से पूछताछ की। पता लगाया गया कि रात नौ से दस बजे के बीच के टाइम में कौन कौन ऑटो रिक्शा वाले मौजूद थे। इनके बारे में पता लगाया गया। बकौल, कोतवाल यहां महेश नाम के ऑटो रिक्शा वाले ने शेरा का नाम बताया। इससे शेरा आसानी से पकड़ में आ गया।
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प्रेस कांफ्रेंस के दौरान एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने महिला अपराध का त्वरित कार्रवाई करते हुए खुलासा करने वाली टीम में शामिल शहर कोतवाल केके वर्मा, एसएसआई धर्मेंद्र कुमार, एसआई गौरव विश्नोई, सर्विलांस सेल के एसआई जावेद खां, एसआई ऋषिपाल, सिपाही सर्वेश, अंकुल, शुभम पाठक, मोहित कुमार को दस हजार रुपये इनाम दिया।
जंक्शन पर बदमाशों को जीआरपी का संरक्षण
रात में जंक्शन से घर तक ऑटो से सुरक्षित सफर की कोई गारंटी नहीं है। ऑटो चालकों पर निगरानी नहीं है। हफ्ते महीने के चक्कर में पुलिस और जीआरपी का इनको संरक्षण प्राप्त है। अधिकतर अपराधी प्रवृत्ति ही रात में सवारियों को ढो रहे हैं। जंक्शन इनका ठिकाना है। पुलिस की शह पर ऑटो चालकों के हौसले बुलंद हैं। रविवार रात में हुई घटना के बाद शहर के लोग घबराए हुए हैं। वहीं पुलिस और प्रशासन अभी भी इस पर गंभीर नहीं हैं। पिछले साल अभियान चलाकर 75 फीसदी ऑटो चालकों के वाहनों पर उनके मालिक और चालक का नंबर पेंट कराया गया था। ड्रेस और आईडी कार्ड भी देने की बात हो रही थी लेकिन फिर सब भूल गए।
जंक्शन के बाहर ऑटो खड़ा करने के लिए मात्र 300 लोगों को ही अनुमति है, जबकि यहां एक हजार से अधिक ऑटो खड़े होते हैं। जंक्शन के बाहर खड़े दो ऑटो चालक राकेश और उचित आपस में इसी घटना पर बात कर रहे थे। बोले, कि पिछले दिनों रात में मैंने एक सवारी से राजेंद्रनगर के 100 रुपए मांगे, दूसरे ऑटो ने 80 रुपए मांगे तो सवारी उसकी गाड़ी में बैठ गई। दूसरी ऑटो में चालक के साथ एक अन्य व्यक्ति भी बैठा था, जिस पर सवारी ने आपत्ति जताई और उतरकर मेरी ऑटो में बैठ गया। उन्होंने बताया कि रात में एक ऑटो पर दो लोग चालक के साथ चल रहे हैं। यही अपराध को अंजाम देते हैं। यह कोई पहली घटना नहीं है।
पुलिस बूथ पर कोई इंतजाम नहीं
लखनऊ व अन्य शहराें में रात में ऑटो की बुकिंग जीआरपी करती है और उसकी रसीद दी जाती है। सवारी छोड़कर लौटने पर ऑटो चालकाें को किराया बूथ पर ही दिया जाता है। बरेली जंक्शन में पुलिस बूथ पर कोई इंतजाम नहीं है। जीआरपी का बूथ लगा हुआ है लेकिन अब यहां कोई नहीं बैठता। सोमवार को सिपाही अजीत कुमार यहां बैठकर लोगाें के एमएसटी फार्म भर रहे थे। वह बताते हैं कि इस बूथ से अब कुछ कंट्रोल नहीं होता है। पहले ऑटो चालकाें से सौ रुपए की पर्ची कटती थी।
जितने भी ऑटो जंक्शन के बाहर खड़े हो रहे हैं उनकी कोई जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की नहीं है। अधिकारियाें को इस बारे में बताया है। रेलवे पुलिस भी इन्हें हटाने में साथ नहीं देती है।
- चेतन स्वरूप शर्मा, स्टेशन अधीक्षक, जंक्शन
पिछले साल ऑटो के बाहर मालिक व चालक का नंबर पेंट करवाया था। ड्रेस और आईडी कार्ड के लिए कोशिश की थी। इसको फॉलो नहीं किया गया। एमवी एक्ट में ऐसा कोई नियम नहीं है कि ऑटो चालकों का सत्यापन हो लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से ऐसा होना जरूरी है। इसके लिए प्रशासन को आगे आना चाहिए तभी लाभ मिलेगा।
-आरआर सोनी, आरटीओ
कप्तान बोले, चालकों का सर्वे करेंगे, वर्दी पहनाएंगे
जब भी कोई संगीन वारदात होती है, तब उच्चाधिकारी मातहतों को अपराधियों पर शिकंजा कसने की हिदायत देते हैं, लेकिन यह हिदायत सिर्फ खानापूरी तक ही निपट जाती है। शिक्षिका के अपहरण की वारदात हो जाने पर एसएसपी ने चालकों का सर्वे कर उन्हें वर्दी पहनाने के निर्देश दिए हैं। अब देखना है कि यह अभियान कितना सफल रहता है, क्योंकि इससे पहले यह कवायद फेल हो गई थी।
शिक्षिका अनीता सिंह के साथ रविवार रात हुई अपहरण की वारदात को संज्ञान में लेते हुए एसएसपी जोगेंद्र सिंह ने कहा कि सभी ऑटो चालकों का सर्वे कराकर उन्हें वर्दी पहनाई जाएगी। संबंधित चौकी, ट्रैफिक बूथों पर उनका नाम पता और टेंपो का नंबर रिकार्ड में रखा जाएगा। एसएसपी ने ऑटो टेंपो में होने वाली वारदातों को रोकने की पूरी प्लानिंग विस्तार पूर्वक बताई। उन्होंने बताया कि अभी यह पता ही नहीं रहता कौन सा ऑटो कौन से रूट पर चल रहा है। इसे ट्रैफिक और सिविल पुलिस से ऑटो टेंपो के स्टैंड के हिसाब से रूट के बारे में तय कराया जाएगा। जिस रूट पर जो ऑटो टेंपो चलता है, उसके चालक का मोबाइल नंबर, नाम, टेंपो नंबर समेत पूरा ब्यौरा संबंधित चौकी पर दर्ज होगा। साथ ही ऑटो टेंपो के अंदर 100 डायल, 1090, कंट्रोल रूम का 100 नंबर के स्टीकर लगाए जाएंगे। जिससे ऑटो टेंपो चालक के जरा भी गड़बड़ी करने का शक होने पर आसानी से सवारी हेल्पर लाइन नंबर डायल कर पुलिस को सूचना दे सकते हैं।
सेटेलाइट से जंक्शन तक होगा पहले सर्वे
सेटेलाइट बस स्टैंड से जंक्शन की ओर दो तरफ से ऑटो जाते हैं। पहला रूट ईसाईयाें की पुलिया की तरफ से जंक्शन को जाता है और दूसरे रूट पर सेटेलाइट से शहामतगंज, अयूब खां, चौपुला चौराहा होते हुए माल गोदाम रोड से जंक्शन को ऑटो जाते हैं। एसएसपी ने बताया कि पहले चरण में सेटेलाइट से शहामतगंज होते हुए जंक्शन जाने वाले टेंपो वालों का सर्वे कराया जाएगा। इसके बाद अन्य रूट और स्टैंड से चलने वाले टेंपो चालकों का ब्यौरा तैयार किया जाएगा। इसके लिए सभी चौकी इंचार्ज को निर्देश दे दिए गए हैं।