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इधर बेशर्म लूट, उधर खैरात की तैयारी
बरेली
Updated Sun, 31 Jan 2016 01:22 AM IST
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बरेली। हद है... कम से कम इस बच्ची की लाश पर तो रिश्वत नहीं खाते। रेप के बाद बेदर्दी से मारी गई बिटिया के शव का पोस्टमार्टम करने के लिए भी कर्मचारियों ने 1300 रुपए ऐंठ लिए। मां-बाप के आंसू का दर्द का भी इन पर कोई असर नहीं हुआ। विलाप करता पिता मिन्नतें करता रहा पर उससे कह दिया गया रात हो गई है। अब कुछ नहीं होगा। शनिवार को आना...। शनिवार सुबह जब बिटिया के परिवारीजन गांववालों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तो फिर उनके साथ बेशर्मी शुरू कर दी गई। कभी अधूरे कागज के नाम पर कभी डॉक्टरों के न पहुंचने का उलाहना देकर उनका दर्द बढ़ान शुरू कर दिया गया। जब कुछ हंगामा शुरू हुआ तो पोस्टमार्टम दोपहर दो बजे शुरू हुआ।
बच्ची के पिता गांव में धार्मिक कार्यों पर और घरों में किसी उत्सव पर ढोल बजाते हैं। एक दिन में दो से तीन सौ रुपये मिल जाते हैं। मां खेतों में काम करती है। शुक्रवार रात को जब बच्ची का शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा तो पिता व गांव के लोगों को पता चला कि पोस्टमार्टम शनिवार को होगा। इसके बाद पिता व अन्य लोग गांव लौट आए। पुलिस की लापरवाही की वजह से शनिवार सुबह से लेकर दोपहर एक बजे तक पोस्टमार्टम के कागज जिला अस्पताल नहीं पहुंचे। डेढ़ बजे कागज पहुुंचे तो पैनल बनाया गया। तबतक लाश का इंतजार करते परिजन कभी इस ऑफिस तो कभी उस दफ्तर फुटबाल बने रहे। डॉ. संजय कुमार, डॉ. बृजेश और डॉ. नीलम पैनल में शामिल की गईं लेकिन डॉक्टर पोस्टमार्टम हाउस एक साथ नहीं पहुंचे। करीब ढाई बजे के बाद पोस्टमार्टम शुरू होने वाला था इससे पहले कर्मचारियों ने पैसे मांगे। गरीब पिता के पास इतने पैसे भी नहीं थे। उसने याचना की लेकिन कर्मचारी नहीं पसीजे। इस पर कांग्रेस और आप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। बाद में पुलिस की ओर से 600 और अन्य लोगाें ने चंदा कर 700 रुपये जुटाए। 1300 रुपये देकर किसी तरह पोस्टमार्टम के लिए शव भीतर ले जाने दिया गया।
कांग्रेसियों ने किया हंगामा, तब पोस्टमार्टम में आई तेजी
दोपहर एक बजे तक कागज जिला अस्पताल न पहुंचने पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रामदेव पांडेय, पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन, महानगर अध्यक्ष असलम चौधरी समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा शुरू कर दिया। नेशनल हाइवे पर जाम लगाने की कोशिश की। पुलिस के अधिकारियों ने समझाया और पोस्टमार्टम का पैनल गठित होने की बात कही। इसके बाद कांग्रेसी शांत हुए।
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-पोस्टमार्टम-
हैवानियत के निशां देखकर डाक्टर भी हो गए विचलित
-कलाई, गर्दन और जननांग में चोट के निशान
बरेली। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी सिहर उठे, जब दस साल की बच्ची के शव की जांच की गई। कलाई, गर्दन और जननांग में कई चोट के निशान मिले हैं। बिटिया को गला दबाकर मारा गया है। उसके शरीर पर घसीटने के भी निशान मिले हैं।
पोस्टमार्टम के लिए तीन डॉक्टराें का पैनल बनाया गया था। इसमें एक महिला चिकित्सक भी शामिल थीं। दोपहर दो बजे के बाद बच्ची का पोस्टमार्टम शुरू हो सका। पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल में डॉ. संजय कुमार, डॉ. बृजेश और डॉ. नीलम आर्य शामिल थीं। जानकारी के मुताबिक पोस्टमार्टम के दौरान बच्ची के शरीर में दर्जनभर चोट के निशान मिले हैं। खेत में घसीटने से खरोंच भी आई है। उसके शव को देखने से ही लगा कि बच्ची को काफी पीड़ा दी गई थी। कलाई पर खरोंच और कट का निशान है। गर्दन पर भी उंगलियों के निशान है जननांग पर भी किसी वस्तु से गहरी चोट की गई है।
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बच्ची के पिता गांव में धार्मिक कार्यों पर और घरों में किसी उत्सव पर ढोल बजाते हैं। एक दिन में दो से तीन सौ रुपये मिल जाते हैं। मां खेतों में काम करती है। शुक्रवार रात को जब बच्ची का शव पोस्टमार्टम हाउस पहुंचा तो पिता व गांव के लोगों को पता चला कि पोस्टमार्टम शनिवार को होगा। इसके बाद पिता व अन्य लोग गांव लौट आए। पुलिस की लापरवाही की वजह से शनिवार सुबह से लेकर दोपहर एक बजे तक पोस्टमार्टम के कागज जिला अस्पताल नहीं पहुंचे। डेढ़ बजे कागज पहुुंचे तो पैनल बनाया गया। तबतक लाश का इंतजार करते परिजन कभी इस ऑफिस तो कभी उस दफ्तर फुटबाल बने रहे। डॉ. संजय कुमार, डॉ. बृजेश और डॉ. नीलम पैनल में शामिल की गईं लेकिन डॉक्टर पोस्टमार्टम हाउस एक साथ नहीं पहुंचे। करीब ढाई बजे के बाद पोस्टमार्टम शुरू होने वाला था इससे पहले कर्मचारियों ने पैसे मांगे। गरीब पिता के पास इतने पैसे भी नहीं थे। उसने याचना की लेकिन कर्मचारी नहीं पसीजे। इस पर कांग्रेस और आप पार्टी के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। बाद में पुलिस की ओर से 600 और अन्य लोगाें ने चंदा कर 700 रुपये जुटाए। 1300 रुपये देकर किसी तरह पोस्टमार्टम के लिए शव भीतर ले जाने दिया गया।
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कांग्रेसियों ने किया हंगामा, तब पोस्टमार्टम में आई तेजी
दोपहर एक बजे तक कागज जिला अस्पताल न पहुंचने पर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष रामदेव पांडेय, पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन, महानगर अध्यक्ष असलम चौधरी समेत अन्य कार्यकर्ताओं ने पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामा शुरू कर दिया। नेशनल हाइवे पर जाम लगाने की कोशिश की। पुलिस के अधिकारियों ने समझाया और पोस्टमार्टम का पैनल गठित होने की बात कही। इसके बाद कांग्रेसी शांत हुए।
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-पोस्टमार्टम-
हैवानियत के निशां देखकर डाक्टर भी हो गए विचलित
-कलाई, गर्दन और जननांग में चोट के निशान
बरेली। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी सिहर उठे, जब दस साल की बच्ची के शव की जांच की गई। कलाई, गर्दन और जननांग में कई चोट के निशान मिले हैं। बिटिया को गला दबाकर मारा गया है। उसके शरीर पर घसीटने के भी निशान मिले हैं।
पोस्टमार्टम के लिए तीन डॉक्टराें का पैनल बनाया गया था। इसमें एक महिला चिकित्सक भी शामिल थीं। दोपहर दो बजे के बाद बच्ची का पोस्टमार्टम शुरू हो सका। पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल में डॉ. संजय कुमार, डॉ. बृजेश और डॉ. नीलम आर्य शामिल थीं। जानकारी के मुताबिक पोस्टमार्टम के दौरान बच्ची के शरीर में दर्जनभर चोट के निशान मिले हैं। खेत में घसीटने से खरोंच भी आई है। उसके शव को देखने से ही लगा कि बच्ची को काफी पीड़ा दी गई थी। कलाई पर खरोंच और कट का निशान है। गर्दन पर भी उंगलियों के निशान है जननांग पर भी किसी वस्तु से गहरी चोट की गई है।