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मासूम अंशिका की हत्या में परिवार के चार लोग दोषी करार
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Fri, 16 Dec 2016 02:29 AM IST
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Four of those convicted in the murder of innocent installment
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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सुभाषनगर के मोहल्ला नेकपुर बाग में दो साल पहले हुए मासूम अंशिका हत्याकांड में कोर्ट ने एक ही परिवार के चार लोगों को दोषी करार दिया है। इसमें दंपति और बहू बेेटे शामिल हैं। कोर्ट का फैसला आते ही परिसर में हंगामा मच गया। पुलिस बुलानी पड़ी। कोर्ट सजा के बिंदु शुक्रवार को तय करेगी। चारों इस समय जेल में बंद हैं।
यह चर्चित घटना 11 सितंबर 2014 की है। मोहल्ले के सर्वेश कुमार की चार साल की भतीजी अंशिका गुम हो गई थी। उन्होंने कंट्रोल रूम में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। वह आसपास उसे खोज भी रहे थे। पड़ोसी सतेंद्र शर्मा के बेटे दीपक उर्फ दीपू के घर पहुंचने पर गटर में नया सीमेंट लगा देखा तो उन्हें शक हुआ। जानकारी लेने पर दीपक घबरा गया और भागने लगा। सर्वेश के अनुसार मोहल्ले के नागेंद्र उर्फ टीटू, गोपाल आदि ने जब गटर खोला तो प्लास्टिक के कट्टे में लाश देखकर सभी सन्न रह गए। लाश अंशिका की थी। उसके चेहरे पर भारी चीज से वार किया गया था। सर्वेश की तहरीर पर पुलिस ने सतेंद्र शर्मा उनकी पत्नी अरुणा शर्मा, बेटे दीपक उर्फ दीपू और बहू गौरी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 302, 201 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति अधिनियम की धारा 3(2) चतुर्थ के तहत मामला दर्ज कर दिया। आरोप पत्र कोर्ट में आने के बाद इस मामले का विचारण विशेष न्यायाधीश एसएस/एसटी एक्ट राघवेंद्र के समक्ष हुआ। कोर्ट ने साक्ष्य के आधार पर मामला संदेह से परे सिद्ध होने पर चारों को दोषी करार दिया है।
कोर्ट में मची अफरातफरी
जैसे ही जज ने चारों को दोषी करार दिया कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई। सास और बहू चिल्लाते हुए रोने लगीं। रिश्तेदारों ने किसी तरह उन्हें शांत किया। किसी तरह पुलिस उन्हें वापस जेल ले गई। बताया जा रहा है कि दीपक की शादी घटना के कुछ ही महीने पहले हुई थी।
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यह चर्चित घटना 11 सितंबर 2014 की है। मोहल्ले के सर्वेश कुमार की चार साल की भतीजी अंशिका गुम हो गई थी। उन्होंने कंट्रोल रूम में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। वह आसपास उसे खोज भी रहे थे। पड़ोसी सतेंद्र शर्मा के बेटे दीपक उर्फ दीपू के घर पहुंचने पर गटर में नया सीमेंट लगा देखा तो उन्हें शक हुआ। जानकारी लेने पर दीपक घबरा गया और भागने लगा। सर्वेश के अनुसार मोहल्ले के नागेंद्र उर्फ टीटू, गोपाल आदि ने जब गटर खोला तो प्लास्टिक के कट्टे में लाश देखकर सभी सन्न रह गए। लाश अंशिका की थी। उसके चेहरे पर भारी चीज से वार किया गया था। सर्वेश की तहरीर पर पुलिस ने सतेंद्र शर्मा उनकी पत्नी अरुणा शर्मा, बेटे दीपक उर्फ दीपू और बहू गौरी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 363, 302, 201 और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति अधिनियम की धारा 3(2) चतुर्थ के तहत मामला दर्ज कर दिया। आरोप पत्र कोर्ट में आने के बाद इस मामले का विचारण विशेष न्यायाधीश एसएस/एसटी एक्ट राघवेंद्र के समक्ष हुआ। कोर्ट ने साक्ष्य के आधार पर मामला संदेह से परे सिद्ध होने पर चारों को दोषी करार दिया है।
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कोर्ट में मची अफरातफरी
जैसे ही जज ने चारों को दोषी करार दिया कोर्ट परिसर में अफरातफरी मच गई। सास और बहू चिल्लाते हुए रोने लगीं। रिश्तेदारों ने किसी तरह उन्हें शांत किया। किसी तरह पुलिस उन्हें वापस जेल ले गई। बताया जा रहा है कि दीपक की शादी घटना के कुछ ही महीने पहले हुई थी।
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