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मां अपनी बेटी के लिए लड़े तो भी तलाक!
बरेली।
Updated Tue, 04 Apr 2017 01:46 AM IST
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Divorce even if the mother fought for her daughter!
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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खुद अपना तलाक का मामला लड़ रही आला हजरत खानदान की बहू रही निदान खान नवाबगंज की अफरोज की कहानी सुनकर हैरान थी। अब निदा ने उसकी भी लड़ाई लड़ने का फैसला किया है।
नवाबगंज के हरने वाले सखावत हुसैन ने अपनी बेटी बेबी अफरोज की शादी वहीं के गांव बरौर में बशरुद्दीन के पुत्र मोहम्मद हारून से 21 मार्च 2010 को की थी। पति हारून ने पिछले साल एक मई 2016 को पत्नी अफरोज को तलाक दे दिया। हलांकि पत्नी का मानना है कि पति ने अपने पिता और चाचा के दबाव में तलाक दिया है इसलिए वह इस तलाक को नहीं मानती। उसने अपने साथ हुए अत्याचार के खिलाफ लड़ने के पुलिस में भी गुहार लगाई। अब तक कुछ नहीं मिला तो वह निदा के पास पहुंच गई।
अफरोज और उसका पिता सखावत सोमवार को मीडिया से रुबरु हुए। उन्होंने अपनी कहानी सिलसिलेवार सुनाई । अफरोज के दो दो बेटियां हैं। जब पहली बेटी एरा नाज हुई थी तब पति उसे अस्पताल में छोड़ गया। पिता ने अस्पताल का खर्च भर कर उसे घर ले आए। वो अपने मायके रहने लगी। बाद में परिवार के बीच बात चीत हुई और अफरोज ससुराल चली गई। डेढ़ साल पहले फिर दूसरी बेटी इरा नाज हुई। बड़ी बेटी के दिल में सूराख है। अफरोज ने उसके इलाज की बात की तो तकरार हो गई और बात तलाक तक आ गई।
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इसके अगले रोज नवाबगंज थाने में पति के खिलआफ तहरीर दी। 16 मई 2016 को मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में यह केस महिला थाने पहुंच गया। इसके बाद एक महीने तक परामर्श केंद्र में सुनवाई हुई। इसी साल 21 जनवरी को इस मामले में चार्ज शीट लगी है। तब से अब तक न तो पति हारून की गिरफ्तारी हुई और न ही कोई कार्रवाई हुई। तलाक के बाद पति ने महर की रकम भी अदा नहीं की है। अफरोज की बड़ी बेटी एरा नाज के इलाज के लिए उसे दिल्ली ले जाना है। अब इतना सारा खर्च अफरोज के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है।
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नवाबगंज के हरने वाले सखावत हुसैन ने अपनी बेटी बेबी अफरोज की शादी वहीं के गांव बरौर में बशरुद्दीन के पुत्र मोहम्मद हारून से 21 मार्च 2010 को की थी। पति हारून ने पिछले साल एक मई 2016 को पत्नी अफरोज को तलाक दे दिया। हलांकि पत्नी का मानना है कि पति ने अपने पिता और चाचा के दबाव में तलाक दिया है इसलिए वह इस तलाक को नहीं मानती। उसने अपने साथ हुए अत्याचार के खिलाफ लड़ने के पुलिस में भी गुहार लगाई। अब तक कुछ नहीं मिला तो वह निदा के पास पहुंच गई।
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अफरोज और उसका पिता सखावत सोमवार को मीडिया से रुबरु हुए। उन्होंने अपनी कहानी सिलसिलेवार सुनाई । अफरोज के दो दो बेटियां हैं। जब पहली बेटी एरा नाज हुई थी तब पति उसे अस्पताल में छोड़ गया। पिता ने अस्पताल का खर्च भर कर उसे घर ले आए। वो अपने मायके रहने लगी। बाद में परिवार के बीच बात चीत हुई और अफरोज ससुराल चली गई। डेढ़ साल पहले फिर दूसरी बेटी इरा नाज हुई। बड़ी बेटी के दिल में सूराख है। अफरोज ने उसके इलाज की बात की तो तकरार हो गई और बात तलाक तक आ गई।
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इसके अगले रोज नवाबगंज थाने में पति के खिलआफ तहरीर दी। 16 मई 2016 को मुकदमा दर्ज हुआ। बाद में यह केस महिला थाने पहुंच गया। इसके बाद एक महीने तक परामर्श केंद्र में सुनवाई हुई। इसी साल 21 जनवरी को इस मामले में चार्ज शीट लगी है। तब से अब तक न तो पति हारून की गिरफ्तारी हुई और न ही कोई कार्रवाई हुई। तलाक के बाद पति ने महर की रकम भी अदा नहीं की है। अफरोज की बड़ी बेटी एरा नाज के इलाज के लिए उसे दिल्ली ले जाना है। अब इतना सारा खर्च अफरोज के लिए एक चिंता का विषय बना हुआ है।