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कुंवारी लड़कियों को भी दिखा दिया शादीशुदा
बरेली
Updated Wed, 21 Jan 2015 01:22 AM IST
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सरकारी धन हड़पने के लिए दलालों ने कई कुंवारी लड़कियों को विवाहित और वर्षों पहले शादी कर चुकीं लड़कियों को नवविवाहित दर्शा दिया। उनकी शादी के फर्जी कार्ड छपवाकर अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में जमा कर दिए। इनकी जांच न हो जाए इसके लिए उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार, लेखपाल और कानूनगो के फर्जी हस्ताक्षर बनाकर फार्मों और आय प्रमाणपत्रों का सत्यापन भी खुद ही कर दिया। विभाग में पकड़े गए ऐसे 44 फार्मों में यही खेल किया गया है। जांच में परत-दर-परत खुलने लगी है तो दलाल तो गायब हो गए हैं लेकिन उन्होंने जिनके नाम से शादी अनुदान लेने की कोशिश की है वे खुद सच्चाई कबूल रहे हैं।
बहेड़ी तहसील के इन मामलों में फर्जीवाड़ा करने वाले दलालों तक पहुंचने के लिए एसडीएम को जांच सौंपी गई है लेकिन यह जांच तहसील से बाहर नहीं निकल पा रही है। नतीजतन, फर्जीवाड़े को अंजाम देने वालों के हौसले बुलंद हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से कराई गई प्रारंभिक जांच में यही सामने आया है कि इन 44 मामलों में जिन लोगों को शादी अनुदान दिलाने की कोशिश की गई। उनमें कोई भी पात्र नहीं है। जिन लड़कियों की शादी होने वाली दर्शाई गई है, उनकी शादी कई साल पहले हो चुकी है। जबकि शादी अनुदान के लिए नियम यह है कि आवेदन के वित्तीय वर्ष के अंदर या तो लड़की की शादी हुई हो या होने वाली हो, इसलिए इन मामलों में खेल किया गया है।
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ऐसे पकड़े गए मामले
चूंकि आयप्रमाण पत्र तहसील से जारी किए जाते हैं इसलिए अपने कार्यालय की डाक में आए इन 44 फार्मों के साथ लगाए गए आय प्रमाणपत्रों का अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने रेवन्यू की वेबसाइट से सत्यापन किया तो उनका मिलान नहीं हुआ। यह प्रमाणपत्र जिन नामों से जारी थे, उन पर दर्ज संख्या में वेबसाइट पर किसी और का नाम प्रदर्शित हो रहा था। इसके बाद अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने इन फार्मों को बहेड़ी तहसील में भिजवा दिया। वहां से एसडीएम ने इन्हें जारी न करने की बात कही। अपने, तहसीलदार, लेखपाल और कानूनगो के हस्ताक्षर फर्जी बताए।
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इंसेट...
::::यह हैं मामले
-शेखूपुर की किशवरी बेगम की बेटी की शादी तीन साल पहले हो चुकी है लेकिन उसका शादी कार्ड वर्ष 2014 का छपवाकर दलालों ने अनुदान के जिला समाज कल्याण विभाग में फार्म के साथ लगा दिया।
-नदेली के नवी मियां की बेटी की शादी दो साल पहले हुई थी, लेकिन उनकी ओर से भी दलालों ने खेल किया। उनका फर्जी आय प्रमाणपत्र बनवाकर भिजवा दिया जिसके फार्म के साथ फर्जी विवाह प्रमाणपत्र भी लगाया गया।
-सिंगोही के बुंदू खां की बेटी की शादी को भी तीन साल से ज्यादा हो गए लेकिन उसकी शादी भी इसी साल दिखाकर फर्जी ढंग से आवेदन कर अनुदान लेने की कोशिश की गई। मामला पकड़ा गया है।
-लोधीपुरा की रुकसाना के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। उनकी बेटी का ब्याह तो हो भी नहीं पाया लेकिन दलालों ने साल भर के अंदर की तारीख का शादी कार्ड दर्शाकर अनुदान का आवेदन भेज दिया।
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वर्जन...
हमारे कार्यालय में आए फर्जी फार्मों के मामले की जांच अब एसडीएम को करनी है। उन्हें यह देखना चाहिए कि अलग-अलग लोगों की ओर से फर्जी फार्म भेजने में किसकी भूमिका है। इसके लिए उन्हें आवेदकों से भी जानकारी लेनी चाहिए, ताकि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
-जगमोहन सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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बहेड़ी तहसील के इन मामलों में फर्जीवाड़ा करने वाले दलालों तक पहुंचने के लिए एसडीएम को जांच सौंपी गई है लेकिन यह जांच तहसील से बाहर नहीं निकल पा रही है। नतीजतन, फर्जीवाड़े को अंजाम देने वालों के हौसले बुलंद हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से कराई गई प्रारंभिक जांच में यही सामने आया है कि इन 44 मामलों में जिन लोगों को शादी अनुदान दिलाने की कोशिश की गई। उनमें कोई भी पात्र नहीं है। जिन लड़कियों की शादी होने वाली दर्शाई गई है, उनकी शादी कई साल पहले हो चुकी है। जबकि शादी अनुदान के लिए नियम यह है कि आवेदन के वित्तीय वर्ष के अंदर या तो लड़की की शादी हुई हो या होने वाली हो, इसलिए इन मामलों में खेल किया गया है।
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ऐसे पकड़े गए मामले
चूंकि आयप्रमाण पत्र तहसील से जारी किए जाते हैं इसलिए अपने कार्यालय की डाक में आए इन 44 फार्मों के साथ लगाए गए आय प्रमाणपत्रों का अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने रेवन्यू की वेबसाइट से सत्यापन किया तो उनका मिलान नहीं हुआ। यह प्रमाणपत्र जिन नामों से जारी थे, उन पर दर्ज संख्या में वेबसाइट पर किसी और का नाम प्रदर्शित हो रहा था। इसके बाद अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने इन फार्मों को बहेड़ी तहसील में भिजवा दिया। वहां से एसडीएम ने इन्हें जारी न करने की बात कही। अपने, तहसीलदार, लेखपाल और कानूनगो के हस्ताक्षर फर्जी बताए।
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::::यह हैं मामले
-शेखूपुर की किशवरी बेगम की बेटी की शादी तीन साल पहले हो चुकी है लेकिन उसका शादी कार्ड वर्ष 2014 का छपवाकर दलालों ने अनुदान के जिला समाज कल्याण विभाग में फार्म के साथ लगा दिया।
-नदेली के नवी मियां की बेटी की शादी दो साल पहले हुई थी, लेकिन उनकी ओर से भी दलालों ने खेल किया। उनका फर्जी आय प्रमाणपत्र बनवाकर भिजवा दिया जिसके फार्म के साथ फर्जी विवाह प्रमाणपत्र भी लगाया गया।
-सिंगोही के बुंदू खां की बेटी की शादी को भी तीन साल से ज्यादा हो गए लेकिन उसकी शादी भी इसी साल दिखाकर फर्जी ढंग से आवेदन कर अनुदान लेने की कोशिश की गई। मामला पकड़ा गया है।
-लोधीपुरा की रुकसाना के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। उनकी बेटी का ब्याह तो हो भी नहीं पाया लेकिन दलालों ने साल भर के अंदर की तारीख का शादी कार्ड दर्शाकर अनुदान का आवेदन भेज दिया।
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वर्जन...
हमारे कार्यालय में आए फर्जी फार्मों के मामले की जांच अब एसडीएम को करनी है। उन्हें यह देखना चाहिए कि अलग-अलग लोगों की ओर से फर्जी फार्म भेजने में किसकी भूमिका है। इसके लिए उन्हें आवेदकों से भी जानकारी लेनी चाहिए, ताकि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
-जगमोहन सिंह, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी