{"_id":"f01e784166219041af3af3b5902e9009","slug":"crime-hindi-news-417","type":"story","status":"publish","title_hn":"कर्ज में डूबे पूर्व प्रधान ने फसल चौपट देख जान दी","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
कर्ज में डूबे पूर्व प्रधान ने फसल चौपट देख जान दी
बरेली
Updated Wed, 01 Apr 2015 01:38 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कर्ज से परेशान मिलक मझारा के पूर्व ग्राम प्रधान शिशुपाल बारिश की मार से चौपट हुई फसल देखकर इस कदर टूट गए कि मंगलवार को उन्होंने खेत से लौटते समय रास्ते में जहरीला पदार्थ खा लिया और घर आते ही उनकी हालत बिगड़ गई। घरवाले उनको निजी अस्पताल लाए, जहां उन्होंने दम तोड़ दिया। मरने से पहले छोड़े गए सुसाइड नोट में पूर्व प्रधान ने अपनी मौत का जिम्मेदार जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी को ठहराया है।
भमोरा के गांव मिलक मझारा निवासी 60 वर्षीय शिशुपाल गांव के प्रधान रह चुके थे। उन्होंने वर्ष 1995 में खादी ग्रामोद्योग के माध्यम से बैंक ऑफ इंडिया से 33 हजार रुपये कर्ज लिया था, जो बढ़कर अब अस्सी हजार पर पहुंच गया है। परिवार वालों के अनुसार खादी ग्रामोद्योग वालों ने बकाया अदा करने के लिए शिशुपाल पर दबाव बनाया। साथ ही आरसी जारी होने से वह परेशान रहने लगे। सोमवार को वह शासन से मदद मांगने लखनऊ गए थे। वहां वह बरेली में तैनात रहे एक डीएम से भी मिले, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। सोमवार को वहां से लौटने के बाद वह मंगलवार को जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी से मिले लेकिन कहीं से राहत मिलती नजर नहीं आई। इससे वह बेहद तनाव में थे। ऐसी ही मानसिक हालत में दोपहर ढाई बजे अपने खेत पर पहुंचे और यहां सोलह बीघा में बारिश से चौपट हुई गेहूं की फसल देखकर बाइक से घर लौटते समय रास्ते में कहीं जहरीला पदार्थ खा लिया और चुपचाप घर पहुंच गए। अचेत अवस्था में देख घरवाले उन्हें निजी अस्पताल लेकर आए, जहां देर शाम शिशुपाल ने दम तोड़ दिया। परिवार वाले बिना पोस्टमार्टम कराए शव गांव ले गए। शिशुपाल ने मुख्यमंत्री के नाम छोड़े गए सुसाइड नोट में लिखा कि उसने खादी ग्रामोद्योग से ऋण लिया था। इसे माफ कराने के लिए वह लखनऊ तक गया था। मंगलवार को वह जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी से मिला लेकिन उन्होंने कोई भी मदद करने से साफ इन्कार कर दिया।
शिशुपाल के बेटे सत्यप्रकाश ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग वाले जमीन नीलाम करने की बात कहते थे। दो साल पहले आरसी जारी कर दी गई थी। इसी बीच दो बार उसके पिता को पकड़ कर हवालात में भी डाला गया था। सोमवार को हुई बारिश से उनकी गेहूं की फसल चौपट हो गई। इन सब विपत्तियों से परेशान होकर उसके पिता ने खुदकुशी की है।
विज्ञापन
--इनसेट---
खुदकुशी के कारणों की जांच होगी
जिलाधिकारी गौरव दयाल का कहना है कि शिशुपाल के आत्महत्या के कारणों की जांच कराई जाएगी। हालांकि शिशुपाल ने बैंक से उद्योग के लिए कर्जा लिया था और वह किसान भी था। उसके पास 16 बीघा खेत था और बारिश के कारण फसल भी बरबाद हुई है। खुदकुशी करने से पहले वह खेत में क्षतिग्रस्त फसल देखने भी गया था। उसके परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए सरकार से सिफारिश की जाएगी।
---कोट------
शिशुपाल ने आटा चक्की के लिए कर्जा लिया था लेकिन चुकाया नहीं। उसके खिलाफ 50 हजार रुपये की आरसी जारी हो चुकी है। उसके कर्जे का मामला शासन में विचाराधीन है और मंगलवार को वह यह जानकारी करने आया था कि कितना कर्जा है। इसके अलावा कोई बात नहीं हुई।
- राम रतन, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी
विज्ञापन
भमोरा के गांव मिलक मझारा निवासी 60 वर्षीय शिशुपाल गांव के प्रधान रह चुके थे। उन्होंने वर्ष 1995 में खादी ग्रामोद्योग के माध्यम से बैंक ऑफ इंडिया से 33 हजार रुपये कर्ज लिया था, जो बढ़कर अब अस्सी हजार पर पहुंच गया है। परिवार वालों के अनुसार खादी ग्रामोद्योग वालों ने बकाया अदा करने के लिए शिशुपाल पर दबाव बनाया। साथ ही आरसी जारी होने से वह परेशान रहने लगे। सोमवार को वह शासन से मदद मांगने लखनऊ गए थे। वहां वह बरेली में तैनात रहे एक डीएम से भी मिले, लेकिन कोई मदद नहीं मिली। सोमवार को वहां से लौटने के बाद वह मंगलवार को जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी से मिले लेकिन कहीं से राहत मिलती नजर नहीं आई। इससे वह बेहद तनाव में थे। ऐसी ही मानसिक हालत में दोपहर ढाई बजे अपने खेत पर पहुंचे और यहां सोलह बीघा में बारिश से चौपट हुई गेहूं की फसल देखकर बाइक से घर लौटते समय रास्ते में कहीं जहरीला पदार्थ खा लिया और चुपचाप घर पहुंच गए। अचेत अवस्था में देख घरवाले उन्हें निजी अस्पताल लेकर आए, जहां देर शाम शिशुपाल ने दम तोड़ दिया। परिवार वाले बिना पोस्टमार्टम कराए शव गांव ले गए। शिशुपाल ने मुख्यमंत्री के नाम छोड़े गए सुसाइड नोट में लिखा कि उसने खादी ग्रामोद्योग से ऋण लिया था। इसे माफ कराने के लिए वह लखनऊ तक गया था। मंगलवार को वह जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी से मिला लेकिन उन्होंने कोई भी मदद करने से साफ इन्कार कर दिया।
विज्ञापन
शिशुपाल के बेटे सत्यप्रकाश ने बताया कि खादी ग्रामोद्योग वाले जमीन नीलाम करने की बात कहते थे। दो साल पहले आरसी जारी कर दी गई थी। इसी बीच दो बार उसके पिता को पकड़ कर हवालात में भी डाला गया था। सोमवार को हुई बारिश से उनकी गेहूं की फसल चौपट हो गई। इन सब विपत्तियों से परेशान होकर उसके पिता ने खुदकुशी की है।
विज्ञापन
--इनसेट---
खुदकुशी के कारणों की जांच होगी
जिलाधिकारी गौरव दयाल का कहना है कि शिशुपाल के आत्महत्या के कारणों की जांच कराई जाएगी। हालांकि शिशुपाल ने बैंक से उद्योग के लिए कर्जा लिया था और वह किसान भी था। उसके पास 16 बीघा खेत था और बारिश के कारण फसल भी बरबाद हुई है। खुदकुशी करने से पहले वह खेत में क्षतिग्रस्त फसल देखने भी गया था। उसके परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए सरकार से सिफारिश की जाएगी।
---कोट------
शिशुपाल ने आटा चक्की के लिए कर्जा लिया था लेकिन चुकाया नहीं। उसके खिलाफ 50 हजार रुपये की आरसी जारी हो चुकी है। उसके कर्जे का मामला शासन में विचाराधीन है और मंगलवार को वह यह जानकारी करने आया था कि कितना कर्जा है। इसके अलावा कोई बात नहीं हुई।
- राम रतन, जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी