घर में अकेले रह रहे पति-पत्नी का कत्ल
सीबीगंज के मूल निवासी गोपेश्वर सिंह मथुरा रिफायनरी में इंजीनियर पद से तीस सितंबर 2014 को रिटायर हुए थे। पत्नी आशा के साथ वे 25 जनवरी को अपने इस घर में शिफ्ट हुए। इससे पहले इसमें पंद्रह साल से किरायेदार ही रह रहे थे। रिजर्व नेचर के दंपति अक्सर अपनी कोठी के अंदर ही रहते थे। पुत्र सौरभ और उसकी पत्नी सोनम फिनलैंड में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। सौरभ सोमवार शाम छह बजे से अपने मां और पिता को लगातार कॉल कर रहे थे। फोन न उठने पर करीब साढ़े आठ बजे उन्होंने पड़ोस में रहने वाली सपा नेत्री रेखा सिंह को कॉल करके समस्या बताई। रेखा ने लोहे के मेनगेट को धक्का दिया तो अंदर से ताला लगा था। उन्होंने देखा कि ड्राइंगरूम का गेट हल्का सा खुला है। उन्हें संदेह हुआ तो पड़ोसियों को बुला लिया। भीड़ लगी तो दो तीन युवक लोहे का गेट फांदकर अंदर घुसे। वहां सबकुछ अस्त व्यस्त देखकर बिना बेडरूम गए ही लौट आए। इन्होंने फोन करके जोगी नवादा चौकी प्रभारी गजेंद्र त्यागी को बुला लिया। पुलिस ने लोहे के गेट का ताला तोड़ा। लोग अंदर गए तो बेड पर गोपेश्वर और आशा के शव एकदूसरे की ओर पैर करके पड़े हुए थे। दोनों के चेहरे लहूलुहान थे। जमीन पर लोहे का एक एंगल पड़ा था। ऐसा लगता कि हत्या दोपहर बाद किसी समय हुई जब गोपेश्वर संभवत: सो रहे थे। पत्नी का शव उनके पैरों की तरफ पड़ा है जिससे लगता है कि उन्होंने उठ कर विरोध करने की कोशिश की होगी तो उन पर भी तत्काल वार कर दिया गया। घर में अलमारियां खुली थीं और सारा सामान बिखरा पड़ा था। पहले एसएसपी और एसपी सिटी तो बाद में आईजी और डीआईजी पहुंचे। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह लूट के बाद हत्या का मामला हो सकता है। हालांकि लूट के माल की स्थिति सौरभ से ही पता चल सकती है। सौरभ के मंगलवार दोपहर तक बरेली पहुंचने की उम्मीद है। सीबीगंज की आईटीआर कालोनी से गोपेश्वर के बड़े भाई वीर सिंह और उनके बेटे साकेत तथा शेखर भी पहुंचे। इन्हें भी सौरभ ने फोन करके पिता का फोन न उठने की जानकारी दी थी।
सीबीगंज के मूल निवासी गोपेश्वर सिंह मथुरा रिफायनरी में इंजीनियर पद से तीस सितंबर 2014 को रिटायर हुए थे। पत्नी आशा के साथ वे 25 जनवरी को अपने इस घर में शिफ्ट हुए। इससे पहले इसमें पंद्रह साल से किरायेदार ही रह रहे थे। रिजर्व नेचर के दंपति अक्सर अपनी कोठी के अंदर ही रहते थे। पुत्र सौरभ और उसकी पत्नी सोनम फिनलैंड में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। सौरभ सोमवार शाम छह बजे से अपने मां और पिता को लगातार कॉल कर रहे थे। फोन न उठने पर करीब साढ़े आठ बजे उन्होंने पड़ोस में रहने वाली सपा नेत्री रेखा सिंह को कॉल करके समस्या बताई। रेखा ने लोहे के मेनगेट को धक्का दिया तो अंदर से ताला लगा था। उन्होंने देखा कि ड्राइंगरूम का गेट हल्का सा खुला है। उन्हें संदेह हुआ तो पड़ोसियों को बुला लिया। भीड़ लगी तो दो तीन युवक लोहे का गेट फांदकर अंदर घुसे। वहां सबकुछ अस्त व्यस्त देखकर बिना बेडरूम गए ही लौट आए। इन्होंने फोन करके जोगी नवादा चौकी प्रभारी गजेंद्र त्यागी को बुला लिया। पुलिस ने लोहे के गेट का ताला तोड़ा। लोग अंदर गए तो बेड पर गोपेश्वर और आशा के शव एकदूसरे की ओर पैर करके पड़े हुए थे। दोनों के चेहरे लहूलुहान थे। जमीन पर लोहे का एक एंगल पड़ा था। ऐसा लगता कि हत्या दोपहर बाद किसी समय हुई जब गोपेश्वर संभवत: सो रहे थे। पत्नी का शव उनके पैरों की तरफ पड़ा है जिससे लगता है कि उन्होंने उठ कर विरोध करने की कोशिश की होगी तो उन पर भी तत्काल वार कर दिया गया। घर में अलमारियां खुली थीं और सारा सामान बिखरा पड़ा था। पहले एसएसपी और एसपी सिटी तो बाद में आईजी और डीआईजी पहुंचे। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि यह लूट के बाद हत्या का मामला हो सकता है। हालांकि लूट के माल की स्थिति सौरभ से ही पता चल सकती है। सौरभ के मंगलवार दोपहर तक बरेली पहुंचने की उम्मीद है। सीबीगंज की आईटीआर कालोनी से गोपेश्वर के बड़े भाई वीर सिंह और उनके बेटे साकेत तथा शेखर भी पहुंचे। इन्हें भी सौरभ ने फोन करके पिता का फोन न उठने की जानकारी दी थी।