साक्ष्य के अभाव में दंगे के तीन आरोपी बरी
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थाना प्रेमनगर में अनिल अग्रवाल ने रिपोर्ट लिखाई थी कि दो मार्च 2010 को भड़के दंगे के दौरान शाम चार बजे अज्ञात लोगों ने उनके रेस्टोरेंट पर हमला कर दिया। वे ताले तोड़कर अंदर घुस आए और दो जूसर, वारदाना, कैश और कोल्ड ड्रिंक्स की बोतलें लूट ले गए। कर्फ्यू खुलने पर पता चला कि उनका डेढ़ लाख रुपये का नुकसान हो गया। रोहित सूरी ने रिपोर्ट लिखाई थी कि उनकी रायल इनफील्ड मोटर साइकिल की एजेंसी में दंगाइयों ने आग लगा दी जिसमें तीस लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ। इन मामलों में पुलिस ने विवेचना के बाद इरफान उर्फ मुल्ला व इरशाद के खिलाफ आगजनी और लूट की धारा 436 व 395 के तहत आरोप पत्र दाखिल किया था।
इरफान उर्फ मुल्ला और रफत उर्फ सन्नू के खिलाफ इसी दिन अशोक सक्सेना, सुनील कुमार व आकाश सक्सेना ने भी आगजनी और लूट की रिपोर्ट लिखाई थीं। सब इंस्पेक्टर पवन निधि शर्मा ने तीनों मामले में आरोप पत्र दाखिल किया। इन पांचों मामलों की सुनवाई विशेष न्यायाधीश ईसी एक्ट के न्यायालय में हुई। स्वतंत्र गवाहों ने अभियोजन की कहानी को पुष्ट नहीं किया जिस पर तीनों आरोपियों को बरी कर दिया गया। हालांकि न्यायालय ने यह भी व्यवस्था दी कि इन मामलों में अपील होने की स्थिति में उच्च न्यायालय में उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए तीनों आरोपियों से दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 437 ए के तहत प्रत्येक मामले में तीस-तीस हजार रुपये की धनराशि के दो-दो जमानती और इतनी ही राशि के व्यक्तिगत बंधनामे 20 दिन के अंदर दाखिल कराए जाएं।