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अब सस्पेंड हुए तीन लेखपाल
बरेली
Updated Fri, 30 Jan 2015 12:35 AM IST
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राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के फर्जीवाड़े में फंसे तहसील के नौ लेखपालों में से तीन बृहस्पतिवार को सस्पेंड कर दिए गए। इनमें से एक और को सस्पेंड करने के लिए सदर तहसील के एसडीएम को लिखा गया है। बाकी पांच पर भी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। हालांकि इनमें से एक लेखपाल रिटायर भी हो चुका है।
पारिवारिक लाभ योजना में फर्जीवाडे़ में दलाल सेवाराम की गिरफ्तारी और तहसील के विभिन्न गांवों की 66 अपात्र लाभार्थी महिलाओं पर मुकदमा तो पहले ही दर्ज किया जा चुका है। एसडीएम कुंवर पंकज ने बताया कि सिमरिया गांव में तैनात रहे लेखपाल श्यामलाल, बूंची में तैनात रहे ब्रजलाल, दुनका के लेखपाल विजय कुमार सक्सेना को सस्पेंड किया गया है। इनके अलावा लेखपाल अनवर सईद, नन्हें प्रसाद, अरुण कुमार, मानवीर सिंह और रिटायर हो चुके शिशुपाल के खिलाफ कार्रवाई होनी है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्र बनने के दौरान मीरगंज तहसील में तैनात रहे लेखपाल अशोक दीक्षित इस समय सदर तहसील में कार्यरत हैं, इसलिए उन पर कार्रवाई के लिए एसडीएम सदर को लिखा है। बता दें कि एसडीएम की जांच में यह सामने आ चुका है कि इन लेखपालों ने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र को सही बताते हुए संस्तुति की थी।
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बैरमनगर में भी भारी गड़बड़झाले के संकेत
हालांकि कई दिन टालमटोल के बाद स्थलीय जांच को पहुंचे तहसीलदार सबको क्लीनचिट दे रहे
पारिवारिक लाभ योजना फर्जीबाड़ा
मीरगंज/दुनका। दुनका की तरह बैरमनगर में भी तहसीलदार की स्थलीय जांच में पारिवारिक लाभ योजना में भारी घपले के संकेत मिले हैं। 13 में से नौ लाभार्थी तहसीलदार के समक्ष पेश हुईं। इनमें से आठ ने बकैनिया वीरपुर के दलाल विष्णु शर्मा पर 10-10 हजार रुपये लेने और उन्हें भी इतनी ही रकम देने की बात साफ तौर पर कही। हालांकि तहसीलदार बैरमनगर में कोई अपात्र न मिलने की बात कह रहे हैं।
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कई दिन तक टालमटोल के बृहपतिवार को आखिरकार तहसीलदार मीरगंज कुंवर बहादुर सिंह पारिवारिक लाभ योजना में कथित फजीवाड़े की स्थलीय जांच के लिए ब्लाक शेरगढ़ के गांव बैरमनगर पहुंचे। यहां 13 लाभार्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी होने का अंदेशा जाहिर करते हुए डीएम ने सघन स्थलीय जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान कानूनगो विजयपाल साहू, लेखपाल सत्यदेव गंगवार और ग्राम विकास अधिकारी रामसुरेश गुप्ता भी रहे। नौ में से आठ महिलाओं ने बकैनिया वीरपुर के दलाल विष्णु शर्मा का नाम लेते हुए दस-दस हजार खुद हड़पने और दस-दस हजार रुपये ही उन सबको देने का खुला आरोप लगाया। एक महिला ने बताया कि उसका फार्म भरवाने और लाभ दिलवाने में एक करीबी रिश्तेदार ने मदद की थी। उधर, बैरमनगर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी रामसुरेश गुप्ता ने बताया कि रफीकन पत्नी बुंदन का मृत्यु प्रमाणपत्र फर्जी है। बाकी 12 लाभार्थियों के पति के मृत्यु प्रमाणपत्र भी उनके कार्यकाल से पहले के हैं। उनसे पहले यहां सुम्मेरीलाल की तैनाती थी। स्थलीय जांच में ज्यादातर लाभार्थी महिलाओं के पतियों की मृत्यु आवेदन तिथि से दो से चार साल पहले की पाई गई है।
इंसेट...
शक के दायरे में ये हैं बैरम नगर की लाभार्थी- रफीकन, प्रेमवती, सईदन, छोटी, जमीलन, नन्हीं, गंगादेवी, धनदेवी, शकीला बेगम, शहाना, सावित्री, सूखी और बेलावती।
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इंसेट...
अभी और सामने आ सकते हैं घपले
डीएम की बनाईं 30 टीमें भी कर रहीं पुराने मामलों की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। समाज कल्याण की पारिवारिक लाभ योजना में चालू वित्तीय वर्ष में 118 फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र पकड़े जाने के बाद मीरगंज और फरीदपुर में चल रही कार्रवाई के साथ पिछले दो वित्तीय 2012-13 और 2013-14 के लाभार्थियों के फार्मों के साथ लगाए गए प्रमाणपत्रों की जांच भी की जाने लगी है। डीएम के आदेश पर गठित अधिकारियों की 30 टीमें जिले में जांच कर रही हैं। इन टीमों को दोनों वित्तीय वर्षों के लगभग पांच हजार से ज्यादा लाभार्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच करनी है। डीएम ने सभी टीमों से सप्ताहभर में जांच रिपोर्ट तलब की है। टीम प्रत्येक लाभार्थी के गांव में जाकर यह पता लगाएंगी कि जिन मृतकों के नाम पर पारिवारिक लाभ का पैसा लिया गया है, उनकी मृत्यु कब हुई। प्रमाणपत्र पर अंकित तिथि उनकी मृत्यु की सही तिथि है या नहीं। यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित अभ्यर्थी के फर्जी प्रमाणपत्र किसने बनवाए। इस जांच में बड़ी तादाद में फर्जी प्रमाणपत्र पकड़ में आने की आशंका है।
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पारिवारिक लाभ योजना में फर्जीवाडे़ में दलाल सेवाराम की गिरफ्तारी और तहसील के विभिन्न गांवों की 66 अपात्र लाभार्थी महिलाओं पर मुकदमा तो पहले ही दर्ज किया जा चुका है। एसडीएम कुंवर पंकज ने बताया कि सिमरिया गांव में तैनात रहे लेखपाल श्यामलाल, बूंची में तैनात रहे ब्रजलाल, दुनका के लेखपाल विजय कुमार सक्सेना को सस्पेंड किया गया है। इनके अलावा लेखपाल अनवर सईद, नन्हें प्रसाद, अरुण कुमार, मानवीर सिंह और रिटायर हो चुके शिशुपाल के खिलाफ कार्रवाई होनी है। इसकी प्रक्रिया चल रही है। वहीं, फर्जी प्रमाणपत्र बनने के दौरान मीरगंज तहसील में तैनात रहे लेखपाल अशोक दीक्षित इस समय सदर तहसील में कार्यरत हैं, इसलिए उन पर कार्रवाई के लिए एसडीएम सदर को लिखा है। बता दें कि एसडीएम की जांच में यह सामने आ चुका है कि इन लेखपालों ने फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र को सही बताते हुए संस्तुति की थी।
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बैरमनगर में भी भारी गड़बड़झाले के संकेत
हालांकि कई दिन टालमटोल के बाद स्थलीय जांच को पहुंचे तहसीलदार सबको क्लीनचिट दे रहे
पारिवारिक लाभ योजना फर्जीबाड़ा
मीरगंज/दुनका। दुनका की तरह बैरमनगर में भी तहसीलदार की स्थलीय जांच में पारिवारिक लाभ योजना में भारी घपले के संकेत मिले हैं। 13 में से नौ लाभार्थी तहसीलदार के समक्ष पेश हुईं। इनमें से आठ ने बकैनिया वीरपुर के दलाल विष्णु शर्मा पर 10-10 हजार रुपये लेने और उन्हें भी इतनी ही रकम देने की बात साफ तौर पर कही। हालांकि तहसीलदार बैरमनगर में कोई अपात्र न मिलने की बात कह रहे हैं।
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कई दिन तक टालमटोल के बृहपतिवार को आखिरकार तहसीलदार मीरगंज कुंवर बहादुर सिंह पारिवारिक लाभ योजना में कथित फजीवाड़े की स्थलीय जांच के लिए ब्लाक शेरगढ़ के गांव बैरमनगर पहुंचे। यहां 13 लाभार्थियों के प्रमाणपत्र फर्जी होने का अंदेशा जाहिर करते हुए डीएम ने सघन स्थलीय जांच के आदेश दिए थे। जांच के दौरान कानूनगो विजयपाल साहू, लेखपाल सत्यदेव गंगवार और ग्राम विकास अधिकारी रामसुरेश गुप्ता भी रहे। नौ में से आठ महिलाओं ने बकैनिया वीरपुर के दलाल विष्णु शर्मा का नाम लेते हुए दस-दस हजार खुद हड़पने और दस-दस हजार रुपये ही उन सबको देने का खुला आरोप लगाया। एक महिला ने बताया कि उसका फार्म भरवाने और लाभ दिलवाने में एक करीबी रिश्तेदार ने मदद की थी। उधर, बैरमनगर में तैनात ग्राम विकास अधिकारी रामसुरेश गुप्ता ने बताया कि रफीकन पत्नी बुंदन का मृत्यु प्रमाणपत्र फर्जी है। बाकी 12 लाभार्थियों के पति के मृत्यु प्रमाणपत्र भी उनके कार्यकाल से पहले के हैं। उनसे पहले यहां सुम्मेरीलाल की तैनाती थी। स्थलीय जांच में ज्यादातर लाभार्थी महिलाओं के पतियों की मृत्यु आवेदन तिथि से दो से चार साल पहले की पाई गई है।
इंसेट...
शक के दायरे में ये हैं बैरम नगर की लाभार्थी- रफीकन, प्रेमवती, सईदन, छोटी, जमीलन, नन्हीं, गंगादेवी, धनदेवी, शकीला बेगम, शहाना, सावित्री, सूखी और बेलावती।
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अभी और सामने आ सकते हैं घपले
डीएम की बनाईं 30 टीमें भी कर रहीं पुराने मामलों की जांच
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली। समाज कल्याण की पारिवारिक लाभ योजना में चालू वित्तीय वर्ष में 118 फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र पकड़े जाने के बाद मीरगंज और फरीदपुर में चल रही कार्रवाई के साथ पिछले दो वित्तीय 2012-13 और 2013-14 के लाभार्थियों के फार्मों के साथ लगाए गए प्रमाणपत्रों की जांच भी की जाने लगी है। डीएम के आदेश पर गठित अधिकारियों की 30 टीमें जिले में जांच कर रही हैं। इन टीमों को दोनों वित्तीय वर्षों के लगभग पांच हजार से ज्यादा लाभार्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच करनी है। डीएम ने सभी टीमों से सप्ताहभर में जांच रिपोर्ट तलब की है। टीम प्रत्येक लाभार्थी के गांव में जाकर यह पता लगाएंगी कि जिन मृतकों के नाम पर पारिवारिक लाभ का पैसा लिया गया है, उनकी मृत्यु कब हुई। प्रमाणपत्र पर अंकित तिथि उनकी मृत्यु की सही तिथि है या नहीं। यह भी पता लगाया जाएगा कि संबंधित अभ्यर्थी के फर्जी प्रमाणपत्र किसने बनवाए। इस जांच में बड़ी तादाद में फर्जी प्रमाणपत्र पकड़ में आने की आशंका है।