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बहेड़ी में फिर हमलावर हुए कुत्ते, बच्चे को नोचा
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Sun, 29 Jan 2017 01:09 AM IST
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Bahedi offending dog again, the child scratched
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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आदमखोर कुत्ते फिर हमलावर होने लगे हैं। शनिवार को आदलपुर गांव में तालाब किनारे शौच को जा रहे नौ साल के एक बच्चे पर छह आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। चीख पुकार पर पहुंचे ग्रामीणों ने डंडे और ईंट मारकर कुत्तों के झुंड को भगाया। बच्चे के पेट और पैर में कई जगह कुत्तों ने काटा डाला। घायल बच्चे को परिवार वाले जैसे-तैसे 12 किलोमीटर दूर सीएचसी लेकर पहुंचे मगर वहां रैबीज का इंजेक्शन उपलब्ध नहीं था। प्राथमिक इलाज के बाद बच्चे को जिला अस्पताल भेज दिया गया।
आदलपुर के मनमीत का बेटा संदीप गांव के प्राइमरी स्कूल में छठी क्लास में पढ़ता है। शाम छह बजे वह घर से दो सौ मीटर दूर तालाब किनारे शौच को अकेला गया था। पास के गन्ने के खेत से अचानक कुत्तों का झुंड आया और उस पर हमला कर दिया। सीएचसी प्रभारी डॉ. केसी जोशी ने बताया कि सीएचसी पर रैबीज के इंजेक्शन की कमी चल रही है। डिमांड के लिए जिला अस्पताल को लिखकर भेजा है। बच्चे को इंजेक्शन की जरूरत थी, इसलिए उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
अब तक हो चुकी है 12 बच्चों की मौत
तीन वर्षों में आवारा कुत्तों के हमलों की 60 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 12 बच्चों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने कुत्तों को पकड़ने के लिए समय-समय पर अभियान चलाने का दावा किया मगर यह दो-तीन दिन से ज्यादा नहीं चला। गलियों में अवैध रूप से बने स्लाटर हाउसों को बंद करने का फरमान भी हवा हवाई साबित हुआ है।
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आदलपुर के मनमीत का बेटा संदीप गांव के प्राइमरी स्कूल में छठी क्लास में पढ़ता है। शाम छह बजे वह घर से दो सौ मीटर दूर तालाब किनारे शौच को अकेला गया था। पास के गन्ने के खेत से अचानक कुत्तों का झुंड आया और उस पर हमला कर दिया। सीएचसी प्रभारी डॉ. केसी जोशी ने बताया कि सीएचसी पर रैबीज के इंजेक्शन की कमी चल रही है। डिमांड के लिए जिला अस्पताल को लिखकर भेजा है। बच्चे को इंजेक्शन की जरूरत थी, इसलिए उपचार के बाद उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया।
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अब तक हो चुकी है 12 बच्चों की मौत
तीन वर्षों में आवारा कुत्तों के हमलों की 60 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 12 बच्चों की मौत हो चुकी है। प्रशासन ने कुत्तों को पकड़ने के लिए समय-समय पर अभियान चलाने का दावा किया मगर यह दो-तीन दिन से ज्यादा नहीं चला। गलियों में अवैध रूप से बने स्लाटर हाउसों को बंद करने का फरमान भी हवा हवाई साबित हुआ है।
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