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अस्मत को एसिड से मार डाला, जख्मी तो पूरा घर हुआ
बरेली, ब्यूरो
Updated Fri, 02 Dec 2016 01:44 AM IST
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tejab
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मुगलान मोहल्ले में एसिड अटैक से मारी गई 17 साल की बहादुर लड़की अस्मत बी को जालिमों ने एसिड से जला कर मार डाला उसके जाने के बाद पूरा परिवार ही बिखर सा गया है। दो बहनें और दो भाई अब जवानी की दहलीज पर कदम रख रहे हैं। जैसे-तैसे जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ रही है। उसकी जान लेने वाले दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाए जाने को घर वालों ने इंसाफ की जीत बताया है। उनका कहना है कि चार साल से वे इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे थे। इस फैसले से उनके जख्मों पर कुछ तो मरहम लगा है।
अस्मत बी को दो सितंबर 2012 को सिर्फ इसलिए जान गंवानी पड़ी थी कि उसने मोहल्ले के आसिफ को एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखकर शिकायत कर दी थी। अस्मत साहसी थी। पिता मुन्नवर बेग की मौत हो चुकी थी और मां के मानसिक रूप से कमजोर होने के बाद भी उसने जिंदगी की गाड़ी को खुद आगे बढ़ाने का फैसला किया था। बड़ी बहन सीमा की शादी के बाद दो छोटे भाई और दो बहनों की जिम्मेदारी अस्मत के कंधों पर आ गई थी। उसने परचून की दुकान खोल ली। खुद नौवीं में पढ़ती थी और भाई बहनों को भी पढ़ा रही थी। अस्मत के तहेरे भाई मोबीन ने बताया कि एसिड अटैक से बुरी तरह झुलसने के बाद भी अस्मत ने हमलावरों का काफी दूर तक पीछा भी किया था लेकिन वे हाथ नहीं आए। उन्होंने कहा कि अस्मत की मौत के बाद सब कुछ खत्म हो गया। अच्छी खासी दुकान बंद हो गई। भाई बहन अनाथ जैसे हो गए। जिस फूफा शब्बीर बेग ने उसकी पैरवी की थी वह भी दो महीने पहले चल बसे हैं। अस्मत की बहन शैलाब और फिजा ने इंटर कर लिया है। भाई अफजल बेग 11वीं और अनमल नौंवी में पढ़ रहे हैं। मां कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। चचेरे भाई वकील जहांगीर बेग उनकी देखरेख कर रहे हैं। शैलाब ने कहा कि दीदी की हत्या के बाद दुकान बंद हो गईं। शुरू में हमें धमकियां भी मिलीं मगर फूफा और चचेरे भाइयों ने हौसला बढ़ाया। हमें कानून पर पूरा भरोसा था। उम्मीद थी कि हत्यारों को सख्त सजा जरूर मिलेगी। बृहस्पतिवार को जब लोगों ने सजा की खबर सुनी तो घर में लोगों का आना जाना लगा रहा।
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अस्मत बी को दो सितंबर 2012 को सिर्फ इसलिए जान गंवानी पड़ी थी कि उसने मोहल्ले के आसिफ को एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखकर शिकायत कर दी थी। अस्मत साहसी थी। पिता मुन्नवर बेग की मौत हो चुकी थी और मां के मानसिक रूप से कमजोर होने के बाद भी उसने जिंदगी की गाड़ी को खुद आगे बढ़ाने का फैसला किया था। बड़ी बहन सीमा की शादी के बाद दो छोटे भाई और दो बहनों की जिम्मेदारी अस्मत के कंधों पर आ गई थी। उसने परचून की दुकान खोल ली। खुद नौवीं में पढ़ती थी और भाई बहनों को भी पढ़ा रही थी। अस्मत के तहेरे भाई मोबीन ने बताया कि एसिड अटैक से बुरी तरह झुलसने के बाद भी अस्मत ने हमलावरों का काफी दूर तक पीछा भी किया था लेकिन वे हाथ नहीं आए। उन्होंने कहा कि अस्मत की मौत के बाद सब कुछ खत्म हो गया। अच्छी खासी दुकान बंद हो गई। भाई बहन अनाथ जैसे हो गए। जिस फूफा शब्बीर बेग ने उसकी पैरवी की थी वह भी दो महीने पहले चल बसे हैं। अस्मत की बहन शैलाब और फिजा ने इंटर कर लिया है। भाई अफजल बेग 11वीं और अनमल नौंवी में पढ़ रहे हैं। मां कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। चचेरे भाई वकील जहांगीर बेग उनकी देखरेख कर रहे हैं। शैलाब ने कहा कि दीदी की हत्या के बाद दुकान बंद हो गईं। शुरू में हमें धमकियां भी मिलीं मगर फूफा और चचेरे भाइयों ने हौसला बढ़ाया। हमें कानून पर पूरा भरोसा था। उम्मीद थी कि हत्यारों को सख्त सजा जरूर मिलेगी। बृहस्पतिवार को जब लोगों ने सजा की खबर सुनी तो घर में लोगों का आना जाना लगा रहा।
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