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आला हजरत खानदान की बहू अब आईजी की शरण में
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
Updated Tue, 27 Dec 2016 01:52 AM IST
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Ala Hazrat family's daughter is now in the shelter of IG
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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डेढ़ साल से भारतीय कानून व्यवस्था के साथ ही शरई कानून के हिसाब से भी न्याय की जंग लड़ रही आला हजरत परिवार की बहू निदा खान सोमवार को आईजी जोन विजय सिंह मीना के दफ्तर में पहुंच गई। इस युवती का कहना है कि निकाह तलाक और हर्जाने के मामलात के अलावा अब उसके सामने जिंदगी का संकट है। वह बहुत ताकतवर लोगों के खिलाफ लड़ रही है और पिछले सप्ताह कचहरी में तेजाब डालने की धमकी मिलने के बाद से वह और भी असुरक्षित हो गई है इसलिए उसे सुरक्षा दी जाए। आईजी से मिल कर उसने कहा कि अगर इंसाफ नहीं मिला तो वह जी नहीं पाएगी। एक बार मुलाकात करने के बाद वह फिर से लौट कर आयी और इस बार उसका कहना था कि उसकी जान को कुछ भी हुआ तो इसकी जिम्मेदार पुलिस होगी। आईजी ने उसे पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है। तलाक का मामला उसने अपने ही खानदानी शहर काजी के सामने में रखा है लेकिन वह भी इस मसले पर कोई फैसला नहीं दे पाए हैं। निदा कहती है तलाक नहीं हुआ जबकि उनके पति का कहना है कि रजामंदी से हुआ।
ये लड़ाई खानदानी प्रतिष्ठा की बन गई है जिसका अब तक हर स्तर पर लिहाज भी किया गया है। विवाद की जड़ में है बेमेल विवाह। कान्वेंट में पढ़ी यह युवती उन बंदिशों को स्वीकार करने की मन:स्थिति में कतई नहीं हैं जो खानदानी बहू होने के नाते उस पर आयद हो गई थी। कहानी तब और बिगड़ गई जब उसे आगे पढ़ने से रोक दिया गया और परीक्षा हाल से उठाकर वापस ले आया गया। शीरान खानदानी तो हैं मगर फिलहाल कोई काम नहीं करते हैं। मदरसे से आलिम की तालीम हासिल कर रहे हैं।
शाहदाना निवासी मुसर्रत यार खां की पुत्री निदा खान की शादी 18 फरवरी 2015 में नबीरे आला हजरत उसमान रजा खां के पुत्र शीरान रजा खां के साथ हुई। निदा ने पुलिस आदालत और शहर काजी के यहां दी गई अर्जियों में आरोप लगाए हैं कि शादी के चार पांच महीने के बाद ही उसका उत्पीड़न होने लगा। शादी के एक महीने बाद मार्च में पहला मुद्दा पढ़ाई का सामने आया। 25 मार्च 15 को वह बरेली कालेज में एम. काम की परीक्षा दे रही थी। अचानक पति शीरान रजा खां कालेज में आए और परीक्षा से उठा कर ले गए।
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निदा का आरोप है कि उसके बाद से ही रोज मारपीट होने लगी। स्विफ्ट की जगह डस्टर की मांग होने लगे। जुलाई में वह गर्भवती थी घर से निकालने के दौरान मारपीट में उसका गर्भ भी गिर गया। फिर वह मायके में ही रही, शीरान उसे लेने नहीं आया। इसी बीच मई में उसे पता चला कि शीरान दूसरा निकाह कर रहे हैं। तब लड़की वालों के घर जा कर परिवार को आगाह किया और फिर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। निदा का कहना है कि परिवार के रसूख के कारण पुलिस ने पहले उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो अधिकारियों से मिली। वहां भी बात नहीं बनी तो ही महिला आयोग में अर्जी डाली। फिर सीधे अदालत की शरण में गई तो अदालत के आदेश पर बारादरी थाने में मुकदमा दर्ज हो पाया।
निदा का कहना है उसके पक्ष के लोगों से मिले बिना पुलिस ने उनकी बात लिख कर एफआर लगा दी। उसके प्रोटेस्ट पर अब अदालत ने नया मुकदमा पंजीकृत करते हुए सुनवाई के लिए 23 जनवरी 2017 की तारीख दी है। निदा का कहना है कि उसने काफी कोशिश की कि बात न बिगड़े, मगर हालात बिगड़ते गए इसलिए उसे पुलिस और अदालत का सहारा लेना पड़ा। आईजी ने मामले में एसएसपी से बात करके निदा के आरोपों की जांच कराकर कार्रवाई करने को कहा है। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि शिकायत मिलेगी तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विवेचक बोले, मैंने सही किया
थाना बारादरी के दरोगा रामचंद्र ने निदा खान के मुकदमे की विवेचना की। उन्होंने बताया कि एफआईआर को ही उन्होंने निदा के बयान मान लिया। शीरान रजा के परिवार वालों ने निदा का सामान वापस कर दिया। मेहर से रुपये भी दे दिए हैं। इसी आधार पर उन्होंने केस बंद कर दिया।
शीरान ने कहा, पत्नी ने बेवजह मुल्जिम बना दिया
निदा खान के पति शीरान रजा खां ने अपनी पत्नी के सारे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि बेकसूर होने के बावजूद पत्नी ने उन्हें मुल्जिन बना दिया है। लोग लड़की समझ कर उसे ही सही मान रहें हैं।
उन्होंने बताया कि फैशनपरस्त मॉर्डन लड़की है। कोर्ट आती है तो नकाब पहन कर और शहर में घूमती है तो बिना नकाब के। पुराने दोस्तों से भी मिलना जुलना रहता है। उसने मुझे कभी पसंद नहीं किया। कहती थी कि दाढ़ी-टोपी वाले उसे पसंद नहीं। उसने कहा कि मुझे आजाद कर दो, मेरी शादी गलत हो गई। दोनों परिवारों में बात हुई तारीख तय हुई कि बैठ कर सुलह सफाई से तलाक हो जाए। हम उनके घर पहुंचे। हमारी तरफ से बात रखी गई कि जो कुछ शादी में दिया है वह वापस ले लो। वे अधिक पैसा मांग रहे हैं। तीन दिन पहले कोर्ट में हमारे एक साथी के साथ निदा ने ही बदतमीजी की और खुद ही मुकदमा लिखाने पहुंच गईं। हमें निदा पक्ष की ओर से बराबर खतरा बना हुआ है। उसने तो शादी के बाद हक्क-ए-जौजियत (शादी के बाद के रिश्ते) तक अदा नहीं की है। पूरे रमजान भर वह मेरे घर पर नहीं रहीं। अपने भाई मोईन के साथ रात में आती थी और सुबह अपने घर चली जाती थी।
जहां तक पढ़ाई का मामला है तो रोकने के लिए कोई दबाव नहीं डाला। परीक्षा के दौरान निदा ने खुद ही फोन किया कि लेने आ जाओ मेरी मां की तबियत खराब है। वह अपनी मरजी से घर तक आई।
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ये लड़ाई खानदानी प्रतिष्ठा की बन गई है जिसका अब तक हर स्तर पर लिहाज भी किया गया है। विवाद की जड़ में है बेमेल विवाह। कान्वेंट में पढ़ी यह युवती उन बंदिशों को स्वीकार करने की मन:स्थिति में कतई नहीं हैं जो खानदानी बहू होने के नाते उस पर आयद हो गई थी। कहानी तब और बिगड़ गई जब उसे आगे पढ़ने से रोक दिया गया और परीक्षा हाल से उठाकर वापस ले आया गया। शीरान खानदानी तो हैं मगर फिलहाल कोई काम नहीं करते हैं। मदरसे से आलिम की तालीम हासिल कर रहे हैं।
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शाहदाना निवासी मुसर्रत यार खां की पुत्री निदा खान की शादी 18 फरवरी 2015 में नबीरे आला हजरत उसमान रजा खां के पुत्र शीरान रजा खां के साथ हुई। निदा ने पुलिस आदालत और शहर काजी के यहां दी गई अर्जियों में आरोप लगाए हैं कि शादी के चार पांच महीने के बाद ही उसका उत्पीड़न होने लगा। शादी के एक महीने बाद मार्च में पहला मुद्दा पढ़ाई का सामने आया। 25 मार्च 15 को वह बरेली कालेज में एम. काम की परीक्षा दे रही थी। अचानक पति शीरान रजा खां कालेज में आए और परीक्षा से उठा कर ले गए।
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निदा का आरोप है कि उसके बाद से ही रोज मारपीट होने लगी। स्विफ्ट की जगह डस्टर की मांग होने लगे। जुलाई में वह गर्भवती थी घर से निकालने के दौरान मारपीट में उसका गर्भ भी गिर गया। फिर वह मायके में ही रही, शीरान उसे लेने नहीं आया। इसी बीच मई में उसे पता चला कि शीरान दूसरा निकाह कर रहे हैं। तब लड़की वालों के घर जा कर परिवार को आगाह किया और फिर कानूनी लड़ाई शुरू हो गई। निदा का कहना है कि परिवार के रसूख के कारण पुलिस ने पहले उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की तो अधिकारियों से मिली। वहां भी बात नहीं बनी तो ही महिला आयोग में अर्जी डाली। फिर सीधे अदालत की शरण में गई तो अदालत के आदेश पर बारादरी थाने में मुकदमा दर्ज हो पाया।
निदा का कहना है उसके पक्ष के लोगों से मिले बिना पुलिस ने उनकी बात लिख कर एफआर लगा दी। उसके प्रोटेस्ट पर अब अदालत ने नया मुकदमा पंजीकृत करते हुए सुनवाई के लिए 23 जनवरी 2017 की तारीख दी है। निदा का कहना है कि उसने काफी कोशिश की कि बात न बिगड़े, मगर हालात बिगड़ते गए इसलिए उसे पुलिस और अदालत का सहारा लेना पड़ा। आईजी ने मामले में एसएसपी से बात करके निदा के आरोपों की जांच कराकर कार्रवाई करने को कहा है। एसएसपी जोगेंद्र कुमार ने बताया कि शिकायत मिलेगी तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
विवेचक बोले, मैंने सही किया
थाना बारादरी के दरोगा रामचंद्र ने निदा खान के मुकदमे की विवेचना की। उन्होंने बताया कि एफआईआर को ही उन्होंने निदा के बयान मान लिया। शीरान रजा के परिवार वालों ने निदा का सामान वापस कर दिया। मेहर से रुपये भी दे दिए हैं। इसी आधार पर उन्होंने केस बंद कर दिया।
शीरान ने कहा, पत्नी ने बेवजह मुल्जिम बना दिया
निदा खान के पति शीरान रजा खां ने अपनी पत्नी के सारे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि बेकसूर होने के बावजूद पत्नी ने उन्हें मुल्जिन बना दिया है। लोग लड़की समझ कर उसे ही सही मान रहें हैं।
उन्होंने बताया कि फैशनपरस्त मॉर्डन लड़की है। कोर्ट आती है तो नकाब पहन कर और शहर में घूमती है तो बिना नकाब के। पुराने दोस्तों से भी मिलना जुलना रहता है। उसने मुझे कभी पसंद नहीं किया। कहती थी कि दाढ़ी-टोपी वाले उसे पसंद नहीं। उसने कहा कि मुझे आजाद कर दो, मेरी शादी गलत हो गई। दोनों परिवारों में बात हुई तारीख तय हुई कि बैठ कर सुलह सफाई से तलाक हो जाए। हम उनके घर पहुंचे। हमारी तरफ से बात रखी गई कि जो कुछ शादी में दिया है वह वापस ले लो। वे अधिक पैसा मांग रहे हैं। तीन दिन पहले कोर्ट में हमारे एक साथी के साथ निदा ने ही बदतमीजी की और खुद ही मुकदमा लिखाने पहुंच गईं। हमें निदा पक्ष की ओर से बराबर खतरा बना हुआ है। उसने तो शादी के बाद हक्क-ए-जौजियत (शादी के बाद के रिश्ते) तक अदा नहीं की है। पूरे रमजान भर वह मेरे घर पर नहीं रहीं। अपने भाई मोईन के साथ रात में आती थी और सुबह अपने घर चली जाती थी।
जहां तक पढ़ाई का मामला है तो रोकने के लिए कोई दबाव नहीं डाला। परीक्षा के दौरान निदा ने खुद ही फोन किया कि लेने आ जाओ मेरी मां की तबियत खराब है। वह अपनी मरजी से घर तक आई।