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32 दिन बाद मौत से हारा पुलिस की पिटाई से घायल अनुज
बरेली।
Updated Thu, 25 May 2017 01:32 AM IST
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32 days later killed by police Injured beating
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
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पुलिस की पिटाई से घायल अनुज 32 दिन बाद मौत से हार गया। बुधवार सुबह करीब पांच बजे बरेली के जिला अस्पताल में अनुज ने दम तोड़ दिया। उसे बाइक चोरी के शक में पुलिस ने उठाया था। गुस्साए घरवालों के हंगामे के कारण कड़ी सुरक्षा के बीच शव का पोस्टमार्टम किया गया। पुलिस की संख्या अधिक देख घरवाले ज्यादा विरोध करने का साहस नहीं जुटा सके। तीन डॉक्टरों के पैनल ने अनुज के शव का पोस्टमार्टम किया, जिसमें उसकी मौत सेप्टिक से होना पाया गया। उसकी कोहनी, कूल्हे और हाथ पर चोट के निशान पाए गए। सुरक्षा के बीच शव खटीमा स्थित उसके घर ले जाया गया।
मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा (ऊधम सिंह नगर) के रहने वाले 27 वर्षीय अनुज भटनागर को 21 अप्रैल को बिहारीपुर से एक मैकेनिक की दुकान से बाइक चोरी के शक में उठाया गया था। उसे कुतुबखाना के रहने वाले निखिल और मनीष ने पकड़कर यूपी 100 डायल पुलिस को दिया था। पुलिस का कहना था कि मौके पर ही पब्लिक वालों ने अनुज की पिटाई की थी। पुलिस वाले उसे कोतवाली लाए थे। जहां उससे पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच के सिपाही उसे पुलिस लाइंस ले गए थे। बताया जाता है कि यहां उसकी पिटाई की गई थी, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी। जिस पर अनुज को पहले जिला अस्पताल, फिर एसआरएमएस और इसके बाद केजीएमसी लखनऊ ले जाया गया था। जहां तब से उसका इलाज चल रहा था। अनुज के भाई आलोक ने बताया कि मंगलवार को वह अनुज को केजीएमसी से ले आए थे और यहां देर रात पुन: जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे घरवालों ने पुलिस पर हत्या का मुकदमा और आरोपी पुलिस कर्मियों को सामने लाए जाने की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। मामला तूल पकड़ते देखते हुए कोतवाली के अलावा कैंट, इज्जतनगर, भोजीपुरा, सुभाषनगर, किला थाना प्रभारियों के अलावा पुलिस लाइंस महिला पुलिस बल को भी पोस्टमार्टम हाउस बुला लिया गया। तीन डॉक्टरों के पैनल ने अनुज के शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम में उसकी एक हाथ कोहनी, कूल्हे और एक हाथ में चोट के निशान पाए गए। बताया गया कि यह चोटें इतनी गंभीर नहीं थी, जिससे उसकी मौत हो जाती। पोस्टमार्टम में मौत सेप्टिक से होना बताया गया है। पोस्टमार्टम के बाद कड़ी सुरक्षा के साथ अनुज के शव को खटीमा तक पहुंचाया गया। शहर कोतवाल केके वर्मा स्वयं पुलिस बल के साथ अनुज का शव लेकर खटीमा गए।
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मां बोली, झूठी तसल्ली देते रहे पुलिस अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
पोस्टमार्टम हाउस पर अनुज की मां सुनीता बेहाल थीं। बेटे की मौत के सदमे में वह पोस्टमार्टम हाउस परिसर में ही जमीन पर लेटकर बेटे की पिटाई करने वाले पुलिस कर्मियों को कोस रही थीं। सुनीता का कहना था कि अनुज की पिटाई का एक महीना गुजर गया। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिन पुलिस वालों ने अनुज को पीटा था, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करना तो दूर पुलिस अधिकारियों ने अपने स्तर से उनके नाम भी आज तक उजागर किए। सुनीता का आरोप था कि पुलिस अधिकारी कार्रवाई के नाम पर उन्हें सिर्फ झूठी तसल्ली देते रहे। पुलिस अफसर अनुज को अस्पताल में देखने तो जाते थे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच की बात कहकर चले आते थे। अनुज की बहन शालिनी ने कहा कि उनके भाई की पिटाई करने वाले क्रूर पुलिस वालों को सामने लाया जाए। जिससे ऐसे पुलिस वाले समाज में बेनकाब हों, जिन्होंने एक बेकसूर को पीटकर मौत की नींद सुला दिया।
ये डॉक्टर रहे पैनल में शामिल
अनुज के शव का पोस्टमार्टम करने वाले पैनल में डॉ.ललित सक्सेना, डॉ. सौरभ, डॉ. केसी जोशी शामिल रहे। पोस्टमार्टम कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
मजिस्ट्रेट ने भरा दूसरा पंचायतनामा
पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामे के दौरान मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी से पंचायतनामा भरने की मांग की गई। घरवालों का कहना था कि पुलिस हर मामले में खेल कर रही है, इसलिए पंचायतनामा भी ठीक से नहीं भरा गया है। इस पर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तहसीलदार सदर ने पुलिस का भरा हुआ पोस्टमार्टम रिजेक्ट कर दिया और स्वयं ही शव का निरीक्षण कर दूसरा पंचायतनामा भरा। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम हुआ।
मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश
अनुज के परिवार वालों की मांग पर डीएम ने अनुज की मौत के मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। परिवार वालों ने डीएम को अवगत कराया कि चूंकि पुलिस वाले ही अनुज की पिटाई करने के आरोपी हैं, इसलिए पुलिस पुलिस वालों को बचाने को जांच में खेल कर सकती है। इस पर डीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश करते हुए एडीएम एफआर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।
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मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा (ऊधम सिंह नगर) के रहने वाले 27 वर्षीय अनुज भटनागर को 21 अप्रैल को बिहारीपुर से एक मैकेनिक की दुकान से बाइक चोरी के शक में उठाया गया था। उसे कुतुबखाना के रहने वाले निखिल और मनीष ने पकड़कर यूपी 100 डायल पुलिस को दिया था। पुलिस का कहना था कि मौके पर ही पब्लिक वालों ने अनुज की पिटाई की थी। पुलिस वाले उसे कोतवाली लाए थे। जहां उससे पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच के सिपाही उसे पुलिस लाइंस ले गए थे। बताया जाता है कि यहां उसकी पिटाई की गई थी, जिससे उसकी हालत बिगड़ गई थी। जिस पर अनुज को पहले जिला अस्पताल, फिर एसआरएमएस और इसके बाद केजीएमसी लखनऊ ले जाया गया था। जहां तब से उसका इलाज चल रहा था। अनुज के भाई आलोक ने बताया कि मंगलवार को वह अनुज को केजीएमसी से ले आए थे और यहां देर रात पुन: जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे घरवालों ने पुलिस पर हत्या का मुकदमा और आरोपी पुलिस कर्मियों को सामने लाए जाने की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। मामला तूल पकड़ते देखते हुए कोतवाली के अलावा कैंट, इज्जतनगर, भोजीपुरा, सुभाषनगर, किला थाना प्रभारियों के अलावा पुलिस लाइंस महिला पुलिस बल को भी पोस्टमार्टम हाउस बुला लिया गया। तीन डॉक्टरों के पैनल ने अनुज के शव का पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम में उसकी एक हाथ कोहनी, कूल्हे और एक हाथ में चोट के निशान पाए गए। बताया गया कि यह चोटें इतनी गंभीर नहीं थी, जिससे उसकी मौत हो जाती। पोस्टमार्टम में मौत सेप्टिक से होना बताया गया है। पोस्टमार्टम के बाद कड़ी सुरक्षा के साथ अनुज के शव को खटीमा तक पहुंचाया गया। शहर कोतवाल केके वर्मा स्वयं पुलिस बल के साथ अनुज का शव लेकर खटीमा गए।
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मां बोली, झूठी तसल्ली देते रहे पुलिस अफसर
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
पोस्टमार्टम हाउस पर अनुज की मां सुनीता बेहाल थीं। बेटे की मौत के सदमे में वह पोस्टमार्टम हाउस परिसर में ही जमीन पर लेटकर बेटे की पिटाई करने वाले पुलिस कर्मियों को कोस रही थीं। सुनीता का कहना था कि अनुज की पिटाई का एक महीना गुजर गया। कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जिन पुलिस वालों ने अनुज को पीटा था, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करना तो दूर पुलिस अधिकारियों ने अपने स्तर से उनके नाम भी आज तक उजागर किए। सुनीता का आरोप था कि पुलिस अधिकारी कार्रवाई के नाम पर उन्हें सिर्फ झूठी तसल्ली देते रहे। पुलिस अफसर अनुज को अस्पताल में देखने तो जाते थे, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिर्फ जांच की बात कहकर चले आते थे। अनुज की बहन शालिनी ने कहा कि उनके भाई की पिटाई करने वाले क्रूर पुलिस वालों को सामने लाया जाए। जिससे ऐसे पुलिस वाले समाज में बेनकाब हों, जिन्होंने एक बेकसूर को पीटकर मौत की नींद सुला दिया।
ये डॉक्टर रहे पैनल में शामिल
अनुज के शव का पोस्टमार्टम करने वाले पैनल में डॉ.ललित सक्सेना, डॉ. सौरभ, डॉ. केसी जोशी शामिल रहे। पोस्टमार्टम कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
मजिस्ट्रेट ने भरा दूसरा पंचायतनामा
पोस्टमार्टम हाउस पर हंगामे के दौरान मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी से पंचायतनामा भरने की मांग की गई। घरवालों का कहना था कि पुलिस हर मामले में खेल कर रही है, इसलिए पंचायतनामा भी ठीक से नहीं भरा गया है। इस पर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे तहसीलदार सदर ने पुलिस का भरा हुआ पोस्टमार्टम रिजेक्ट कर दिया और स्वयं ही शव का निरीक्षण कर दूसरा पंचायतनामा भरा। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम हुआ।
मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश
अनुज के परिवार वालों की मांग पर डीएम ने अनुज की मौत के मामले में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए हैं। परिवार वालों ने डीएम को अवगत कराया कि चूंकि पुलिस वाले ही अनुज की पिटाई करने के आरोपी हैं, इसलिए पुलिस पुलिस वालों को बचाने को जांच में खेल कर सकती है। इस पर डीएम ने मामले की मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश करते हुए एडीएम एफआर को जांच अधिकारी नियुक्त किया है।