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अजब अपहरण की गजब कहानी

Thu, 07 Mar 2019 01:21 AM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Thu, 07 Mar 2019 01:21 AM IST
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अजब अपहरण की गजब कहानी
बरेली। कासगंज जिले में पटियाली क्षेत्र के गांव ककराला से अगवा चार साल के मासूम हरेंद्र की बरामदगी को कासगंज पुलिस ने अजब-गजब कहानी बना दिया। अपहरण भी हुआ, बच्चा भी बरामद हो गया और खुलासे के साथ ही आरोपी भी गिरफ्तार हो गए। पूरे खुलासे की पटकथा ऐसी रची गई कि आरोपियों को कोर्ट से उसका फायदा मिलना लगभग तय माना जा रहा है। पुलिस ने पूरे मामले को ऐसे उलझा दिया है कि इस पटकथा को समझना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन सा हो गया। कहीं से बच्चे की बरामदगी हुई और कहीं से दिखाया। आरोपी भी कहीं से उठाए और कहीं से दिखाए। खुलासे की कड़ियां कैसे जोड़ीं, यह भी साफ नहीं किया। इसके अलावा अफसरों के विरोधाभासी बयान और जीआरपी एवं कासगंज पुलिस द्वारा जारी अलग-अलग प्रेसनोट खुलासे के घटनाक्रम और अफसरों की मंशा पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
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अपहरण की कॉल पर हरकत में आई पुलिस
कासगंज में थाना पटियाली के गांव ककराला निवासी राकेश खेतीबाड़ी के अलावा दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं। 21 फरवरी को उनका चार साल का बेटा हरेंद्र गायब हो गया। कासगंज के पटियाली थाने में बच्चे के पिता अशोक कुमार ने उसकी गुमशुदगी दर्ज करा दी। इसके बाद परिवार वाले बच्चे को तलाशते रहे लेकिन कुछ पता नहीं लगा। आठ दिन बाद बच्चे की रिहाई के बदले पांच लाख की फिरौती के लिए फोन आया। इसके बाद कासगंज पुलिस हरकत में आई। बच्चे की बरामदगी के लिए एक एडिशनल एसपी, सीओ, थाना पुलिस एवं स्वाट टीम को लगा दिया गया। सर्विलांस टीम की भी मदद ली गई।
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शास्त्रीनगर से ट्रेन में नहीं भागे अपहरणकर्ता, कासगंज पुलिस खुद उठा ले गई थी
यहीं से कहानी में पेंच आया। पुलिस ने सबसे पहले अहरौली निवासी पवन को उठाया। इसके बाद उसकी पत्नी नीतू को भी पकड़ लिया गया। इनसे खुलासा हुआ कि बच्चा बरेली में थाना इज्जतनगर की शास्त्रीनगर कालोनी में पवन की बहन राधा रानी के पास है। मामला सीधा एवं स्पष्ट था लेकिन पुलिस पता नहीं क्यों, मामले को उलझाने लगी। सूत्रों का कहना है कि पवन की निशानदेही पर पुलिस ने शास्त्रीनगर से ही बच्चे को बरामद किया और राधा रानी के साथ ही उसके बेटे राहुल को भी पकड़ लिया।
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अपहरण में कानूनी पेंच के चलते जोड़ा उझानी
की ट्रेन का सीन मगर जीआरपी क्रेडिट खा गई
कासगंज पुलिस ने बच्चे की बरामदगी उझानी की ट्रेन में दिखाई गई है। कहा गया है कि सीओ जीआरपी मुरादाबाद के निर्देश पर हुई चेकिंग के दौरान जीआरपी को बच्चा ट्रेन में सीट पर बैठा मिला। मगर सूत्रों का कहना है कि आरोपियों को फायदा पहुंचाने के लिए बच्चे की बरामदगी ट्रेन में दिखाई गई, मतलब बच्चा अपहरण करने वालों के कब्जे के बजाय ट्रेन से बरामद हुआ। ऐसे में कोर्ट में यह साबित करना मुश्किल हो सकता है कि बच्चे का अपहरण उन्हीं ने किया। मगर जब उझानी में ट्रेन में बरामदगी दिखानी थी तो गवाही का सीन बनाने के लिए जीआरपी को भी इसमें शामिल किया गया। मगर यहां पर खेल हो गया और जीआरपी ने भी क्रेडिट लेने के चक्कर में प्रेसवार्ता कर डाली।

अफसरों के बयानों में विरोधाभास
ट्रेन से बच्चे की बरामदगी को लेकर जीआरपी की ओर से जारी प्रेसनोट में कहा गया है कि सीओ जीआरपी मुरादाबाद के निर्देश पर चेकिंग की गई और बच्चा बरामद हो गया। वहीं सीओ जीआरपी का कहना है कि एडीजी रेलवे का बच्चे के अपहरण को लेकर मेसेज था कि बच्चे को बरेली से उझानी की ओर लेकर भाग सकते हैं इसलिए सघन चेकिंग कराई गई। वहीं, सीओ पटियाली घटना के खुलासे को लेकर बहुत बात नहीं कर रहे हैं, उनका कहना है कि सबकुछ साफ हो चुका है।

राधा रानी ‘अपराध’ में बड़ी पुरानी
इस अपहरण कांड की एक अहम किरदार राधा रानी अब सलाखों के पीछे है। वह कासगंज में पटियाली की रहने वाली और पहले शराब के मामले में जेल भी जा चुकी है। शराब के ही मामले में उसका भाई पवन भी जेल गया है। अपराध जगत में इसी सक्रियता के चलते राधा रानी की एक दरोगा से नजदीकियां हो गईं और फिर वह बरेली में रहने लगी। इसके अलावा गैंग के अन्य सदस्य भी अपराध में लिप्त रहे हैं।

11-12 साल से खत्म हो गए थे पारिवारिक संबंध
बच्चे के पिता राकेश और मुख्य आरोपी पवन सगे मौसेरे भाई हैं। मगर दोनों परिवारों के बीच संबंध खत्म हो चुके थे। बताया जाता है कि 11-12 साल पहले कोई ऐसा विवाद हुआ जो राकेश को नागवार गुजरा और फिर इसके बाद उनके पारिवारिक संबंध खत्म हो गए। इस अपहरणकांड के पीछे उस घटना का सबक और फिरौती मांगकर रकम हासिल करना भी था।

मकान मालिक को भी भनक नहीं, घर में है अगवा बच्चा
बरेली। कासगंज से बच्चा अगवा करने के मामले में पुलिस ने कथित पत्नी पर तो कार्रवाई की पर दरोगा को साफ बचा दिया। हाल ही में इंस्पेक्टर की ट्रेनिंग करने वाले दरोगा का ट्रांसफर कुछ समय पहले शाहजहांपुर हुआ है। चार महीने से शास्त्रीनगर के एक मकान में रह रहा था। वहां जिस राधा रानी को वह अपनी पत्नी और आठ साल के बच्चे को बेटा बताता था, अब उनसे रिश्ता होने से ही इंकार कर दिया है। वहीं, लोगों से न घुलने-मिलने के कारण पड़ोसियों और मकान मालिक को भी विशेष जानकारी नहीं थी।
शास्त्री नगर में रिटायर होने के बाद कोचिंग चला रहे एक व्यक्ति के घर की ऊपरी मंजिल पर दरोगा ने चार महीने का वक्त गुजारा। मकान मालिक व उनकी पत्नी ने बताया कि इंस्पेक्टर के सुबह शाहजहांपुर जाने के बाद शिवरात्रि के दिन दो लोग एक बच्चे को लेकर आए थे। उन्होंने राधा रानी से पूछा तो बताया कि भाई अपने बीमार बेटे को लेकर आए हैं। इसे यहां डॉक्टर को दिखाना है। उसी दिन ये लोग बच्चा लेकर चले गए। कहा-हो सकता है कि बच्चे को एक-दो और भी लाए हों लेकिन उन्होंने नहीं देखा। उन्हें तो अखबार पढ़कर घटनाक्रम की जानकारी हुई। उन्होंने तो इसलिए किराए पर रख लिया कि दरोगा जी हैं तो उन्हें कोई तंग नहीं करेगा। मगर उनकी तो मुसीबतें और ज्यादा बढ़ गईं। पड़ोसियों ने भी बताया कि यह परिवार किसी से मिलता जुलता नहीं था।


दरोगा बोला- पूरी जांच के बाद मिली क्लीनचिट
शाहजहांपुर में तैनात दरोगा ने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि कासगंज के एसपी के बुलावे पर वहां जाकर बयान दर्ज करा दिए हैं। उसे बेदाग पाया तभी जाने दिया। बताया कि पत्नी व बच्चों समेत पूरा परिवार इटावा में रहता है। उन्हीं लोगों का उनकी सर्विस बुक में रिकार्ड है। किसी से संबंध या कुछ वक्त साथ गुजारने से उसे पत्नी नहीं कहा जा सकता। पवन कसूरवार है, ये वो जानता है। राधा रानी को भी उसके गुनाह की जानकारी रही होगी लेकिन उसके सामने न तो पवन आया और न ही कोई बच्चा।
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