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आयुष अपहरण कांड- बीस लाख फिरौती मांगी, सोचा- पांच लाख तो मिल ही जाएंगे
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बरेली। बारादरी से आठ साल के बच्चे के अपहरण और उसी दिन घर के पास छोड़ने के मामले में पुलिस ने चौथे दिन खुलासा कर दिया। एसपी सिटी की प्रेसवार्ता के बाद तीन आरोपियों को जेल भेज दिया गया। गोरखपुर में परिवार की जमीन और सट्टेबाजी की कमाई के हिसाब से आरोपियों ने प्लान बनाकर घटना की और बीस लाख फिरौती मांगी।
रोहली टोला निवासी अमित सिंह के बेटे आठ साल के बेटे आयुष को तेरह अप्रैल को पड़ोसी दीपांशु कोल्डड्रिंक पिलाने के बहाने ले गया और बाद में किसी और के हवाले कर खुद गायब हो गया। बच्चे को एक कमरे में बंद करके रखा गया और उसकी मां के नंबर पर कॉल करके बीस लाख रुपये मांगे गए। शाम ढलने पर आयुष को कोई घर के बाहर छोड़ गया। परिवार दीपांशु को गलत मानने से इनकार कर रहा था। मंगलवार को एसपी सिटी अभिनंदन सिंह ने अपने कार्यालय में घटना का खुलासा किया। इसमें दीपांशु के साथ ही उसके दोस्त शाही के दुनका निवासी जलीस और शहर के किला निवासी नदीम को दोषी बताया गया। दीपांशु ने बताया कि पहले मकान में किराएदार व पड़ोसी के नाते उसे जानकारी थी कि अमित की गोरखपुर में काफी जमीन है। वो सट्टे का काम भी करता है। ये सोचकर बीस लाख मांगे कि चार या पांच लाख तो मिल ही जाएंगे। वह आयुष को ले गया और वहां से जलीस के हवाले कर दिया। जलीस ने महेशपुरा ठाकुरान में किराए के कमरे में उसे ले जाकर रखा। जब उन्हें लगा कि पुलिस उनके घरों तक पहुंच गई है तो घबरा गए। तब नदीम से उसे घर के पास छुड़वा दिया।
एप डाउनलोड कर की थी कॉल
- जलीस ने गूगल से वी फोन नाम का एप डाउनलोड करके उसी से आयुष की मां को कॉल की थी। इस वजह से ये लोग शुरू में सर्विलांस के दायरे में नहीं आ सके। जलीस कुतुबखाने पर चश्मे की दुकान पर काम करता है तो नदीम ठेके पर भट्ठे से ईट पहुंचवाता है।
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बच्चे के पिता पर भी होगी कार्रवाई
एसपी सिटी ने स्वीकार किया कि घटना के बाद आयुष का पिता अमित तहरीर देने के बजाय गायब हो गया था। तब पुलिस ने उसे खोजा। वो कहीं बाहर जाने की तैयारी में था। उसके मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें सट्टे की पर्चियां व नंबर निकले। पता लगा कि वो सट्टा लगवाता है। फिलहाल पीड़ित पक्ष होने के कारण उसे नहीं पकड़ा है। उसके खिलाफ अलग से कार्रवाई की जाएगी।
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रोहली टोला निवासी अमित सिंह के बेटे आठ साल के बेटे आयुष को तेरह अप्रैल को पड़ोसी दीपांशु कोल्डड्रिंक पिलाने के बहाने ले गया और बाद में किसी और के हवाले कर खुद गायब हो गया। बच्चे को एक कमरे में बंद करके रखा गया और उसकी मां के नंबर पर कॉल करके बीस लाख रुपये मांगे गए। शाम ढलने पर आयुष को कोई घर के बाहर छोड़ गया। परिवार दीपांशु को गलत मानने से इनकार कर रहा था। मंगलवार को एसपी सिटी अभिनंदन सिंह ने अपने कार्यालय में घटना का खुलासा किया। इसमें दीपांशु के साथ ही उसके दोस्त शाही के दुनका निवासी जलीस और शहर के किला निवासी नदीम को दोषी बताया गया। दीपांशु ने बताया कि पहले मकान में किराएदार व पड़ोसी के नाते उसे जानकारी थी कि अमित की गोरखपुर में काफी जमीन है। वो सट्टे का काम भी करता है। ये सोचकर बीस लाख मांगे कि चार या पांच लाख तो मिल ही जाएंगे। वह आयुष को ले गया और वहां से जलीस के हवाले कर दिया। जलीस ने महेशपुरा ठाकुरान में किराए के कमरे में उसे ले जाकर रखा। जब उन्हें लगा कि पुलिस उनके घरों तक पहुंच गई है तो घबरा गए। तब नदीम से उसे घर के पास छुड़वा दिया।
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एप डाउनलोड कर की थी कॉल
- जलीस ने गूगल से वी फोन नाम का एप डाउनलोड करके उसी से आयुष की मां को कॉल की थी। इस वजह से ये लोग शुरू में सर्विलांस के दायरे में नहीं आ सके। जलीस कुतुबखाने पर चश्मे की दुकान पर काम करता है तो नदीम ठेके पर भट्ठे से ईट पहुंचवाता है।
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बच्चे के पिता पर भी होगी कार्रवाई
एसपी सिटी ने स्वीकार किया कि घटना के बाद आयुष का पिता अमित तहरीर देने के बजाय गायब हो गया था। तब पुलिस ने उसे खोजा। वो कहीं बाहर जाने की तैयारी में था। उसके मोबाइल फोन की जांच की तो उसमें सट्टे की पर्चियां व नंबर निकले। पता लगा कि वो सट्टा लगवाता है। फिलहाल पीड़ित पक्ष होने के कारण उसे नहीं पकड़ा है। उसके खिलाफ अलग से कार्रवाई की जाएगी।