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गैंगरेप हो या लड़कियां गायब, सीबीगंज थाना नहीं लिखता रिपोर्ट
Updated Fri, 30 Jun 2017 01:22 AM IST
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बरेली।
सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के प्रदेश की कमान संभालने के बाद भले ही सरकारी मशीनरी में कुछ निजाम बदला हो, लेकिन सीबीगंज थाने में कुछ नहीं बदला। महिला अपराध को संजीदगी से लेने की सरकार की हिदायत भी शायद सीबीगंज थाने तक नहीं पहुंची। यही वजह है कि यहां लड़कियों के गायब होने का मसला हो या फिर लड़की के साथ गैंगरेप हो पुलिस इन घटनाओं की सीधे रिपोर्ट दर्ज नहीं करती है। गैंगरेप पीड़ित को भी कार्रवाई के लिए चार चार घंटे टहलाया जाता है और आरोपियों से उस पर समझौता तक करने का दबाव बनाया जाता है। उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही रिपोर्ट दर्ज हो पाती है।
केस-वन
एसएसपी के आदेश पर लिखी गई थी लड़कियों के अपहरण की रिपोर्ट
सीबीगंज क्षेत्र के गांव खड़ुआ की दो सगी बहने नौ जून को इंटरमीडिएट और हाईस्कूल परीक्षा का परिणाम इंटरनेट पर देखने के लिए सीबीगंज के लिए गांव से निकली थीं। यह लड़कियां रिजल्ट देखने के बाद लापता हो गई थीं। शाम तक घर न पहुंचने पर परिवार वालों को चिंता हुई तो उन्होंने नाते रिश्तेदारी में उनकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिलीं। लड़की के पिता ने थाने पहुंचकर इसकी तहरीर दी थी, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी। तीन दिन बाद पीड़ित पिता एसएसपी के समक्ष पेश हुआ था, तब लड़कियों के अपहरण की रिपोर्ट एसएसपी के आदेश पर दर्ज की गई थी। बाद में यह लड़कियां रुद्रपुर (उत्तराखंड) में मिल गई थीं।
केस-टू
महिला डॉक्टर पर हमले का मामला दबाने पर एडीजी ने फटकारा
बनारस की एक महिला डॉक्टर पर रामपुर में जानलेवा हमला कर लूटपाट की गई। इसमें आठ डॉक्टर और फार्मेसिस्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। रामपुर से इस मुकदमे की विवेचना ट्रांसफर होकर बरेली आई। इस विवेचना को सीबीगंज एसएचओ गणेश दत्त जोशी को सौंपा गया, जिसमें कोई कार्रवाई नहीं की गई। पिछले दिनों बनारस आईं पीड़ित डॉक्टर ने एडीजी बृज राज मीणा से शिकायत की। डॉक्टर ने बताया कि छह माह बीत जाने पर विवेचक ने विवेचना शुरू ही नहीं की तो कार्रवाई क्या होगी। इस पर एडीजी ने एसएचओ की कड़ी फटकार लगाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
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केस- थ्री
चार घंटे गैंगरेप पीड़ित को टहलाकर की समझौते की कोशिश
सीबीगंज क्षेत्र की एक किशोरी के साथ बुधवार को गैंगरेप किया गया। मौके से एक आरोपी को पकड़कर थाने लाया गया, लेकिन सीबीगंज पुलिस ने अपनी आंखों पर पर्दा डालते हुए इस घटना को दर्ज करने की बजाए चार घंटे तक पीड़ित को टहलाते हुए आरोपियों से समझौते की कोशिश की थी। बाद में मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने पर कार्रवाई शुरू हुई।
प्रभारी मंत्री के फोन पर आनन फानन में दिखाई गिरफ्तारी
वैसे तो सीबीगंज पुलिस गैंगरेप के आरोपी तालिब पुत्र बाले खां, वसीम पुत्र मुहम्मद बेग, फुरकान पुत्र हबी निवासी खना गौटिया और कामिल पुत्र सलीम निवासी तिलियापुर को थाने में बैठाकर पीड़ित से समझौता कराने की कोशिश में लगी थी, लेकिन बृहस्पतिवार को जिले के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक से किसी ने सवाल दाग दिया कि गैंगरेप के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस पर प्रभारी मंत्री ने एसएसपी को फोन कर कार्रवाई के बारे में पूछा तो पुलिस ने आनन फानन में आरोपियों की गिरफ्तारी दिखाकर प्रेसवार्ता भी कर दी और आरोपियों को जेल भेज दिया।
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सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के प्रदेश की कमान संभालने के बाद भले ही सरकारी मशीनरी में कुछ निजाम बदला हो, लेकिन सीबीगंज थाने में कुछ नहीं बदला। महिला अपराध को संजीदगी से लेने की सरकार की हिदायत भी शायद सीबीगंज थाने तक नहीं पहुंची। यही वजह है कि यहां लड़कियों के गायब होने का मसला हो या फिर लड़की के साथ गैंगरेप हो पुलिस इन घटनाओं की सीधे रिपोर्ट दर्ज नहीं करती है। गैंगरेप पीड़ित को भी कार्रवाई के लिए चार चार घंटे टहलाया जाता है और आरोपियों से उस पर समझौता तक करने का दबाव बनाया जाता है। उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही रिपोर्ट दर्ज हो पाती है।
केस-वन
एसएसपी के आदेश पर लिखी गई थी लड़कियों के अपहरण की रिपोर्ट
सीबीगंज क्षेत्र के गांव खड़ुआ की दो सगी बहने नौ जून को इंटरमीडिएट और हाईस्कूल परीक्षा का परिणाम इंटरनेट पर देखने के लिए सीबीगंज के लिए गांव से निकली थीं। यह लड़कियां रिजल्ट देखने के बाद लापता हो गई थीं। शाम तक घर न पहुंचने पर परिवार वालों को चिंता हुई तो उन्होंने नाते रिश्तेदारी में उनकी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिलीं। लड़की के पिता ने थाने पहुंचकर इसकी तहरीर दी थी, लेकिन उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई थी। तीन दिन बाद पीड़ित पिता एसएसपी के समक्ष पेश हुआ था, तब लड़कियों के अपहरण की रिपोर्ट एसएसपी के आदेश पर दर्ज की गई थी। बाद में यह लड़कियां रुद्रपुर (उत्तराखंड) में मिल गई थीं।
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केस-टू
महिला डॉक्टर पर हमले का मामला दबाने पर एडीजी ने फटकारा
बनारस की एक महिला डॉक्टर पर रामपुर में जानलेवा हमला कर लूटपाट की गई। इसमें आठ डॉक्टर और फार्मेसिस्ट के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। रामपुर से इस मुकदमे की विवेचना ट्रांसफर होकर बरेली आई। इस विवेचना को सीबीगंज एसएचओ गणेश दत्त जोशी को सौंपा गया, जिसमें कोई कार्रवाई नहीं की गई। पिछले दिनों बनारस आईं पीड़ित डॉक्टर ने एडीजी बृज राज मीणा से शिकायत की। डॉक्टर ने बताया कि छह माह बीत जाने पर विवेचक ने विवेचना शुरू ही नहीं की तो कार्रवाई क्या होगी। इस पर एडीजी ने एसएचओ की कड़ी फटकार लगाते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए।
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केस- थ्री
चार घंटे गैंगरेप पीड़ित को टहलाकर की समझौते की कोशिश
सीबीगंज क्षेत्र की एक किशोरी के साथ बुधवार को गैंगरेप किया गया। मौके से एक आरोपी को पकड़कर थाने लाया गया, लेकिन सीबीगंज पुलिस ने अपनी आंखों पर पर्दा डालते हुए इस घटना को दर्ज करने की बजाए चार घंटे तक पीड़ित को टहलाते हुए आरोपियों से समझौते की कोशिश की थी। बाद में मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने पर कार्रवाई शुरू हुई।
प्रभारी मंत्री के फोन पर आनन फानन में दिखाई गिरफ्तारी
वैसे तो सीबीगंज पुलिस गैंगरेप के आरोपी तालिब पुत्र बाले खां, वसीम पुत्र मुहम्मद बेग, फुरकान पुत्र हबी निवासी खना गौटिया और कामिल पुत्र सलीम निवासी तिलियापुर को थाने में बैठाकर पीड़ित से समझौता कराने की कोशिश में लगी थी, लेकिन बृहस्पतिवार को जिले के दौरे पर आए प्रभारी मंत्री बृजेश पाठक से किसी ने सवाल दाग दिया कि गैंगरेप के आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है। इस पर प्रभारी मंत्री ने एसएसपी को फोन कर कार्रवाई के बारे में पूछा तो पुलिस ने आनन फानन में आरोपियों की गिरफ्तारी दिखाकर प्रेसवार्ता भी कर दी और आरोपियों को जेल भेज दिया।