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कबूतरबाजी की रंजिश में युवक को मारा चाकू

Mon, 24 Dec 2018 12:59 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 24 Dec 2018 12:59 PM IST
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कबूतरबाजी की रंजिश में युवक को मारा चाकू
बरेली। मढ़ीनाथ इलाके में कबूतरबाजी की रंजिश में दो पक्षों के खूनी संघर्ष में पांच लोग घायल हो गए। एक युवक को सिर में चाकू मारा गया। दोनों पक्षों में पिछले महीने भी विवाद हुआ था। पीड़ित ने सुभाषनगर थाने में रिपोर्ट कराई है।
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मढ़ीनाथ निवासी सनी गोस्वामी को जिला अस्पताल लाया गया। उसके सिर में चाकू लगा था। सनी के भाई विवेक और अर्जुन को भी रॉड और डंडे मारे गए। सनी ने बताया कि बाग ब्रिगटान निवासी छुटका उर्फ विजय आदि मोहल्ले में आए और हमला कर दिया। दूसरे पक्ष के विजय और उसका भाई गुड्डू भी जिला अस्पताल पहुंचे। विजय ने बताया कि वे कबूतर पालते हैं। पिछले महीने सनी ने उनके कबूतरों को कैद कर लिया था। मांगने पर झगड़ा किया, जिसकी एनसीआर उन्होंने कराई थी। कुछ लोगों ने मौखिक समझौता करा दिया। वह मढ़ीनाथ में बुआ के घर गए थे तो इन्होंने हमला कर दिया। इंस्पेक्टर हरीश चंद्र जोशी ने बताया कि सनी पक्ष की ओर से रिपोर्ट कराई गई है।
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इससे पहले भी कबूतरबाजी को लेकर शहर में हत्याएं हो चुकी हैं। सेटेलाइट स्टैंड पर 24 नवंबर 2015 को रबड़ीटोला निवासी सैफुल इस्लाम की आंखों में किला निवासी इकराम आदि ने धूल झोंकी और डंडों से पीटकर हत्या कर दी। विवेचना में पता लगा कि आरोपी सैफुल के घर के पास कबूतरबाजी करते थे। शोर पर सैफुल ने विरोध कर पुलिस से शिकायत की तो रंजिश मान गए। वहीं 14 दिसंबर 2012 को किला के जखीरा में इमरान के घर में घुसे नसीम व चार अन्य ने पूरे परिवार को पीटा और फायरिंग की। इमरान ने रिपोर्ट कराई कि वह अपने कबूतरों को छत पर बुला रहे थे लेकिन दूसरे पक्ष ने सीटी बजाकर भगा दिया। विरोध पर घर में घुसकर हमला कर दिया।
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शहर में अब लोग सिर्फ शौक में कबूतर पालते हैं। पहले कबूतरबाजी का अलग रोमांच था। इसमें शहर के दो हिस्सों में दो टीम खड़ी हो जाती थीं। कबूतरों को निशानी बांधकर किला नदी के पास से कोई एक व्यक्ति एक ही समय में उड़ाता था। दोनों टीम के कबूतर अपनी बस्ती की ओर उड़ते थे। यहां इनके गिरते ही निशानी खोलकर लोग विपक्षी की बस्ती की दौड़ लगाते थे। रास्ता तय होता था। जहां दोनों पक्ष मिलकर निशानी के सबूत देते थे, उसी को केंद्रबिंदु माना जाता था। उस जगह से दोनों टीमों के उस बिंदु की दूरी नापी जाती थी जहां वो पहले खड़े थे। जिसकी दूरी कम होती थी, वह टीम विजेता घोषित होती थी। दूसरी टीम को उसकी तय शर्त पूरी करनी होती थी, जिसमें नकदी से लेकर दावत तक शामिल होता था।
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