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पोस्टमार्टम के लिए 18 सौ रुपये मांगने पर विवाद
ब्ययूराो, अमर उजाला बरेली।
Updated Sat, 06 Aug 2016 01:13 AM IST
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पोस्टमार्टम हाउस में पहले पुलिस अस्पताल से लावारिश शव लेकर पोस्टमार्टम कराने पहुंची। कर्मचारी उसे छोड़कर बाकी आए शवों का पोस्टमार्टम करने लगे क्योंकि लावारिस शवों का पोस्टमार्टम 72 घंटे बाद करते हैं। थोड़ी देर बाद मृतक के परिजन और रिश्तेदार पहुंच गए तो पीएम हाउस के कर्मचारी उनसे 18 सौ रुपये मांगने लगे। दोनों के बीच काफी देर तक नोकझोंक हुई।
शहर के थाना इज्जतनगर निवासी प्रेमपाल (50) रामपुर गार्डन के रहने वाले किसी सेठ की कार चलाते थे। इनकी शादी नहीं हुई थी। रात में किसी वजह से बीमार हुए तो मालिक ने इनको अस्पताल में भर्ती करा दिया। रात में इनकी अस्पताल में ही मौत हो गई। जब इनका शव लेने घर से कोई नहीं आया तो पुलिस ने लावारिस में शव पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया। पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी लावारिस लाश का पीएम 72 घंटे बाद करते हैं। जब मृतक के परिवार वालों को खबर हुई तो वह रिश्तेदारों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। इनका आरोप था कि पोस्टमार्टम पर रहने वाले कर्मचारियों ने शराब के नशे में धुत होकर मृतक की भाभी विमला देवी, भाई पप्पू, चचेरे भाई जागन सिंह से जल्दी पोस्टमार्टम करने के लिए 18 सौ रुपये मांगे। वह गरीब हैं और रिक्शा चलाकर किसी तरह गुजारा करते हैं तो कहां से रुपये दें। दोनों के बीच काफी देर तक विवाद हुआ। पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी बोले- यहां तो सबसे रुपये पड़ते हैं। चाहें कोई कितना ही पॉवरफुल हो। परिवार वालों से 72 घंटे का इंतजार करने की बात कहकर दूसरे शवों का पोस्टमार्टम करने लगे। गरीबी का हवाला देने के बाद भी बिना पैसे के मृतक का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर दुष्यंत, महावीर, कृष्णपाल, भीम सिंह आदि ने अनाधिकृत तौर पर वसूली का विरोध किया।
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शहर के थाना इज्जतनगर निवासी प्रेमपाल (50) रामपुर गार्डन के रहने वाले किसी सेठ की कार चलाते थे। इनकी शादी नहीं हुई थी। रात में किसी वजह से बीमार हुए तो मालिक ने इनको अस्पताल में भर्ती करा दिया। रात में इनकी अस्पताल में ही मौत हो गई। जब इनका शव लेने घर से कोई नहीं आया तो पुलिस ने लावारिस में शव पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया। पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी लावारिस लाश का पीएम 72 घंटे बाद करते हैं। जब मृतक के परिवार वालों को खबर हुई तो वह रिश्तेदारों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। इनका आरोप था कि पोस्टमार्टम पर रहने वाले कर्मचारियों ने शराब के नशे में धुत होकर मृतक की भाभी विमला देवी, भाई पप्पू, चचेरे भाई जागन सिंह से जल्दी पोस्टमार्टम करने के लिए 18 सौ रुपये मांगे। वह गरीब हैं और रिक्शा चलाकर किसी तरह गुजारा करते हैं तो कहां से रुपये दें। दोनों के बीच काफी देर तक विवाद हुआ। पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारी बोले- यहां तो सबसे रुपये पड़ते हैं। चाहें कोई कितना ही पॉवरफुल हो। परिवार वालों से 72 घंटे का इंतजार करने की बात कहकर दूसरे शवों का पोस्टमार्टम करने लगे। गरीबी का हवाला देने के बाद भी बिना पैसे के मृतक का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर दुष्यंत, महावीर, कृष्णपाल, भीम सिंह आदि ने अनाधिकृत तौर पर वसूली का विरोध किया।
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