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बेटे की हत्या से दुखी बाप से गिफ्ट लेने वालों से एडीजी लेंगे हिसाब
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बरेली। बेटे की हत्या से टूटे बाप से भी कीमती गिफ्ट और घूस लेने वाले पुलिसकर्मियों से अब एडीजी प्रेमप्रकाश हिसाब लेंगे। बुधवार को गमजदा बाप की शिकायत के बाद उन्होंने एसएसपी को आरोपों की किसी उच्चाधिकारी से जांच कराने को कहा है।
आंवला क्षेत्र के गांव गौंटिया ब्रह्मनान के पूर्व प्रधान सुरेशपाल वर्मा ने एडीजी को बताया कि 19 अक्तूबर 2015 को उनके बेटे का अपहरण करके कत्ल कर दिया गया था। उसका शव रेलवे ट्रैक पर मिला था। वह आंवला के एक इंटर कॉलेज का छात्र था और घर से कॉलेज जाने को निकला था। शुरू में पुलिस ने शक के आधार पर कुछ लोगों को उठाया, लेकिन बाद में केस को आत्महत्या की ओर ले जाने लगी। उन्होंने आपत्ति की तो पहले विवेचक ने उनसे केस खोलने के नाम पर 12 हजार रुपये लिए। केस नहीं खुला और विवेचना बरेली क्राइम ब्रांच में आ गई। यहां के विवेचक ने लेनेेेवो का मोबाइल मांगा। उन्होंने 17 हजार से ज्यादा कीमत का मोबाइल खरीदकर उन्हें दिया जिसका बिल भी उनके पास है। हत्या का खुलासा तो नहीं हुआ, विवेचक जरूर बार-बार बदलते रहे तो वे परेशान हो गए। इसी बीच क्राइम ब्रांच के तत्कालीन पेशकार ने उनसे यह कहकर पंद्रह हजार रुपये लिए कि जो विवेचक आएगा, उसे देते रहेंगे। कुछ दिन बाद उनका भी ट्रांसफर हो गया। सुरेश पाल ने कहा कि वह भागदौड़ करते हुए परेशान हो चुके हैं, इन लोगों से उनके पैसे वापस कराकर इन पर कार्रवाई की जाए। एडीजी ने बताया कि वह इस मामले को एसएसपी के पास भेज रहे हैं। किसी बड़े अधिकारी से इसकी जांच कराई जाएगी। कोई दोषी होगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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आंवला क्षेत्र के गांव गौंटिया ब्रह्मनान के पूर्व प्रधान सुरेशपाल वर्मा ने एडीजी को बताया कि 19 अक्तूबर 2015 को उनके बेटे का अपहरण करके कत्ल कर दिया गया था। उसका शव रेलवे ट्रैक पर मिला था। वह आंवला के एक इंटर कॉलेज का छात्र था और घर से कॉलेज जाने को निकला था। शुरू में पुलिस ने शक के आधार पर कुछ लोगों को उठाया, लेकिन बाद में केस को आत्महत्या की ओर ले जाने लगी। उन्होंने आपत्ति की तो पहले विवेचक ने उनसे केस खोलने के नाम पर 12 हजार रुपये लिए। केस नहीं खुला और विवेचना बरेली क्राइम ब्रांच में आ गई। यहां के विवेचक ने लेनेेेवो का मोबाइल मांगा। उन्होंने 17 हजार से ज्यादा कीमत का मोबाइल खरीदकर उन्हें दिया जिसका बिल भी उनके पास है। हत्या का खुलासा तो नहीं हुआ, विवेचक जरूर बार-बार बदलते रहे तो वे परेशान हो गए। इसी बीच क्राइम ब्रांच के तत्कालीन पेशकार ने उनसे यह कहकर पंद्रह हजार रुपये लिए कि जो विवेचक आएगा, उसे देते रहेंगे। कुछ दिन बाद उनका भी ट्रांसफर हो गया। सुरेश पाल ने कहा कि वह भागदौड़ करते हुए परेशान हो चुके हैं, इन लोगों से उनके पैसे वापस कराकर इन पर कार्रवाई की जाए। एडीजी ने बताया कि वह इस मामले को एसएसपी के पास भेज रहे हैं। किसी बड़े अधिकारी से इसकी जांच कराई जाएगी। कोई दोषी होगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
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