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थाने वाले अड़े तो चंद घंटों में सांसद पर लिख गई रिपोर्ट
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लखीमपुर खीरी। सांसद रेखा वर्मा पर एक सिपाही की ओर से 20 घंटे के अंदर रिपोर्ट दर्ज कर लेना यह जताता है कि इसके पीछे कुछ और लोग भी लगे थे। आमतौर पर ऐसे विवादों में मैनेज करने वाले अधिकारी केवल सिपाही की चेतावनी के आगे मजबूर हो गए, ऐसा किसी के गले नहीं उतर रहा है। पूरे मामले में कहीं न कहीं पार्टी की गुटबंदी की भी चर्चाएं हो रही हैं। साथ ही सांसद से इंस्पेक्टर समेत पूरे थाने की नाराजगी भी अहम मानी जा रही है। इसी के चलते जब थाने वाले अड़ गए तो रिपोर्ट लिखने में देर नहीं लगी।
कोतवाली मोहम्मदी के एक खास बिरादरी के दरोगा और सिपाही हमेशा सांसद वर्मा की आंख की किरकिरी रहे हैं। सांसद करीब डेढ़ साल से यहां तैनात सिपाही श्याम सिंह की भी कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत कर चुकी हैं। इसके बावजूद उस पर कार्रवाई नहीं हुई। सांसद के करीबी माने जाने वाले नगर पालिकाध्यक्ष कन्हैया मेहरोत्रा भी थाने में कार्यकर्ताओं का अपमान और उनकी न सुनी जाने की शिकायत कर चुके हैं। इस तरह थाने वालों से सांसद की नाराजगी पूरी तरह साफ है। इसी नाराजगी का नतीजा है कि सोमवार को घटना सामने आने के बाद इंस्पेक्टर डीके सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि सिपाही का मनोबल गिरने नहीं दिया जाएगा, चाहें कुछ भी करना पड़े। बताया जा रहा है कि दबाव बनाने के लिए सिपाही की चेतावनी वायरल कराई गई। फिर थाने से रिपोर्ट भेजकर अफसरों को भी संदेश दिया गया कि रिपोर्ट लिखना ही चाहिए।
थाने के अंदर भी गुटबंदी बताई जा रही है। जो एस्कॉर्ट सांसद के साथ लगा था, उसमें शामिल सिपाही पंकज राजपूत पहले सांसद का गनर रह चुका है। सांसद रेखा वर्मा ने उसी को फोन करके गाड़ी को वापस लाने को कहा था। वहीं पार्टी के जिलाध्यक्ष और मोहम्मदी के विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह के इस मामले में चुप्पी साध ली है। वह तो मामले की जानकारी न होने की बात कहकर मीडिया से कुछ भी कहने से बच गए। वहीं गौरतलब है कि जिस अभिवादन समारोह से सांसद लौट रही थीं, उसमें पार्टी के जिलाध्यक्ष और मोहम्मदी के विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह भी थे। क्षेत्र में आने पर विधायक लोकेंद्र सांसद रेखा वर्मा के हर कार्यक्रम में शामिल रहते हैं। सांसद के दोनों चुनाव में भी वह सक्रिय दिखे, लेकिन दोनों के बीच वर्चस्व को लेकर चर्चाएं भी अक्सर सामने आती रही हैं।
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सिपाही की तहरीर पर सांसद रेखा वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। उन पर सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट करने और गालीगलौज आदि करने का आरोप है। मामले की विवेचना की जा रही है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- एसपी पूनम
सत्ता के दबाव में दिया जा रहा था सांसद को एस्कॉर्ट
पीएम नरेंद्र मोदी जहां वीआईपी कल्चर खत्म कराने पर जोर दिए हुए हैं, वहीं जिले की सांसद को नियम कानून की परवाह किए बगैर लगातार कोतवाली से एस्कॉर्ट दिया जाता रहा है। इसके लिए दबाव की बात कही जा रही है। यह बात सिपाही श्याम सिंह के साथ घटना होने के बाद सामने आई। एसपी पूनम का कहना है कि थाना क्षेत्र में राजनेताओं को प्रोटोकॉल के मुताबिक एस्कॉर्ट मुहैय्या कराने की बात जरूर कह रही हैं, मगर सांसद की सुरक्षा में एक गनर की ही ड्यूटी रहती है। भुगतान करने पर एक और गनर देने की व्यवस्था है।
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कोतवाली मोहम्मदी के एक खास बिरादरी के दरोगा और सिपाही हमेशा सांसद वर्मा की आंख की किरकिरी रहे हैं। सांसद करीब डेढ़ साल से यहां तैनात सिपाही श्याम सिंह की भी कई बार उच्चाधिकारियों से शिकायत कर चुकी हैं। इसके बावजूद उस पर कार्रवाई नहीं हुई। सांसद के करीबी माने जाने वाले नगर पालिकाध्यक्ष कन्हैया मेहरोत्रा भी थाने में कार्यकर्ताओं का अपमान और उनकी न सुनी जाने की शिकायत कर चुके हैं। इस तरह थाने वालों से सांसद की नाराजगी पूरी तरह साफ है। इसी नाराजगी का नतीजा है कि सोमवार को घटना सामने आने के बाद इंस्पेक्टर डीके सिंह ने तो यहां तक कह दिया कि सिपाही का मनोबल गिरने नहीं दिया जाएगा, चाहें कुछ भी करना पड़े। बताया जा रहा है कि दबाव बनाने के लिए सिपाही की चेतावनी वायरल कराई गई। फिर थाने से रिपोर्ट भेजकर अफसरों को भी संदेश दिया गया कि रिपोर्ट लिखना ही चाहिए।
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थाने के अंदर भी गुटबंदी बताई जा रही है। जो एस्कॉर्ट सांसद के साथ लगा था, उसमें शामिल सिपाही पंकज राजपूत पहले सांसद का गनर रह चुका है। सांसद रेखा वर्मा ने उसी को फोन करके गाड़ी को वापस लाने को कहा था। वहीं पार्टी के जिलाध्यक्ष और मोहम्मदी के विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह के इस मामले में चुप्पी साध ली है। वह तो मामले की जानकारी न होने की बात कहकर मीडिया से कुछ भी कहने से बच गए। वहीं गौरतलब है कि जिस अभिवादन समारोह से सांसद लौट रही थीं, उसमें पार्टी के जिलाध्यक्ष और मोहम्मदी के विधायक लोकेंद्र प्रताप सिंह भी थे। क्षेत्र में आने पर विधायक लोकेंद्र सांसद रेखा वर्मा के हर कार्यक्रम में शामिल रहते हैं। सांसद के दोनों चुनाव में भी वह सक्रिय दिखे, लेकिन दोनों के बीच वर्चस्व को लेकर चर्चाएं भी अक्सर सामने आती रही हैं।
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सिपाही की तहरीर पर सांसद रेखा वर्मा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। उन पर सरकारी काम में बाधा डालने, मारपीट करने और गालीगलौज आदि करने का आरोप है। मामले की विवेचना की जा रही है। उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- एसपी पूनम
सत्ता के दबाव में दिया जा रहा था सांसद को एस्कॉर्ट
पीएम नरेंद्र मोदी जहां वीआईपी कल्चर खत्म कराने पर जोर दिए हुए हैं, वहीं जिले की सांसद को नियम कानून की परवाह किए बगैर लगातार कोतवाली से एस्कॉर्ट दिया जाता रहा है। इसके लिए दबाव की बात कही जा रही है। यह बात सिपाही श्याम सिंह के साथ घटना होने के बाद सामने आई। एसपी पूनम का कहना है कि थाना क्षेत्र में राजनेताओं को प्रोटोकॉल के मुताबिक एस्कॉर्ट मुहैय्या कराने की बात जरूर कह रही हैं, मगर सांसद की सुरक्षा में एक गनर की ही ड्यूटी रहती है। भुगतान करने पर एक और गनर देने की व्यवस्था है।