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अस्पताल बना अखाड़ा, फार्मेसिस्ट के बेटे से सिपाहियों की मारपीट
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बरेली। सोमवार देर जिला अस्पताल अखाड़ा बन गया। यहां फार्मेसिस्ट और संभल की प्रधान के बेटे से शुरू हुआ सिपाही का विवाद संघर्ष में बदल गया। बाद में अस्पताल कॉलोनी के लोगों से सिपाहियों की जमकर मारपीट हुई। सिपाही की ओर से रिपोर्ट कराकर घायल सिपाही व होमगार्ड का मेडिकल परीक्षण कराया गया। दूसरे पक्ष की रिपोर्ट नहीं लिखी गई है। पिटाई का शिकार छात्र देवांश रुहेलखंड विवि के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सुनील यादव का भतीजा है।
जिला अस्पताल में तैनात रहे फार्मेसिस्ट सुशील यादव अब बुलंदशहर में ट्रांसफर हो गए हैं। उनकी पत्नी ममता यादव संभल के भिरावटी गांव की प्रधान हैं और बेटे देवांश के साथ अस्पताल कैंपस के क्वार्टर में रहती हैं। सोमवार रात करीब 11 बजे देवांश स्कूटी से जिला अस्पताल कैंपस में घुसा। देवांश के मुताबिक उसे हार्ट वार्ड के सामने सादा कपड़ों में एक आदमी मिला। उसने खुद को पुलिसवाला बताकर स्कूटी के कागज मांगे। देवांश ने कहा कि हम क्यों मानें आप पुलिसवाले हो। तब उसने होमगार्ड को बुला लिया। देवांश के मुताबिक इन लोगों ने यूपी 100 गाड़ी को बुलाया। इसमें से तीन पुलिसवाले और उतरे, उसे पीटने लगे। तब उसने कॉल करके अपनी मां को बुलाया। उनसे भी अभद्रता की गई। देर रात देवांश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। ममता ने बताया कि देवांश का एम्स में मानसिक रोग का इलाज चल रहा है। वे तहरीर देने कोतवाली गईं तो उन्हें भगा दिया गया। वहीं पुलिसवालों ने भी देर रात मेडिकल कराया। इनमें बिशारतगंज का कांस्टेबल बलराम सिंह, अस्पताल चौकी का होमगार्ड मुनीश कुमार और पीआरवी 168 के कांस्टेबल अशोक कुमार, प्रेमबाबू व लवकुश थे। बलराम ने कोतवाली में तहरीर दी कि अचानक तबियत खराब होने पर वो दवा लेने जिला अस्पताल आया था। देवांश ने उसकी बाइक के पीछे स्कूटी लगा दी। उसने टोका तो कैंपस को अपना बताते हुए अभद्रता करने लगा। उसने होमगार्ड मुनीश को मदद के लिए बुलाया तो देवांश ने अपने चाचा फार्मेसिस्ट बीसी यादव व कुछ अन्य लोगों को बुला लिया। इन्होंने उन लोगों से मारपीट की। उसने पीआरवी बुलाई तो उसके स्टाफ को भी पीटा। कोतवाल पंकज वर्मा ने बताया कि उन्होंने तहरीर के आधार पर सिपाही की रिपोर्ट लिख ली है। दूसरा पक्ष दोषी होने के डर से रिपोर्ट कराने नहीं आया। वो आए तो उसकी शिकायत भी सुनी जाएगी।
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जिला अस्पताल में तैनात रहे फार्मेसिस्ट सुशील यादव अब बुलंदशहर में ट्रांसफर हो गए हैं। उनकी पत्नी ममता यादव संभल के भिरावटी गांव की प्रधान हैं और बेटे देवांश के साथ अस्पताल कैंपस के क्वार्टर में रहती हैं। सोमवार रात करीब 11 बजे देवांश स्कूटी से जिला अस्पताल कैंपस में घुसा। देवांश के मुताबिक उसे हार्ट वार्ड के सामने सादा कपड़ों में एक आदमी मिला। उसने खुद को पुलिसवाला बताकर स्कूटी के कागज मांगे। देवांश ने कहा कि हम क्यों मानें आप पुलिसवाले हो। तब उसने होमगार्ड को बुला लिया। देवांश के मुताबिक इन लोगों ने यूपी 100 गाड़ी को बुलाया। इसमें से तीन पुलिसवाले और उतरे, उसे पीटने लगे। तब उसने कॉल करके अपनी मां को बुलाया। उनसे भी अभद्रता की गई। देर रात देवांश को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। ममता ने बताया कि देवांश का एम्स में मानसिक रोग का इलाज चल रहा है। वे तहरीर देने कोतवाली गईं तो उन्हें भगा दिया गया। वहीं पुलिसवालों ने भी देर रात मेडिकल कराया। इनमें बिशारतगंज का कांस्टेबल बलराम सिंह, अस्पताल चौकी का होमगार्ड मुनीश कुमार और पीआरवी 168 के कांस्टेबल अशोक कुमार, प्रेमबाबू व लवकुश थे। बलराम ने कोतवाली में तहरीर दी कि अचानक तबियत खराब होने पर वो दवा लेने जिला अस्पताल आया था। देवांश ने उसकी बाइक के पीछे स्कूटी लगा दी। उसने टोका तो कैंपस को अपना बताते हुए अभद्रता करने लगा। उसने होमगार्ड मुनीश को मदद के लिए बुलाया तो देवांश ने अपने चाचा फार्मेसिस्ट बीसी यादव व कुछ अन्य लोगों को बुला लिया। इन्होंने उन लोगों से मारपीट की। उसने पीआरवी बुलाई तो उसके स्टाफ को भी पीटा। कोतवाल पंकज वर्मा ने बताया कि उन्होंने तहरीर के आधार पर सिपाही की रिपोर्ट लिख ली है। दूसरा पक्ष दोषी होने के डर से रिपोर्ट कराने नहीं आया। वो आए तो उसकी शिकायत भी सुनी जाएगी।
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