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गोली चली तब एक नहीं आया, दुकानें हिलीं तो साथ आए पूरे 20 दुकानदार
Updated Mon, 26 Mar 2018 12:51 AM IST
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बरेली।
जाट रेजिमेंट सेंटर के लांसनायक अनिल कुमार की सदर बाजार में बीच चौराहे पर सरेआम हत्या पर आसपास के दुकानदारों की संवेदनशून्यता से सेना और आम लोगों के बीच पैदा हुई गहरी खाई को अब पाटने की कोशिश की जा रही है। लांसनायक को सड़क पर तड़पते पड़ा देखने के बावजूद मुंह फेर लेने और गवाही देने से भी साफ इंकार कर दिए जाने से नाराज सेना के नागरिक इलाकों से नाता तोड़ लिए जाने के बाद चर्चा फैली कि गुस्साई सेना दुकानों पर बुलडोजर चला सकती है, इसके बाद सदर के व्यापारियों का रुख पलट गया। एक ही दिन में थाना कैंट में 20 लोग बतौर चश्मदीद गवाह अपना नाम दर्ज कराने पहुंच गए। पुलिस अब उनके बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
अरुणाचल प्रदेश में तैनात साथी फौजी की पत्नी से छेड़छाड़ का विरोध करने पर जाट रेजिमेंट सेंटर में तैनात लांसनायक अनिल कुमार की सदर बाजार के मुख्य चौराहे पर 21 मार्च को दो गोलियां मारकर हत्या की गई थी। हत्यारोपी ध्रुव चौधरी ने जिस वक्त एक-एक कर लांसनायक पर गोली चला रहा था, उस वक्त बाजार में रोज की तरह लोगों की अच्छी-खासी चहलकदमी थी। गोलियां चलने के बाद भगदड़ मची और आसपास की दुकानें बंद हो गईं। पुलिस के पहुंचने के बाद हत्यारोपी ध्रुव को पकड़ लिया गया, लेकिन जब गवाही के लिए दुकानदारों से संपर्क किया गया तो अधिकांश दुकानदार बहाने बनाकर कन्नी काट ली। हलवाई, मेडिकल स्टोर और कपड़े की दुकान चलाने वालों तक ने साफ कह दिया कि वह दुकान पर नहीं थे। सेना की नाराजगी इस वजह से भी थी कि करीब बीस मिनट तक घायल लांसनायक अनिल कुमार मौके पर ही पड़े तड़पते रहे, लेकिन फिर भी किसी ने उनकी मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया।
सदर के दुकानदारों की इस संवेदनहीनता से खफा सेना ने नागरिक इलाकों में रह रहे अपने जवानों को वापस बुलाने की शुरुआत कर दी। नागरिक इलाकों से अलग उनके रहने के लिए जगह की भी तलाश शुरू कर दी गई। इस बीच चर्चा फैली सेना सदर में दुकानों पर बुलडोजर चलाकर अपना गुस्सा उतार सकती है। इसके बाद सदर के दुकानदार दहशत में आ गए। रविवार को थाना कैंट में 20 लोग पहुंचे जिन्होंने लांसनायक की हत्या के मामले में चश्मदीद गवाह बनने की इच्छा जताई। पुलिस ने इन लोगों के नाम नोट कर लिए हैं और उनके बयान लेने की तैयारी कर रही है। थाना कैंट के इंस्पेक्टर विजय पाल के मुताबिक सेना का गुस्सा देखते हुए लोगों में यह बदलाव आया है।
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लांसनायक अनिल कुमार की हत्या के बाद कोई भी गवाही देने के लिए तैयार नहीं हो रहा था, लेकिन अब अचानक 20 दुकानदारों ने थाने आकर अपना नाम नोट कराकर कहा है कि वे गवाही देने के लिए तैयार हैं। पुलिस इन लोगों के बयान दर्ज कर रही है। - विजय पाल, एसओ कैंट
सदमे में सेना, रंगरूटों ने नहीं देखी सनडे की फिल्म
सूना पड़ा रहा जेएलए का कारगिल हाल
बरेली।
सेना में शहादत देना गौरव की बात मानी जाती है लेकिन छेड़छाड़ का विरोध करने पर लांसनायक अनिल कुमार की तीन दिन पहले जिस तरह भीड़भाड़ के बीच गोली मारकर हत्या कर दी, उससे पूरी सेना अभी तक सदमे में है। जवानों के बीच ही नहीं, रिक्रूटों में भी किस कदर गम का माहौल है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस रविवार को जेएलए का कारगिल सूना पड़ा रहा। कोई भी रिक्रूट यहां सनडे की फिल्म देखने नहीं पहुंचा। फिल्म देखने आने वाले रिक्रूटों से बीआई बाजार भी गुलजार रहता था लेकिन इस रविवार को बीआई बाजार भी सुनसान पड़ा रहा।
जाट रेजिमेंट सेंटर में प्रशिक्षण लेने वाले रिक्रूटों के मनोरंजन के लिए प्रत्येक रविवार को कारगिल हाल में फिल्म दिखाई जाती है। चार-पांच सौ रिक्रूट टोलियों की शक्ल में अपने इंस्ट्रक्टर के साथ फिल्म देखने कारगिल हाल में पहुंचते हैं। इस रविवार को कारगिल हॉल सन्नाटे में डूबा रहा, यहां एक भी रिक्रूट फिल्म देखने नहीं पहुंचा। फिल्म का शो देखने के बाद रिक्रूट बीआई बाजार में खरीदारी और खाना पीना करते हुए लौटते थे, लेकिन इस बार बीआई बाजार के दुकानदार उनका इंतजार ही करते रह गए।
..उस दिन सेना के जवानों के घर नहीं जले चूल्हे
जाट रेजिमेंट सेंटर के लांसनायक अनिल कुमार की हत्या का गम रेजिमेंट कैंपस के क्वाटर्स में रहने परिवारों में साफ दिखा। कैंपस में रहने वाले किसी भी जवान के घर में चूल्हा नहीं जला। जवानों और उनके परिवारों का पूरा दिन भूखे रहकर ही गुजर गया। लांसनायक का शव जब यहां से हरियाणा भेज दिया गया तब घरों में चूल्हे जले। अभी भी सेना और उनके परिवारों के बीच गम और गुस्से का माहौल बना हुआ है। उनके बीच लांसनायक की हत्या की घटना अभी तक चर्चा में है।
15 साल पहले भी हो चुका है ‘आउट ऑफ बाउंड’
बरेली। लांसनायक अनिल कुमार की हत्या के बाद सेना ने कैंट के सदर नागरिक क्षेत्र में ‘आउट ऑफ बाउंड’ लागू कर दिया है। इसके तहत जवानों के नागरिक क्षेत्र में जाने पर रोक लगा दी गई है। 15 साल पहले भी सेना की ओर से ‘आउट ऑफ बाउंड’ लागू किया गया था, हालांकि तब कारण कुछ और थे और घटना इतनी बड़ी नहीं थी। इस बार मामला ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।
सन् 2003 में जब बीआई बाजार में पार्किंग की व्यवस्था नहीं थी, तब जवानों के परिवार सेना की गाड़ियाें से बीआई बाजार में पहुंचकर खरीदारी किया करते थे। इसी दौरान सेना की गाड़ी खड़ी करने को लेकर बीआई बाजार के किसी दुकानदार का जवानों से विवाद हो गया था। इसके बाद सेना ने इस इलाके में ‘आउट ऑफ बाउंड’ घोषित कर दिया था। गांधी चौक के पास एक बोर्ड भी लगा दिया था कि इस क्षेत्र में सैनिकों का जाना वर्जित है। कई दिन यह स्थिति रहने के बाद कुछ लोगों ने सेना के अधिकारियों से बात कर यह रोक हटवाई थी। इसके बाद एक और घटना सदर में घटी थी। शराब की दुकान पर किसी जवान का किसी व्यक्ति से विवाद हो गया था। तब भी सेना से ऐसी ही रोक लगाई थी। काफी समय तक सैनिकों पर नागरिक क्षेत्र और नागरिकों के सैन्य क्षेत्र में आने-जाने पर पाबंदी लगी रही।
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जाट रेजिमेंट सेंटर के लांसनायक अनिल कुमार की सदर बाजार में बीच चौराहे पर सरेआम हत्या पर आसपास के दुकानदारों की संवेदनशून्यता से सेना और आम लोगों के बीच पैदा हुई गहरी खाई को अब पाटने की कोशिश की जा रही है। लांसनायक को सड़क पर तड़पते पड़ा देखने के बावजूद मुंह फेर लेने और गवाही देने से भी साफ इंकार कर दिए जाने से नाराज सेना के नागरिक इलाकों से नाता तोड़ लिए जाने के बाद चर्चा फैली कि गुस्साई सेना दुकानों पर बुलडोजर चला सकती है, इसके बाद सदर के व्यापारियों का रुख पलट गया। एक ही दिन में थाना कैंट में 20 लोग बतौर चश्मदीद गवाह अपना नाम दर्ज कराने पहुंच गए। पुलिस अब उनके बयान दर्ज करने की तैयारी कर रही है।
अरुणाचल प्रदेश में तैनात साथी फौजी की पत्नी से छेड़छाड़ का विरोध करने पर जाट रेजिमेंट सेंटर में तैनात लांसनायक अनिल कुमार की सदर बाजार के मुख्य चौराहे पर 21 मार्च को दो गोलियां मारकर हत्या की गई थी। हत्यारोपी ध्रुव चौधरी ने जिस वक्त एक-एक कर लांसनायक पर गोली चला रहा था, उस वक्त बाजार में रोज की तरह लोगों की अच्छी-खासी चहलकदमी थी। गोलियां चलने के बाद भगदड़ मची और आसपास की दुकानें बंद हो गईं। पुलिस के पहुंचने के बाद हत्यारोपी ध्रुव को पकड़ लिया गया, लेकिन जब गवाही के लिए दुकानदारों से संपर्क किया गया तो अधिकांश दुकानदार बहाने बनाकर कन्नी काट ली। हलवाई, मेडिकल स्टोर और कपड़े की दुकान चलाने वालों तक ने साफ कह दिया कि वह दुकान पर नहीं थे। सेना की नाराजगी इस वजह से भी थी कि करीब बीस मिनट तक घायल लांसनायक अनिल कुमार मौके पर ही पड़े तड़पते रहे, लेकिन फिर भी किसी ने उनकी मदद के लिए हाथ नहीं बढ़ाया।
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सदर के दुकानदारों की इस संवेदनहीनता से खफा सेना ने नागरिक इलाकों में रह रहे अपने जवानों को वापस बुलाने की शुरुआत कर दी। नागरिक इलाकों से अलग उनके रहने के लिए जगह की भी तलाश शुरू कर दी गई। इस बीच चर्चा फैली सेना सदर में दुकानों पर बुलडोजर चलाकर अपना गुस्सा उतार सकती है। इसके बाद सदर के दुकानदार दहशत में आ गए। रविवार को थाना कैंट में 20 लोग पहुंचे जिन्होंने लांसनायक की हत्या के मामले में चश्मदीद गवाह बनने की इच्छा जताई। पुलिस ने इन लोगों के नाम नोट कर लिए हैं और उनके बयान लेने की तैयारी कर रही है। थाना कैंट के इंस्पेक्टर विजय पाल के मुताबिक सेना का गुस्सा देखते हुए लोगों में यह बदलाव आया है।
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लांसनायक अनिल कुमार की हत्या के बाद कोई भी गवाही देने के लिए तैयार नहीं हो रहा था, लेकिन अब अचानक 20 दुकानदारों ने थाने आकर अपना नाम नोट कराकर कहा है कि वे गवाही देने के लिए तैयार हैं। पुलिस इन लोगों के बयान दर्ज कर रही है। - विजय पाल, एसओ कैंट
सदमे में सेना, रंगरूटों ने नहीं देखी सनडे की फिल्म
सूना पड़ा रहा जेएलए का कारगिल हाल
बरेली।
सेना में शहादत देना गौरव की बात मानी जाती है लेकिन छेड़छाड़ का विरोध करने पर लांसनायक अनिल कुमार की तीन दिन पहले जिस तरह भीड़भाड़ के बीच गोली मारकर हत्या कर दी, उससे पूरी सेना अभी तक सदमे में है। जवानों के बीच ही नहीं, रिक्रूटों में भी किस कदर गम का माहौल है उसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस रविवार को जेएलए का कारगिल सूना पड़ा रहा। कोई भी रिक्रूट यहां सनडे की फिल्म देखने नहीं पहुंचा। फिल्म देखने आने वाले रिक्रूटों से बीआई बाजार भी गुलजार रहता था लेकिन इस रविवार को बीआई बाजार भी सुनसान पड़ा रहा।
जाट रेजिमेंट सेंटर में प्रशिक्षण लेने वाले रिक्रूटों के मनोरंजन के लिए प्रत्येक रविवार को कारगिल हाल में फिल्म दिखाई जाती है। चार-पांच सौ रिक्रूट टोलियों की शक्ल में अपने इंस्ट्रक्टर के साथ फिल्म देखने कारगिल हाल में पहुंचते हैं। इस रविवार को कारगिल हॉल सन्नाटे में डूबा रहा, यहां एक भी रिक्रूट फिल्म देखने नहीं पहुंचा। फिल्म का शो देखने के बाद रिक्रूट बीआई बाजार में खरीदारी और खाना पीना करते हुए लौटते थे, लेकिन इस बार बीआई बाजार के दुकानदार उनका इंतजार ही करते रह गए।
..उस दिन सेना के जवानों के घर नहीं जले चूल्हे
जाट रेजिमेंट सेंटर के लांसनायक अनिल कुमार की हत्या का गम रेजिमेंट कैंपस के क्वाटर्स में रहने परिवारों में साफ दिखा। कैंपस में रहने वाले किसी भी जवान के घर में चूल्हा नहीं जला। जवानों और उनके परिवारों का पूरा दिन भूखे रहकर ही गुजर गया। लांसनायक का शव जब यहां से हरियाणा भेज दिया गया तब घरों में चूल्हे जले। अभी भी सेना और उनके परिवारों के बीच गम और गुस्से का माहौल बना हुआ है। उनके बीच लांसनायक की हत्या की घटना अभी तक चर्चा में है।
15 साल पहले भी हो चुका है ‘आउट ऑफ बाउंड’
बरेली। लांसनायक अनिल कुमार की हत्या के बाद सेना ने कैंट के सदर नागरिक क्षेत्र में ‘आउट ऑफ बाउंड’ लागू कर दिया है। इसके तहत जवानों के नागरिक क्षेत्र में जाने पर रोक लगा दी गई है। 15 साल पहले भी सेना की ओर से ‘आउट ऑफ बाउंड’ लागू किया गया था, हालांकि तब कारण कुछ और थे और घटना इतनी बड़ी नहीं थी। इस बार मामला ज्यादा गंभीर माना जा रहा है।
सन् 2003 में जब बीआई बाजार में पार्किंग की व्यवस्था नहीं थी, तब जवानों के परिवार सेना की गाड़ियाें से बीआई बाजार में पहुंचकर खरीदारी किया करते थे। इसी दौरान सेना की गाड़ी खड़ी करने को लेकर बीआई बाजार के किसी दुकानदार का जवानों से विवाद हो गया था। इसके बाद सेना ने इस इलाके में ‘आउट ऑफ बाउंड’ घोषित कर दिया था। गांधी चौक के पास एक बोर्ड भी लगा दिया था कि इस क्षेत्र में सैनिकों का जाना वर्जित है। कई दिन यह स्थिति रहने के बाद कुछ लोगों ने सेना के अधिकारियों से बात कर यह रोक हटवाई थी। इसके बाद एक और घटना सदर में घटी थी। शराब की दुकान पर किसी जवान का किसी व्यक्ति से विवाद हो गया था। तब भी सेना से ऐसी ही रोक लगाई थी। काफी समय तक सैनिकों पर नागरिक क्षेत्र और नागरिकों के सैन्य क्षेत्र में आने-जाने पर पाबंदी लगी रही।