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कबीर की भाषा आमजन की भाषा: डॉ. त्रिपाठी
Updated Sat, 24 Jun 2017 06:47 PM IST
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बरेली।
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के सभाकक्ष में शुक्रवार को मंडल राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक एवं विशेष हिंदी संगोष्ठी हुई, जिसमें बरेली कॉलेज बरेली के दर्शन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. अवधेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि ‘संत कबीर दास अपने समय के सर्वाधिक बुद्धिमान व्यक्ति थे।
विशेष हिंदी संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. अवधेश चंद्र त्रिपाठी ने कबीर के व्यक्तित्व कृतित्व और दर्शन पर व्यापक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति के बचाव के लिए अपनी भाषा को समृद्ध करना और उसका प्रचार-प्रसार करना बहुत जरूरी है, कबीर जिस भाषा का प्रयोग करते थे वह पंडितों विद्वानों और शासकों की भाषा न होकर आम जन की भाषा है।
संगोष्ठी में अपर मंडल रेल प्रबंधक अशोक कुमार अग्रवाल ने कहा कि मंडल हिंदी प्रयोग के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है। हिंदी प्रयोग प्रसार के लिए समय-समय पर कार्यशालाओं संगोष्ठियों और कवि सम्मेलनों का आयोजन होता है। आज का कार्यक्रम इसी की एक कड़ी है। संत कबीर दास मात्र अपने समय के नहीं अपितु सर्वकालीन सर्वाधिक बुद्धिमान व्यक्ति थे, उनके ज्ञान का परिचय उनके साहित्य में मिलता है। कबीर ने आम बोलचाल की भाषा में साहित्य का सृजन किया है। यही कारण है कि उनके दोहे आम आदमी की जुबान पर रहते हैं और उसका मार्गदर्शन करते हैं।
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इस अवसर पर मंडल चिकित्सा अधीक्षक डा. अरुण खुन्नू, अपर मंडल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएन चौधरी, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (समन्वय) वीके गुप्ता, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (प्रथम) श्री अरुण कुमार, वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक विनीत द्विवेदी, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक अनूप कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक नीतू सिंह आदि मौजूद रहे।
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पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय के सभाकक्ष में शुक्रवार को मंडल राजभाषा कार्यान्वयन समिति की बैठक एवं विशेष हिंदी संगोष्ठी हुई, जिसमें बरेली कॉलेज बरेली के दर्शन शास्त्र विभाग के प्रोफेसर डॉ. अवधेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि ‘संत कबीर दास अपने समय के सर्वाधिक बुद्धिमान व्यक्ति थे।
विशेष हिंदी संगोष्ठी के मुख्य वक्ता डॉ. अवधेश चंद्र त्रिपाठी ने कबीर के व्यक्तित्व कृतित्व और दर्शन पर व्यापक प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति के बचाव के लिए अपनी भाषा को समृद्ध करना और उसका प्रचार-प्रसार करना बहुत जरूरी है, कबीर जिस भाषा का प्रयोग करते थे वह पंडितों विद्वानों और शासकों की भाषा न होकर आम जन की भाषा है।
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संगोष्ठी में अपर मंडल रेल प्रबंधक अशोक कुमार अग्रवाल ने कहा कि मंडल हिंदी प्रयोग के क्षेत्र में अग्रणी बना हुआ है। हिंदी प्रयोग प्रसार के लिए समय-समय पर कार्यशालाओं संगोष्ठियों और कवि सम्मेलनों का आयोजन होता है। आज का कार्यक्रम इसी की एक कड़ी है। संत कबीर दास मात्र अपने समय के नहीं अपितु सर्वकालीन सर्वाधिक बुद्धिमान व्यक्ति थे, उनके ज्ञान का परिचय उनके साहित्य में मिलता है। कबीर ने आम बोलचाल की भाषा में साहित्य का सृजन किया है। यही कारण है कि उनके दोहे आम आदमी की जुबान पर रहते हैं और उसका मार्गदर्शन करते हैं।
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इस अवसर पर मंडल चिकित्सा अधीक्षक डा. अरुण खुन्नू, अपर मंडल चिकित्सा अधीक्षक डॉ. बीएन चौधरी, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (समन्वय) वीके गुप्ता, वरिष्ठ मंडल इंजीनियर (प्रथम) श्री अरुण कुमार, वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक विनीत द्विवेदी, वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक अनूप कुमार सिंह, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक नीतू सिंह आदि मौजूद रहे।