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छह दिन से लापता फैक्ट्रीकर्मी की नाले में मिली लाश
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बरेली। देहरादून से छह दिन पहले बरेली रवाना हुए फैक्ट्रीकर्मी का शव बीसलपुर चौराहे के पास नाले में पड़ा मिला। पोस्टमार्टम में मौत का कारण पानी में डूबना बताया गया है। परिवार वाले साजिश की आशंका जता रहे हैं।
इज्जतनगर के गांव अधलखिया निवासी 50 वर्षीय नंदराम देहरादून की एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे। पत्नी प्रमिला, छह बेटियां और एक बेटा गांव में रहते हैं। भांजे रोहित ने बताया कि मामा ने 21 जनवरी की दोपहर तीन बजे मामी को फोन करके घर आने की बात कही थी। उनके पास करीब साढ़े आठ हजार रुपये, मोबाइल और कपड़ों का बैग था। वह दूसरे दिन भी घर नहीं पहुंचे तो मामी ने फोन किया लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ था। तब से वे लोग हर संभावित उन्हें जगह खोज रहे थे। शनिवार शाम उनका शव बीसलपुर चौराहे से जगतपुर मोड़ वाले नाले में मिला। उनकी जेब में पांच सौ रुपये और बंद मोबाइल मिला। इसी का सिम निकालकर बारादरी पुलिस ने उन्हें सूचना दी। रोहित ने बताया कि मामा की किसी से दुश्मनी नहीं लेकिन इस तरह मौत सवाल खड़े कर रही है। वह कभी-कभी शराब पी लेते थे लेकिन जहां शव मिला, वहां जाने का कोई मतलब नहीं। सवाल उठाया कि शव अगर यहीं पड़ा था तो इस भीड़भाड़ वाली जगह में पांच दिन से क्यों दिखा। मामा की जेब से बाकी रुपये और बैग गायब है। तीन बजे देहरादून से चलने के बाद रात बारह से दो बजे के आसपास सेटेलाइट चौराहे पर उतरे होंगे, वहां से किसके साथ यहां तक आए, यह भी सवाल है? रोहित ने पुलिस से मामले की जांच कराने कहा है।
इज्जतनगर के गांव अधलखिया निवासी 50 वर्षीय नंदराम देहरादून की एक फैक्ट्री में नौकरी करते थे। पत्नी प्रमिला, छह बेटियां और एक बेटा गांव में रहते हैं। भांजे रोहित ने बताया कि मामा ने 21 जनवरी की दोपहर तीन बजे मामी को फोन करके घर आने की बात कही थी। उनके पास करीब साढ़े आठ हजार रुपये, मोबाइल और कपड़ों का बैग था। वह दूसरे दिन भी घर नहीं पहुंचे तो मामी ने फोन किया लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ था। तब से वे लोग हर संभावित उन्हें जगह खोज रहे थे। शनिवार शाम उनका शव बीसलपुर चौराहे से जगतपुर मोड़ वाले नाले में मिला। उनकी जेब में पांच सौ रुपये और बंद मोबाइल मिला। इसी का सिम निकालकर बारादरी पुलिस ने उन्हें सूचना दी। रोहित ने बताया कि मामा की किसी से दुश्मनी नहीं लेकिन इस तरह मौत सवाल खड़े कर रही है। वह कभी-कभी शराब पी लेते थे लेकिन जहां शव मिला, वहां जाने का कोई मतलब नहीं। सवाल उठाया कि शव अगर यहीं पड़ा था तो इस भीड़भाड़ वाली जगह में पांच दिन से क्यों दिखा। मामा की जेब से बाकी रुपये और बैग गायब है। तीन बजे देहरादून से चलने के बाद रात बारह से दो बजे के आसपास सेटेलाइट चौराहे पर उतरे होंगे, वहां से किसके साथ यहां तक आए, यह भी सवाल है? रोहित ने पुलिस से मामले की जांच कराने कहा है।
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