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इंजीनियर ने उठाया सवाल- अगर पागल था हमलावर तो पागलखाने क्यों नहीं भेजा
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आईजीआरएस पर शिकायत करने पर पुलिस ने दी भ्रामक रिपोर्ट
बरेली। पिछले दिनों राधेश्याम एन्कलेव में इंजीनियर के घर में घुसे हमलावर को बारादरी थाने से छोड़ देने से पीड़ित परिवार आहत है। इंजीनियर ने आईजीआरएस पर इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन जांच में पुलिस ने भ्रामक रिपोर्ट देकर मामला ही दबा दिया। इंजीनियर ने सवाल उठाया है कि अगर पुलिस का यह कहना मान भी लिया जाए कि हमलावर पागल था तो पुलिस ने उसे पागलखाने में भर्ती क्यों नहीं कराया, उसे छोड़ क्यों दिया।
पिछले दिनों इंजीनियर राजीव मोहन के घर में बाउंड्री फांदकर घुसे मनोज नामक हमलावर ने जमकर तोड़फोड़ की थी। इंजीनियर और उनकी पत्नी ने खुद को कमरे में बंद करके किसी तरह जान बचाई थी। सूचना पर बारादरी पुलिस हमलावर को रात में पकड़ ले गई, लेकिन सुबह पागल बताकर उसे छोड़ दिया। इसकी राजीव मोहन ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की, लेकिन पुलिस ने भ्रामक आख्या देकर मामला ही बंद कर दिया। एएसपी अभिषेक वर्मा ने इस जांच रिपोर्ट में कहा कि हमलावर पागलों की तरह हरकतें कर रहा था। अपना नाम-पता तक सही से नहीं बता पा रहा था। उसकी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब इंजीनियर राजीव मोहन ने इस हास्यापद रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया की है कि अगर आरोपी वाकई पागल है तो उसे पागलखाने भेजना चाहिए था और अपराधी था तो उसे जेल भेजना चाहिए था। उन्होंने कहा है कि पुलिस अपराधियों की गिरफ्तारी को अभियान चला रही है वहीं कुछ पुलिसकर्मी सरकार को गुमराह करके भ्रामक सूचनाएं दे रहे हैं।
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बरेली। पिछले दिनों राधेश्याम एन्कलेव में इंजीनियर के घर में घुसे हमलावर को बारादरी थाने से छोड़ देने से पीड़ित परिवार आहत है। इंजीनियर ने आईजीआरएस पर इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन जांच में पुलिस ने भ्रामक रिपोर्ट देकर मामला ही दबा दिया। इंजीनियर ने सवाल उठाया है कि अगर पुलिस का यह कहना मान भी लिया जाए कि हमलावर पागल था तो पुलिस ने उसे पागलखाने में भर्ती क्यों नहीं कराया, उसे छोड़ क्यों दिया।
पिछले दिनों इंजीनियर राजीव मोहन के घर में बाउंड्री फांदकर घुसे मनोज नामक हमलावर ने जमकर तोड़फोड़ की थी। इंजीनियर और उनकी पत्नी ने खुद को कमरे में बंद करके किसी तरह जान बचाई थी। सूचना पर बारादरी पुलिस हमलावर को रात में पकड़ ले गई, लेकिन सुबह पागल बताकर उसे छोड़ दिया। इसकी राजीव मोहन ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत की, लेकिन पुलिस ने भ्रामक आख्या देकर मामला ही बंद कर दिया। एएसपी अभिषेक वर्मा ने इस जांच रिपोर्ट में कहा कि हमलावर पागलों की तरह हरकतें कर रहा था। अपना नाम-पता तक सही से नहीं बता पा रहा था। उसकी मानसिक स्थिति को ध्यान में रखकर कोई कार्रवाई नहीं की गई। अब इंजीनियर राजीव मोहन ने इस हास्यापद रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया की है कि अगर आरोपी वाकई पागल है तो उसे पागलखाने भेजना चाहिए था और अपराधी था तो उसे जेल भेजना चाहिए था। उन्होंने कहा है कि पुलिस अपराधियों की गिरफ्तारी को अभियान चला रही है वहीं कुछ पुलिसकर्मी सरकार को गुमराह करके भ्रामक सूचनाएं दे रहे हैं।
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