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कमलेश तिवारी हत्याकांड: कैफी की जमानत के बाद नावेद और कामरान के परिजन भी पैरवी में जुटे
Fri, 27 Dec 2019 12:42 PM IST
बरेली ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
Published by: बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 27 Dec 2019 12:42 PM IST
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कमलेश तिवारी हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला/सोशल मीडिया
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लखनऊ में हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या के मामले में बरेली का नाम सुर्खियों में रहा था। हत्यारों को बरेली में शरण और मदद देने के मामले में यहां से तीन आरोपियों की गिरफ्तारी की गई थी। अब इनमें से एक को जमानत मिलने के बाद बाकी दोनों के परिवार भी पैरवी में जुट गए हैं। चार्जशीट लगने के बाद कोर्ट में ट्रायल पर बहस होनी है।
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कमलेश तिवारी की हत्या के बाद हत्यारे रात में ही बरेली आ गए थे। यहां उनके खाने, ठहरने और इलाज की व्यवस्था की गई। बाद में उन्हें नेपाल सीमा में छोड़ने का काम भी बरेली के ही कुछ लोगों ने किया। मामले में जैसे जैसे खुलासा होता रहा, बरेली के लोगों की धरपकड़ होती गई। पहली गिरफ्तारी दरगाह पर नात पेश करने वाले शाहबाद मोहल्ला निवासी मौलाना सैयद कैफी अली की हुई। इसके बाद दरगाह से ही जुड़े सुप्रीम कोर्ट के वकील नावेद और ट्रैवल एजेंसी चलाने वाले उसके दोस्त कामरान को गिरफ्तार किया गया। लखनऊ की एसआईटी ने अब कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी है, इसमें बरेली के तीनों आरोपियों को हत्यारों के मददगार के तौर पर आरोपित किया है।
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इनमें कैफी की जमानत तीन दिसंबर को सीजेएम लखनऊ कोर्ट से होने के बाद लखनऊ जिला जेल से उसकी चार जनवरी को रिहाई हो चुका है। विवेचक नाका हिंडोला थाने के प्रभारी सुजीत कुमार दुबे की ओर से सरकारी वकील ने कैफी पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमानत का विरोध किया था, जबकि बरेली से गए अधिवक्ता अब्दुल शाहिद खान ने आरोप को मौके पर ही जमानत देने योग्य बताकर जमानत की मांग की थी। जमानत के बाद कोर्ट ने बहस को चार जनवरी की तारीख तय की है। चार्जशीट पर इसी दिन बहस होनी है, वकील अब्दुल शाहिद इसमें कैफी की पैरवी करने जाएंगे। वहीं, कैफी मामले को नजीर के तौर पर मानकर नावेद और कामरान के परिवार ने भी जमानत को पैरवी तेज कर दी है।
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