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डूडा में सर्वे करने वाली पटना की एजेंसी पूरे खेल की मास्टरमाइंड
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बरेली। गरीबों के खातों में लाखों रुपये का लेनदेन कराने के खेल में डूडा में प्रधानमंत्री आवास के सर्वे में लगी पटना की एक एजेंसी के कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध है। कंपनी के कर्मचारियों ने हर महीने आठ हजार रुपये दिलाने का झांसा देकर इन लोगों के खाते खुलवाए और लाखों रुपये का लेनदेन कर डाला। शिकायतकर्ता का आरोप यह भी है कि मामला खुलने पर उसे धमकियां दी जा रही हैं।
बता दें कि डूडा में प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन के बाद उनका पात्रता परीक्षण होता है। इस सर्वे की जिम्मेदारी पटना की एक कंपनी को दी गई है और इस कंपनी के करीब 50 लड़के शहर भर में काम कर रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से ही कुछ लड़के रुपये इधर-उधर करने वाले गैंग के संपर्क में आ गए और इस योजना के लिए खुलवाए खातों का इस्तेमाल शुरू हो गया। अब यह मामला खुलने के बाद कंपनी के लोगोें में हड़कंप मचा है। मगर डूडा के अफसर पूरे मामले से अनजान बने हुए हैं।
केस वन
यह बैंक खाता सिकलापुर निवासी महिला के नाम पर खुलवाया गया है। मगर काफी खोजबीन के बाद भी महिला का पता नहीं लगा। उसके खाते में 31 अगस्त को सात लाख रुपये नकद जमा किए गए हैं और उसी दिन आयशा मीर नाम की महिला के खाते में ट्रांसफर हो गए हैं। महिला का मोबाइल नंबर भी बैंक खाते में गलत लिखा है।
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केस टू
रबड़ी टोला निवासी महिला के खाते में भी 31 अगस्त को सात लाख रुपये नकद जमा करके आयशा मीर के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। महिला का मोबाइल नंबर ठीक था लेकिन काफी प्रयास के बावजूद उसने अपना सही पता नहीं बताया। आसपास के लोग भी महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके।
इन वजह से उठ रहे सवाल
- प्रधानमंत्री योजना के पात्र पर बैंक खाते में नकद जमा करने के लिए सात लाख रुपये कहां से आए।
- पता सिकलापुर या रबड़ी टोला का है तो उनके बैंक खाते नगरिया परीक्षित के बैंक में क्यों खुलवाए गए।
- जिन लोगों के नाम पर खाते खुलवाए गए हैं, वे सामने क्यों नहीं आ रहे और उनके पते की पुष्टि क्यों नहीं हो रही।
- अगर खाते प्रधानमंत्री आवास के लिए खुलवाए गए तो आठ हजार रुपये प्रति माह देने का झांसा क्यों दिया।
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बता दें कि डूडा में प्रधानमंत्री आवास के लिए आवेदन के बाद उनका पात्रता परीक्षण होता है। इस सर्वे की जिम्मेदारी पटना की एक कंपनी को दी गई है और इस कंपनी के करीब 50 लड़के शहर भर में काम कर रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि इनमें से ही कुछ लड़के रुपये इधर-उधर करने वाले गैंग के संपर्क में आ गए और इस योजना के लिए खुलवाए खातों का इस्तेमाल शुरू हो गया। अब यह मामला खुलने के बाद कंपनी के लोगोें में हड़कंप मचा है। मगर डूडा के अफसर पूरे मामले से अनजान बने हुए हैं।
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केस वन
यह बैंक खाता सिकलापुर निवासी महिला के नाम पर खुलवाया गया है। मगर काफी खोजबीन के बाद भी महिला का पता नहीं लगा। उसके खाते में 31 अगस्त को सात लाख रुपये नकद जमा किए गए हैं और उसी दिन आयशा मीर नाम की महिला के खाते में ट्रांसफर हो गए हैं। महिला का मोबाइल नंबर भी बैंक खाते में गलत लिखा है।
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केस टू
रबड़ी टोला निवासी महिला के खाते में भी 31 अगस्त को सात लाख रुपये नकद जमा करके आयशा मीर के खाते में ट्रांसफर किए गए हैं। महिला का मोबाइल नंबर ठीक था लेकिन काफी प्रयास के बावजूद उसने अपना सही पता नहीं बताया। आसपास के लोग भी महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं दे सके।
इन वजह से उठ रहे सवाल
- प्रधानमंत्री योजना के पात्र पर बैंक खाते में नकद जमा करने के लिए सात लाख रुपये कहां से आए।
- पता सिकलापुर या रबड़ी टोला का है तो उनके बैंक खाते नगरिया परीक्षित के बैंक में क्यों खुलवाए गए।
- जिन लोगों के नाम पर खाते खुलवाए गए हैं, वे सामने क्यों नहीं आ रहे और उनके पते की पुष्टि क्यों नहीं हो रही।
- अगर खाते प्रधानमंत्री आवास के लिए खुलवाए गए तो आठ हजार रुपये प्रति माह देने का झांसा क्यों दिया।