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ठगी के बाद बोला आरोपी- ये तो मेरा रोज का काम
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बरेली। जोगी नवादा निवासी एक बुक डिपो कर्मचारी से ओएलएक्स पर बाइक बेचने के नाम पर तीस हजार की ठगी कर ली गई। खुद को सैन्यकर्मी बताकर कर्मचारी को भरोसे में लिया रकम ठग ली। ठगी के बाद पीड़ित ने फोन किया तो बोला- ये तो उसका रोज का काम है। एसएसपी न कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
बुक डिपो पर कर्मचारी मनोज के मुताबिक ओएलएक्स पर उन्होंने हीरो स्पलेंडर बाइक का विज्ञापन देखा। बाइक किसी विकास पटेल के नाम रजिस्टर्ड थी। संपर्क किया तो विकास ने बताया कि सेना में हैं। पहले बरेली और अब आगरा में तैनात हैं। अब उनका ट्रांसफर बहुत दूर किया जा रहा है। वे सब सामान बेचकर जा रहे हैं। ये बाइक छह महीने पहले ही निकाली है, चालीस हजार में दे देंगे। सौदा तीस हजार में तय हो गया। दस हजार एडवांस मांगे गए और बाकी बाइक मिलने पर कैश देने की बात तय हुई। उन्होंने विकास से उनके और गाड़ी के कागजात व्हाट्सएप पर मंगा लिए तो भरोसा हो गया। 21 सितंबर को बताए गए पेटीएम अकाउंट में दस हजार रुपये डाल दिए। 22 की सुबह जयकिशन नाम के व्यक्ति की कॉल आई। बताया कि वह बाइक बरेली ले आया है, लेकिन बाकी के बीस हजार पेटीएम करने पर ही बाइक मिलेगी। मनोज ने यह रकम भी ट्रांसफर कर दी। जयकिशन ने मेल आने की पुष्टि के बाद कहा कि 16 हजार रुपये सिक्योरिटी के तौर पर और डालें, जो बाइक देते वक्त वापस कर दिए जाएंगे। तब मनोज को धोखाधड़ी का अहसास हुआ। विकास के नंबर पर कॉल की तो वह गालीगलौज करने लगा। बोला- इस तरह की ठगी रोज का काम है।
‘ऑनलाइन खरीद करते वक्त सावधानी बरतें। अगर कहीं जरूर से ज्यादा डिस्काउंट या अन्य तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं तो खासतौर से तस्दीक कर लें। अधिकांश तौर पर पढ़े लिखे लोग ही इस तरह की ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऑनलाइन ठगी के मामलों में पुलिस प्रभावी कार्रवाई कर रही है पर लोगों को खुद ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।’
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- शैलेश कुमार पांडेय, एसएसपी
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बुक डिपो पर कर्मचारी मनोज के मुताबिक ओएलएक्स पर उन्होंने हीरो स्पलेंडर बाइक का विज्ञापन देखा। बाइक किसी विकास पटेल के नाम रजिस्टर्ड थी। संपर्क किया तो विकास ने बताया कि सेना में हैं। पहले बरेली और अब आगरा में तैनात हैं। अब उनका ट्रांसफर बहुत दूर किया जा रहा है। वे सब सामान बेचकर जा रहे हैं। ये बाइक छह महीने पहले ही निकाली है, चालीस हजार में दे देंगे। सौदा तीस हजार में तय हो गया। दस हजार एडवांस मांगे गए और बाकी बाइक मिलने पर कैश देने की बात तय हुई। उन्होंने विकास से उनके और गाड़ी के कागजात व्हाट्सएप पर मंगा लिए तो भरोसा हो गया। 21 सितंबर को बताए गए पेटीएम अकाउंट में दस हजार रुपये डाल दिए। 22 की सुबह जयकिशन नाम के व्यक्ति की कॉल आई। बताया कि वह बाइक बरेली ले आया है, लेकिन बाकी के बीस हजार पेटीएम करने पर ही बाइक मिलेगी। मनोज ने यह रकम भी ट्रांसफर कर दी। जयकिशन ने मेल आने की पुष्टि के बाद कहा कि 16 हजार रुपये सिक्योरिटी के तौर पर और डालें, जो बाइक देते वक्त वापस कर दिए जाएंगे। तब मनोज को धोखाधड़ी का अहसास हुआ। विकास के नंबर पर कॉल की तो वह गालीगलौज करने लगा। बोला- इस तरह की ठगी रोज का काम है।
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‘ऑनलाइन खरीद करते वक्त सावधानी बरतें। अगर कहीं जरूर से ज्यादा डिस्काउंट या अन्य तरह के प्रलोभन दिए जा रहे हैं तो खासतौर से तस्दीक कर लें। अधिकांश तौर पर पढ़े लिखे लोग ही इस तरह की ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऑनलाइन ठगी के मामलों में पुलिस प्रभावी कार्रवाई कर रही है पर लोगों को खुद ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है।’
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- शैलेश कुमार पांडेय, एसएसपी