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सिस्टम बेखौफ: शत्रु संपत्ति की भी बंदरबांट कर दी
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बरेली। भूमाफिया से हाथ मिला चुके भ्रष्ट सिस्टम ने भोजीपुरा ब्लॉक के गांव खितौसा में शत्रु संपत्ति की भी बंदरबांट कर दी। विभाजन के समय पाकिस्तान गए लोगों की यह जमीन निजी बताकर रिकॉर्ड में कई लोगों के नाम दर्ज कर दी गई है। ग्राम प्रधान शंकर लाल गंगवार ने इसकी शिकायत डीएम से की है।
गांव खितौसा में चकबंदी के आधार वर्ष का खाता नंबर दो और तीन अब्बास मियां और शफी हैदर के नाम पर था। ये दोनों लोग विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए थे जिसके बाद चकबंदी से उनकी भूमि काश्त कस्टोडियम में दर्ज चली आ रही है। ग्राम प्रधान ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से शिकायत की है कि 1982-83 में चकबंदी के दौरान कुछ लोगों ने आपत्ति की कि उनके पूर्वजों ने कस्टोडियन विभाग से 1970 में सेल सर्टिफिकेट जारी कराया। बाद में फर्जी समझौते के आधार पर इस संपत्ति पर अपना नाम दर्ज करा लिया। इस मामले में ग्राम समाज के सदस्यों ने कस्टोडियन विभाग के तत्कालीन इंचार्ज एडीएम प्रशासन के आदेश पर सरकारी अधिववक्ता की तरफ से उप संचालक चकबंदी न्यायालय में वाद भी चलाया गया जो पैरवी न होने से निरस्त हो गया। हालांकि अब पुर्नस्थापना प्रार्थनापत्र स्वीकार कर लिया गया है। शिकायत है कि अधिकारियों की मिलीभगत से इस मामले में लीपापोती की वजह से प्रकरण का निस्तारण सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोग इस संपत्ति के फर्जीवाड़े और अवैध कब्जे को लेकर परेशान हैं।
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गांव खितौसा में चकबंदी के आधार वर्ष का खाता नंबर दो और तीन अब्बास मियां और शफी हैदर के नाम पर था। ये दोनों लोग विभाजन के समय पाकिस्तान चले गए थे जिसके बाद चकबंदी से उनकी भूमि काश्त कस्टोडियम में दर्ज चली आ रही है। ग्राम प्रधान ने डीएम वीरेंद्र कुमार सिंह से शिकायत की है कि 1982-83 में चकबंदी के दौरान कुछ लोगों ने आपत्ति की कि उनके पूर्वजों ने कस्टोडियन विभाग से 1970 में सेल सर्टिफिकेट जारी कराया। बाद में फर्जी समझौते के आधार पर इस संपत्ति पर अपना नाम दर्ज करा लिया। इस मामले में ग्राम समाज के सदस्यों ने कस्टोडियन विभाग के तत्कालीन इंचार्ज एडीएम प्रशासन के आदेश पर सरकारी अधिववक्ता की तरफ से उप संचालक चकबंदी न्यायालय में वाद भी चलाया गया जो पैरवी न होने से निरस्त हो गया। हालांकि अब पुर्नस्थापना प्रार्थनापत्र स्वीकार कर लिया गया है। शिकायत है कि अधिकारियों की मिलीभगत से इस मामले में लीपापोती की वजह से प्रकरण का निस्तारण सही ढंग से नहीं हो पा रहा है। स्थानीय लोग इस संपत्ति के फर्जीवाड़े और अवैध कब्जे को लेकर परेशान हैं।
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