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सूदखोरी का खेल- रिटायर्ड दरोगा और साथी को जेल भेजा पर महिला सूदखोर को बचाया
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बरेली। एसएसपी दफ्तर में जहर खाकर अस्पताल में दम तोड़ने वाले फर्नीचर कारोबारी हरिप्रसाद मीना के पोस्टमार्टम में जहर के लक्षण मिलने के बाद पर पुष्टि के लिए विसरा सुरक्षित कर लिया गया। सुभाषनगर पुलिस ने रिटायर्ड दरोगा और उसके साथी सूदखोर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। सूदखोरी अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई है। हालांकि इसी धंधे से जुड़ी महिला सूदखोर को फिलहाल कार्रवाई से अलग रखा गया है। परिवार अब उसके खिलाफ भी कार्रवाई कराने की मांग कर रहा है।
बुधवार दोपहर करगैना बीडीए कॉलोनी के 62 वर्षीय हरिप्रसाद मीना एसएसपी दफ्तर पहुंचे। कुछ देर टहलने के बाद वहां मौजूद पत्रकारों और पुलिसवालों को सल्फास के पैकेट दिखाकर बताया कि वह जान देने जा रहे हैं। जानकारी एसपी देहात डॉ. संसार सिंह तक पहुंची तो उन्होंने जन शिकायत प्रकोष्ठ प्रभारी सतीश कुमार को बुलाकर हरिप्रसाद से सल्फास के दोनों सीलबंद पैकेट छिनवा लिए। हाथ में एक सुसाइड नोट और तहरीर लिए हरिप्रसाद ने बताया कि दो साल पहले फर्नीचर दुकान खोलने को कॉलोनी के राजीव सक्सेना और उसके रिश्ते के भाई भूड़ निवासी रिटायर्ड दरोगा अशोक सक्सेना से दो लाख रुपये लिए थे। ये लोग तीन लाख से ज्यादा रकम वसूल चुके हैं। उनका मकान भी लिखापढ़ी कर ले चुके हैं। फिर भी रकम बकाया बताकर मारपीट करते हैं। एसपी देहात ने समस्या निस्तारण के लिए हरिप्रसाद को थाना सुभाषनगर भिजवा दिया, जहां उनकी तबियत बिगड़ गई। पुलिस ने पौने चार बजे उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया जहां शाम को मौत हो गई। पुलिस ने हरिप्रसाद के बेटे संजय की ओर से रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को दोनों को कोर्ट के बाद जेल भेजा गया।
सीसीटीवी फुटेज दिखवाई, परिवार को ही मिलेगा मकान
बुधवार की घटना के बाद एसएसपी के निर्देश पर एसपी देहात ने कार्यालय परिसर की सीसीटीवी फुटेज चेक कराई। इसमें करीब छह से सात मिनट की गतिविधि में हरिप्रसाद लोगों को विषाक्त पदार्थ के पैकेट दिखाता तो दिख रहा है पर खाता नहीं दिख रहा। इससे अधिकारियों ने अंदाजा लगाया कि वो सल्फास खाकर ही दफ्तर आया था। गुरुवार को एसपी देहात परिवार से मिलने पोस्टमार्टम हाउस भी गए लेकिन वे लोग जा चुके थे। उन्होंने बताया कि सीओ द्वितीय को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध तरीके से कब्जाया हरिप्रसाद का मकान उनके परिवार को वापस दिलाया जाए।
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दरोगा जी बड़े सयाने, हरिप्रसाद को जानने से ही किया इनकार
जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने लाए गए दोनों आरोपी घटना से अनजान बन रहे थे। कह रहे थे कि वे हरिप्रसाद को जानते ही नहीं हैं। पता नहीं क्यों उन्हें जेल भेजा जा रहा है। हालांकि इंस्पेक्टर को उन्होंने बताया कि उन्होंने करीब पौने तीन लाख रुपये हरिप्रसाद को दिए थे। वहीं, पोस्टमार्टम के बाद परिवार ने सिटी श्मशान भूमि में हरिप्रसाद का अंतिम संस्कार कर दिया। बेटे संजय और विजय का कहना था कि अशोक और राजीव के अलावा एक महिला भी सूदखोरी के धंधे में शामिल है। इसी महिला के जरिये ये लोगों को पैसा दिलवाते थे। ये लोग अब तक बीडीए कॉलोनी के कई मकान कब्जा करके बेच चुके हैं। उनके पिता ने सुसाइड नोट में उसका नाम लिखा है। बताया कि ये सुसाइड नोट पुलिस के पास होने की वजह से वे देख नहीं पाए, इसलिए तहरीर में महिला का नाम नहीं लिखा। अब वे उस महिला के नाम को रिपोर्ट में बढ़ाने के लिए पत्र देंगे। इंस्पेक्टर हरिश्चंद्र जोशी का कहना था कि महिला का नाम न तो तहरीर में था और न ही परिवार के लोगों ने कोई आरोप लगाया। अगर लिखित शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
चौबारी के दबंग ने भी दिया था पैसा
हरिप्रसाद पर इन सूदखोरों के अलावा और भी लोगों का कर्ज था। इनमें चौबारी का एक दबंग भी शामिल है। उसने भी काफी रकम हरिप्रसाद को दी थी और मोटा ब्याज वसूल रहा था। फर्नीचर दुकान खोलने के बाद हरिप्रसाद बुरी तरह कर्ज में घिर गए थे और काफी परेशान थे। उनकी मौत के बाद ये सारी बातें सामने आ रही हैं। हालांकि चौबारी के दबंग का नाम सुसाइड या तहरीर में न होने से वह साफ बच गया है।
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बुधवार दोपहर करगैना बीडीए कॉलोनी के 62 वर्षीय हरिप्रसाद मीना एसएसपी दफ्तर पहुंचे। कुछ देर टहलने के बाद वहां मौजूद पत्रकारों और पुलिसवालों को सल्फास के पैकेट दिखाकर बताया कि वह जान देने जा रहे हैं। जानकारी एसपी देहात डॉ. संसार सिंह तक पहुंची तो उन्होंने जन शिकायत प्रकोष्ठ प्रभारी सतीश कुमार को बुलाकर हरिप्रसाद से सल्फास के दोनों सीलबंद पैकेट छिनवा लिए। हाथ में एक सुसाइड नोट और तहरीर लिए हरिप्रसाद ने बताया कि दो साल पहले फर्नीचर दुकान खोलने को कॉलोनी के राजीव सक्सेना और उसके रिश्ते के भाई भूड़ निवासी रिटायर्ड दरोगा अशोक सक्सेना से दो लाख रुपये लिए थे। ये लोग तीन लाख से ज्यादा रकम वसूल चुके हैं। उनका मकान भी लिखापढ़ी कर ले चुके हैं। फिर भी रकम बकाया बताकर मारपीट करते हैं। एसपी देहात ने समस्या निस्तारण के लिए हरिप्रसाद को थाना सुभाषनगर भिजवा दिया, जहां उनकी तबियत बिगड़ गई। पुलिस ने पौने चार बजे उन्हें एक अस्पताल में भर्ती कराया जहां शाम को मौत हो गई। पुलिस ने हरिप्रसाद के बेटे संजय की ओर से रिपोर्ट दर्ज कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गुरुवार को दोनों को कोर्ट के बाद जेल भेजा गया।
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सीसीटीवी फुटेज दिखवाई, परिवार को ही मिलेगा मकान
बुधवार की घटना के बाद एसएसपी के निर्देश पर एसपी देहात ने कार्यालय परिसर की सीसीटीवी फुटेज चेक कराई। इसमें करीब छह से सात मिनट की गतिविधि में हरिप्रसाद लोगों को विषाक्त पदार्थ के पैकेट दिखाता तो दिख रहा है पर खाता नहीं दिख रहा। इससे अधिकारियों ने अंदाजा लगाया कि वो सल्फास खाकर ही दफ्तर आया था। गुरुवार को एसपी देहात परिवार से मिलने पोस्टमार्टम हाउस भी गए लेकिन वे लोग जा चुके थे। उन्होंने बताया कि सीओ द्वितीय को निर्देश दिए गए हैं कि अवैध तरीके से कब्जाया हरिप्रसाद का मकान उनके परिवार को वापस दिलाया जाए।
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दरोगा जी बड़े सयाने, हरिप्रसाद को जानने से ही किया इनकार
जिला अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराने लाए गए दोनों आरोपी घटना से अनजान बन रहे थे। कह रहे थे कि वे हरिप्रसाद को जानते ही नहीं हैं। पता नहीं क्यों उन्हें जेल भेजा जा रहा है। हालांकि इंस्पेक्टर को उन्होंने बताया कि उन्होंने करीब पौने तीन लाख रुपये हरिप्रसाद को दिए थे। वहीं, पोस्टमार्टम के बाद परिवार ने सिटी श्मशान भूमि में हरिप्रसाद का अंतिम संस्कार कर दिया। बेटे संजय और विजय का कहना था कि अशोक और राजीव के अलावा एक महिला भी सूदखोरी के धंधे में शामिल है। इसी महिला के जरिये ये लोगों को पैसा दिलवाते थे। ये लोग अब तक बीडीए कॉलोनी के कई मकान कब्जा करके बेच चुके हैं। उनके पिता ने सुसाइड नोट में उसका नाम लिखा है। बताया कि ये सुसाइड नोट पुलिस के पास होने की वजह से वे देख नहीं पाए, इसलिए तहरीर में महिला का नाम नहीं लिखा। अब वे उस महिला के नाम को रिपोर्ट में बढ़ाने के लिए पत्र देंगे। इंस्पेक्टर हरिश्चंद्र जोशी का कहना था कि महिला का नाम न तो तहरीर में था और न ही परिवार के लोगों ने कोई आरोप लगाया। अगर लिखित शिकायत आती है तो कार्रवाई की जाएगी।
चौबारी के दबंग ने भी दिया था पैसा
हरिप्रसाद पर इन सूदखोरों के अलावा और भी लोगों का कर्ज था। इनमें चौबारी का एक दबंग भी शामिल है। उसने भी काफी रकम हरिप्रसाद को दी थी और मोटा ब्याज वसूल रहा था। फर्नीचर दुकान खोलने के बाद हरिप्रसाद बुरी तरह कर्ज में घिर गए थे और काफी परेशान थे। उनकी मौत के बाद ये सारी बातें सामने आ रही हैं। हालांकि चौबारी के दबंग का नाम सुसाइड या तहरीर में न होने से वह साफ बच गया है।