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‘भारत को विश्व गुरु बनाने का श्रेय कृषि तकनीक को’
सार
रुहेलखंड विश्वविद्यालय का 46वां स्थापना दिवस
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कार्यक्रम को संबोधित करते डॉ. प्रो. एमसी वार्ष्णेय।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
विस्तार
मुख्य अतिथि प्रो. एमसी वार्ष्णेय ने नई शिक्षा नीति को सराहा
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम, पुरस्कार पाकर खिले चेहरे
बरेली। ‘भारत को विश्व गुरु बनाने का श्रेय कृषि तकनीक को है, क्योंकि जब विश्व के बाकी देश वस्त्रों से अनभिज्ञ थे, उस दौर में भी भारत में उच्च गुणवत्ता के सूती, रेशमी वस्त्र बनते थे। विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय कामगारों से उनकी कला सीखी और फिर उन्हें नष्ट कर दिया। यह बातें गुजरात विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एमसी वार्ष्णेय ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 46वें स्थापना दिवस समारोह में कहीं।
सोमवार को मनाए गए स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. वार्ष्णेय और कुलपति प्रो केपी सिंह ने संयुक्त रूप से किया। कुलपति ने नई शिक्षा नीति और उसे क्रियान्वित करने में रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रो. वार्ष्णेय ने नई शिक्षा नीति पर बात रखी। कहा, इस नीति में अब कोई भी छात्र मनचाहे विषय लेकर स्नातक एवं परास्नातक की डिग्री ले सकता है। किन्हीं परिस्थितियों में अगर वह इसे पूरी नहीं कर पाता, तब भी एक वर्ष बाद उसे सर्टिफिकेट कोर्स की उपाधि मिलेगी। दो साल बाद डिप्लोमा और तीन या उससे अधिक समय गुजरने पर डिग्री प्राप्त होती है। इसे उन्होंने एंट्री एग्जिट पॉलिसी कहकर सराहा। उन्होंने वर्तमान में इसके सभी विश्वविद्यालयों में लागू होने पर छात्रों को इसके प्रति जागरूक करने का सुझाव दिया।
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शोध और स्टार्टअप से दूर होगी बेरोजगारी की समस्या
कुलपति प्रो. सिंह ने विश्वविद्यालय की ओर से स्थापित नए निकायों की जानकारी दी। इसमें अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के निदेशालय, विश्वविद्यालय परामर्श समिति, महिला अध्ययन उत्कृष्ट केंद्र, बहुभाषा उत्कृष्ट केंद्र, अटल सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पूर्व छात्र परिषद एलुमनाई एसोसिएशन, इनक्यूबेशन/इनोवेशन सेंटर, बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ, यूनिवर्सिटी इनोवेशन क्लब, डायरेक्टरेट ऑफ सोशल एंड कॉरपोरेट रिलेशंस, डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च, मीडिया सेल आदि के गठन आदि हैं। उन्होंने छात्रों को नौकरी खोजने के बजाय नौकरी देने वाला बनने का संकल्प दिलाया। कहा, शोध कार्य के जरिए नए पेटेंट कराएं और दूसरों को लाभान्वित करें। नया शोध और नई स्टार्टअप नीति से मंडल में बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो सकता है।
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प्रख्यात कृषि विशेषज्ञ हैं प्रो. वार्ष्णेय
स्थापना दिवस समारोह के मुख्य अतिथि रहे प्रोफेसर एमसी वार्ष्णेय गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति रह चुके हैं। उन्होंने गोकुलदास डिग्री कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की। कॅरियर की शुरूआत बदायूं के डिग्री कॉलेज से की। बाद में उनकी नियुक्ति गुजरात में एनआईआईटी में हो गई। इसके बाद वह गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति नियुक्त हुए। उन्होंने शोध कार्य बर्कले यूनिवर्सिटी अमरीका से पूरा किया वह भारत के नामचीन कृषि विशेषज्ञ हैं। समारोह में विशिष्ट अतिथि के तौर पर उनकी धर्मपत्नी तिलक वार्ष्णेय मौजूद रहीं।
बरेली दर्शन ने मोह लिया मन
स्थापना दिवस पर सांस्कृतिक कार्यक्त्रस्मों का आयोजन प्रो. आशा चौबे के निर्देशन में हुआ। उन्होंने बताया कि परिकल्पना, आयोजन दोनों स्तर पर समिति की सदस्य डॉ. रुचि द्विवेदी, कामिनी विश्वकर्मा, डॉ. कीर्ति प्रजापति का योगदान रहा। मेकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग की शिक्षिका शशिलता के निर्देशन में नृत्य और संगीत के अनूठे कार्यक्रम हुए। डॉ. चौबे की ओर से निर्देशित बरेली दर्शन ने समा बांध दिया। इसमें संगीत, नृत्य, ऑडियो-वीडियो के सामंजस्य से लोगों ने बरेली का दर्शन किया। संचालन में अतिथि शिक्षक नवनीत शुक्ला, युवांशी आर्य, भौतिक विज्ञान की छात्रा सुनैना सक्सेना ने सहयोग किया।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रही धूम, पुरस्कार पाकर खिले चेहरे बरेली। ‘भारत को विश्व गुरु बनाने का श्रेय कृषि तकनीक को है, क्योंकि जब विश्व के बाकी देश वस्त्रों से अनभिज्ञ थे, उस दौर में भी भारत में उच्च गुणवत्ता के सूती, रेशमी वस्त्र बनते थे। विदेशी आक्रांताओं ने भारतीय कामगारों से उनकी कला सीखी और फिर उन्हें नष्ट कर दिया। यह बातें गुजरात विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. एमसी वार्ष्णेय ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय के 46वें स्थापना दिवस समारोह में कहीं।
सोमवार को मनाए गए स्थापना दिवस समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि प्रो. वार्ष्णेय और कुलपति प्रो केपी सिंह ने संयुक्त रूप से किया। कुलपति ने नई शिक्षा नीति और उसे क्रियान्वित करने में रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। प्रो. वार्ष्णेय ने नई शिक्षा नीति पर बात रखी। कहा, इस नीति में अब कोई भी छात्र मनचाहे विषय लेकर स्नातक एवं परास्नातक की डिग्री ले सकता है। किन्हीं परिस्थितियों में अगर वह इसे पूरी नहीं कर पाता, तब भी एक वर्ष बाद उसे सर्टिफिकेट कोर्स की उपाधि मिलेगी। दो साल बाद डिप्लोमा और तीन या उससे अधिक समय गुजरने पर डिग्री प्राप्त होती है। इसे उन्होंने एंट्री एग्जिट पॉलिसी कहकर सराहा। उन्होंने वर्तमान में इसके सभी विश्वविद्यालयों में लागू होने पर छात्रों को इसके प्रति जागरूक करने का सुझाव दिया।
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शोध और स्टार्टअप से दूर होगी बेरोजगारी की समस्या
कुलपति प्रो. सिंह ने विश्वविद्यालय की ओर से स्थापित नए निकायों की जानकारी दी। इसमें अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के निदेशालय, विश्वविद्यालय परामर्श समिति, महिला अध्ययन उत्कृष्ट केंद्र, बहुभाषा उत्कृष्ट केंद्र, अटल सेंटर फॉर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, पूर्व छात्र परिषद एलुमनाई एसोसिएशन, इनक्यूबेशन/इनोवेशन सेंटर, बौद्धिक संपदा अधिकार प्रकोष्ठ, यूनिवर्सिटी इनोवेशन क्लब, डायरेक्टरेट ऑफ सोशल एंड कॉरपोरेट रिलेशंस, डायरेक्टरेट ऑफ रिसर्च, मीडिया सेल आदि के गठन आदि हैं। उन्होंने छात्रों को नौकरी खोजने के बजाय नौकरी देने वाला बनने का संकल्प दिलाया। कहा, शोध कार्य के जरिए नए पेटेंट कराएं और दूसरों को लाभान्वित करें। नया शोध और नई स्टार्टअप नीति से मंडल में बेरोजगारी की समस्या का समाधान हो सकता है।
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