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बरेली के एसएसपी, जेल अधीक्षक सात को कोर्ट में तलब
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
Updated Tue, 01 May 2018 02:08 AM IST
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न्यायालय के आदेश के बावजूद चोरी के एक मामले में आरोपी ऋषि पाल उर्फ बर्रैया को 20 माह तक कोर्ट में पेश न करने को कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। मानवाधिकार न्यायालय के जज सतीश शुक्ला ने इसे प्रथम दृष्टया मानव अधिकारों का उल्लंघन मानते हुए बरेली के तत्कालीन कारागार अधीक्षक और एसएसपी को नोटिस जारी कर सात मई 2018 को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब कर कारण बताने का आदेश दिया है।
ऋषि पाल उर्फ बर्रैया के खिलाफ थाना जहानाबाद में चोरी का मामला दर्ज हुआ था। उस पर बरेली जिले में भी अन्य मामले विचाराधीन हैं। चोरी के ही एक मामले में वह बरेली जेल में था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीलीभीत की अदालत ने कारागार अधीक्षक बरेली को पिछले साल पत्र भेजकर आदेश दिया कि ऋषि पाल को न्यायालय में पेश करें, लेकिन कई तारीखें लगने के बावजूद अधीक्षक जिला कारागार बरेली ने उसे कोर्ट में पेश नहीं कराया। इस पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कारागार अधीक्षक बरेली को कोर्ट में तलब किया। कारागार अधीक्षक कोर्ट में स्वयं उपस्थित नहीं हुए। उन्होंने 10 अप्रैल 2018 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लिखित रिपोर्ट दी कि एसएसपी बरेली ने पुलिस बल मुहैया नहीं कराया, लिहाजा आरोपी को कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। आरोपी को पेश न करने के कारण करीब 20 माह तक मामले की सुनवाई बाधित रही। साथ ही आरोपी के मानव अधिकारों का भी उल्लंघन हुआ। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सारा प्रकरण मानव अधिकार न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक के पीठासीन अधिकारी संजीव शुक्ला की अदालत में प्रेषित कर दिया। जज संजीव शुक्ला ने सोमवार को बरेली के एसएसपी और जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात मई 2018 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में तलब किया है।
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ऋषि पाल उर्फ बर्रैया के खिलाफ थाना जहानाबाद में चोरी का मामला दर्ज हुआ था। उस पर बरेली जिले में भी अन्य मामले विचाराधीन हैं। चोरी के ही एक मामले में वह बरेली जेल में था। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पीलीभीत की अदालत ने कारागार अधीक्षक बरेली को पिछले साल पत्र भेजकर आदेश दिया कि ऋषि पाल को न्यायालय में पेश करें, लेकिन कई तारीखें लगने के बावजूद अधीक्षक जिला कारागार बरेली ने उसे कोर्ट में पेश नहीं कराया। इस पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए कारागार अधीक्षक बरेली को कोर्ट में तलब किया। कारागार अधीक्षक कोर्ट में स्वयं उपस्थित नहीं हुए। उन्होंने 10 अप्रैल 2018 को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में लिखित रिपोर्ट दी कि एसएसपी बरेली ने पुलिस बल मुहैया नहीं कराया, लिहाजा आरोपी को कोर्ट में पेश नहीं किया जा सका। आरोपी को पेश न करने के कारण करीब 20 माह तक मामले की सुनवाई बाधित रही। साथ ही आरोपी के मानव अधिकारों का भी उल्लंघन हुआ। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सारा प्रकरण मानव अधिकार न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर एक के पीठासीन अधिकारी संजीव शुक्ला की अदालत में प्रेषित कर दिया। जज संजीव शुक्ला ने सोमवार को बरेली के एसएसपी और जेल अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात मई 2018 को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में तलब किया है।
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