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अदालत से खिलवाड़, पड़ा 10 हजार का जुर्माना
बरेली
Updated Thu, 08 Jan 2015 01:21 AM IST
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सरकारी कार्रवाई को बाधित करने भर के लिए अदालत में मुकदमा दायर करना कमल टॉकीज प्रबंधन को भारी पड़ा है। अपर लघुवाद न्यायाधीश शक्ति सिंह ने नगर निगम के टैक्स के खिलाफ मुकदमा दायर करने और फिर पैरवी न करने पर कमल टॉकीज पर 10 हजार रुपये का जुर्मानाया लगाया है।
कमल टाकीज की ओर से उसके प्रोपराइटर सिविल लाइंस निवासी चेतन मेहरा ने अदालत में 11 मई 2006 को टैक्स अपील दाखिल की थी। चेतन के अनुसार नगर निगम ने कमल टॉकीज पर 22 हजार 220 रुपये के स्थान पर 1 लाख 97 हजार 90 रुपये का टैक्स लगा दिया था। इसे उन्होंने अनुचित वृद्धि बताया था। अदालत की ओर से नोटिस जारी होने के बाद नगर निगम की तरफ से उसके अधिवक्ता अदालत में हाजिर हुए। सुनवाई की अगली तारीखों पर भी आते रहे लेकिन चेतन मेहरा अदालत में हाजिर नहीं हुए। अदालत ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया तो वह हाजिर हुए लेकिन अपील में न बहस की न स्थगन की कोई अर्जी दी। इससे पहले भी चेतन मेहरा अदालत में 28 जनवरी 2009 से लेकर 21 नवंबर 2011 तक अदालत में गैरहाजिर रहे। अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रामेश्वरी देवी बनाम अन्य में पारित विधि व्यवस्था का उदाहरण देते हुए चेतन मेहरा की अपील को खारिज करते हुए उनस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
कर निर्धारण संबंधी आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर करने और फिर निष्क्रिय हो जाने के फलस्वरूप जहां एक ओर न्यायालय का बहुमूल्य समय हुआ है वहीं दूसरी ओर कर वसूली की कार्यवाही भी अपील दायर होने के कारण बाधित रही है। - शक्ति सिंह अपर लघुवाद न्यायाधीश।
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कमल टाकीज की ओर से उसके प्रोपराइटर सिविल लाइंस निवासी चेतन मेहरा ने अदालत में 11 मई 2006 को टैक्स अपील दाखिल की थी। चेतन के अनुसार नगर निगम ने कमल टॉकीज पर 22 हजार 220 रुपये के स्थान पर 1 लाख 97 हजार 90 रुपये का टैक्स लगा दिया था। इसे उन्होंने अनुचित वृद्धि बताया था। अदालत की ओर से नोटिस जारी होने के बाद नगर निगम की तरफ से उसके अधिवक्ता अदालत में हाजिर हुए। सुनवाई की अगली तारीखों पर भी आते रहे लेकिन चेतन मेहरा अदालत में हाजिर नहीं हुए। अदालत ने उनके खिलाफ नोटिस जारी किया तो वह हाजिर हुए लेकिन अपील में न बहस की न स्थगन की कोई अर्जी दी। इससे पहले भी चेतन मेहरा अदालत में 28 जनवरी 2009 से लेकर 21 नवंबर 2011 तक अदालत में गैरहाजिर रहे। अदालत ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा रामेश्वरी देवी बनाम अन्य में पारित विधि व्यवस्था का उदाहरण देते हुए चेतन मेहरा की अपील को खारिज करते हुए उनस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया।
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कर निर्धारण संबंधी आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर करने और फिर निष्क्रिय हो जाने के फलस्वरूप जहां एक ओर न्यायालय का बहुमूल्य समय हुआ है वहीं दूसरी ओर कर वसूली की कार्यवाही भी अपील दायर होने के कारण बाधित रही है। - शक्ति सिंह अपर लघुवाद न्यायाधीश।
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