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कोर्ट ने नहीं माना दुष्कर्म का मामला, कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष का भाई छूटा

Thu, 27 Feb 2020 12:09 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 27 Feb 2020 12:09 AM IST
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Court did not accept the case of rape, brother of Cantt board vice president
कैंटोनमैंट बोर्ड - फोटो : अमर उजाला, बरेली

कोर्ट ने विवेचक से किया सवाल, इतने साल से खामोश क्यों थी पीड़ित

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बरेली। दुष्कर्म और नौकरी के नाम पर 15 लाख की ठगी के मामले में फंसे कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष शिखा नायर के भाई अनिल चौहान को फिलहाल संजीवनी मिल गई है। पुलिस अनिल को जेल भेजने की तैयारी में ले गई तो कोर्ट ने इसे दुष्कर्म का मामला न मानकर रिमांड ही नहीं दी। पीड़ित के आरोपों पर गढ़ी पुलिस की थ्योरी कोर्ट की दलीलों के सामने फेल नजर आई तो आरोपी को छोड़ना पड़ा। अब उस पर केवल धोखाधड़ी और अमानत में खयानत के आधार पर ही कार्र्रवाई की जा सकेगी।
सुभाष नगर क्षेत्र की एक युवती ने अनिल चौहान पर उसे कैंट बोर्ड के स्कूल में शिक्षक की नौकरी दिलाने के बहाने 15 लाख रुपये की ठगी और होटल में ले जाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। घटनाक्रम में शामिल बताकर शिखा नायर, उनके पति अनिल नायर व सचदेव मिश्रा के खिलाफ भी रिपोर्ट कराई थी। एक दिसंबर को दर्ज मामले के बाद से युवती कार्रवाई के लिए अधिकारियों के यहां भटक रही थी। सोमवार को युवती ने एसएसपी दफ्तर में एसपी सिटी रवींद्र कुमार के सामने कैंट पुलिस पर आरोपियों की गिरफ्तारी न करने का आरोप लगाया। एक मंत्री का पर भी निशाना साधा कि पुलिस आरोपियों को पकड़कर लाती है तो वह छुड़वा देते हैं। इसके बाद कैंट पुलिस ने अनिल चौहान को पकड़ लिया। बुधवार को उसे जेल भेजा गया तो कानूनी अड़चन का पेंच फंस गया। पुलिस के मुताबिक कोर्ट ने इसे सीधे तौर पर दुष्कर्म का मामला न मानते हुए 9 सेक्सुअल असाल्ट का मामला माना और रिमांड से इंकार कर दिया। बाकी धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में रिमांड की स्थिति न होने पर अनिल को जेल भेजना संभव नहीं था तो उसे छोड़ दिया गया।
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शिखा और पति को भी क्लीनचिट की तैयारी

कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष शिखा नायर व एक सभासद के बीच राजनैतिक वर्चस्व की जंग में एकदूसरे के खिलाफ कई केस दर्ज हो चुके हैं। करीब ढाई साल बाद उखड़े इस केस को भी इसी की अगली कड़ी माना जा रहा था। हालांकि अनिल चौहान के खिलाफ रुपये लेनदेन के पर्याप्त साक्ष्य युवती पुलिस को सौंप चुकी है। पुलिस इस मामले में अभी तक शिखा व उनके पति को निर्दोष मान रही है। इंस्पेक्टर धर्मेंद्र सिंह के मुताबिक अभी दोनों के खिलाफ साक्ष्य नहीं मिल सके हैं पर विवेचना अभी जारी है। बताया कि चौथे आरोपी सचदेव मिश्रा को आरोपी मानकर तलाश की जा रही है। उसने एक बार युवती को दिल्ली से अधिकारी बनकर कॉल की थी। इसका रिकार्ड मिल चुका है।
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