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शास्त्री मार्केट बुरी तरह जर्जर पर निगम के अफसर बेखबर

Mon, 04 Oct 2021 02:32 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 04 Oct 2021 02:32 AM IST
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Corporation officials oblivious to Shastri market badly shabby
जर्जर हालत में शास्त्री मार्केट।

लिंटर में हो गए छेद, बाहर आया सरिया का जाल, छूटकर गिरता रहता है प्लास्टर

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बरेली। जर्जर इमारतों को अक्सर नोटिस देने वाला नगर निगम खुद अपने शास्त्री मार्केट की हालत से बेखबर है। करीब 66 साल पुराने इस मार्केट की इमारत इस कदर जर्जर हो गई है कि लिंटर में छेद हो गए हैं और पिलर की सरिया भी बाहर निकल आई हैं। छत में प्लास्टर की जगह सरियों का जाल दिखने लगा है, प्लास्टर भी टूटकर गिर रहा है।
शास्त्री मार्केट दवा कारोबार के लिए जाना जाता है, इसके अलावा यहां होजरी और क्रॉकरी की भी दुकानें हैं। यह पूरी इमारत इतनी बुरी तरह जर्जर हो चुकी है कि बाजार में आते-जाते भी डर लगता है। लिंटर में कई छेद हो गए हैं। नीचे से छत में प्लास्टर के बजाय सरियों का पूरा जाल दिखाई देता है। सीढ़िया टूटी हुई हैं। व्यापारियों का कहना है कि वे नगर निगम को 70 हजार रुपये बतौर किराया हर महीने देते हैं। निगम के अफसरों के अलावा कई बार मेयर से भी मिल चुके हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। मार्केट में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बाद भी नगर निगम के अफसर व्यापारियों की सुनने को तैयार नहीं हैं।
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शास्त्री मार्केट की स्थिति के बारे में पता नहीं है। इसे दिखवाएंगे और नगर निगम के स्तर से जो भी सुधार हो सकता है, उसे कराया जाएगा। व्यापारियों से भी सहयोग लिया जाएगा। -अभिषेक आनंद, नगर आयुक्त
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हादसा न करा दे अफसरों की बेपरवाही

बाजार करीब 70 हजार रुपये का किराया हर महीने नगर निगम को दे रहा है। हम लोग दुकानों की मरम्मत करा लेंगे। हमारी मांग है कि मार्केट के हॉल, छज्जे, सीढ़ियां जैसे जो खुले हिस्से हैं, कम से कम निगम उन्हीं की मरम्मत करा दे। इनसे रोज प्लास्टर गिरता है। -राजेश छाबड़ा, अध्यक्ष शास्त्री मार्केट एसोसिएशन


बाजार में दुकानों की स्थिति बहुत खराब है। मार्केट बहुत पुराना हो गया है। यहां शौचालय तक नहीं था। दुकानदारों ने आपसी सहयोग से हाल ही में तीन शौचालयों का निर्माण कराया है। यदि यही हाल रहा तो बाजार में किसी दिन बड़ा हादसा हो जाएगा। - मनोज कुमार अरोड़ा, व्यापारी

बाजार के कई हिस्से इतने जर्जर हैं कि कई बार उनके गिरने का खतरा महसूस होता है। हम व्यापारी ही अलग-अलग हिस्सों की मरम्मत कराते रहते हैं। इसे नगर निगम हमारी मजबूरी समझ रहा है। मरम्मत कराने के लिए उल्टे नगर निगम की अनुमति लेनी पड़ती है। -सुशील कुमार, व्यापारी

मार्केट की मरम्मत कराने के लिए हम व्यापारी एक बार नहीं, कई बार नगर निगम अफसरों के चक्कर काट चुके हैं। शासन स्तर पर भी लिखापढ़ी कर चुके हैं। ये सभी दस्तावेज हमारे पास सुरक्षित रखे हैं। मना कोई नहीं करता है लेकिन आज तक कुछ कराया किसी ने नहीं। -सुनील भसीन, व्यापारी

नगर निगम की प्रापर्टी है, रखरखाव की जिम्मेदारी उसी की है। इसी आस से हम नगर निगम से गुहार लगाते रहते हैं लेकिन उसके अफसरों का रवैया देखकर लगता है कि वे किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं। भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी हादसा हो सकता है। -बलदेव नागपाल, व्यापारी


हम सभी व्यापारियों की सिर्फ एक ही मांग है कि मार्केट की मरम्मत नगर निगम करा दे। जो स्थिति है, वह बेहद खराब है। मार्केट की सीढ़ियां, लिंटर, पिलर, छज्जे और रेलिंग हादसे को दावत दे रहे हैं। किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा यहां हो सकता है। -दीपक अरोड़ा, व्यापारी

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