{"_id":"5fb19c445b68290bd72afec7","slug":"corona-raises-jobs-in-nursery-of-medicinal-plants","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना ने जगाई औषधीय पौधों की नर्सरी में रोजगार की संभावनाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना ने जगाई औषधीय पौधों की नर्सरी में रोजगार की संभावनाएं
Mon, 16 Nov 2020 02:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
अमर उजाला नेटवर्क, बरेली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 16 Nov 2020 02:53 AM IST
विज्ञापन
Medicinal Plants
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
औषधीय पौधों का बाजार वैसे तो कई सालों से लगातार ऊपर जा रहा है लेकिन कोरोना के दौर में यह मार्केट सबसे ऊपर निकल गया है। औषधीय पौधों की मांग लगातार बढ़ रही है लिहाजा आईवीआरआई के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से उन लोगों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए गए हैं जो औषधीय पौधों की नर्सरी तैयार करना चाहते हैं। आईवीआरआई के वैज्ञानिकों का कहना है कि औषधीय पौधों की नर्सरी रोजगार की भी तमाम संभावनाएं पैदा कर रही है।
विज्ञापन
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. रंजीत सिंह का कहना है कि जिन किसानों ने पहले पारंपरिक फसल चक्र अपनाया हुआ था, वे अब धीरे-धीरे फलों के बाग के साथ औषधीय खेती की तरफ बढ़ने लगे हैं। कोरोना की वजह से भी औषधीय पौधों की खेती और नर्सरी विकसित करने की लालसा बढ़ी है। उन्होंने बताया कि बरेली से सटे गांव सैदपुर हाकिंस में बी औषधीय पौधों की करीब 40 नर्सरी हैं। इसी तरह फर्रुखाबाद के कायमगंज इलाके में भी लगभग 60 नर्सरी हैं जहां से बड़े पैमाने पर दूर-दूर तक पौधे भेजे जाते हैं। इसके अलावा गढ़ मुक्तेश्वर, गजरौला, भीमताल आदि इलाकों में भी नर्सरी एक कारोबार का रूप ले चुकी है।
विज्ञापन
एक सामान्य नर्सरी में लगभग 40 फलदार श्रेणी के पौधे और उनकी लगभग 2000 प्रजातियां उपलब्ध रह सकती हैं। औषधीय पौधों की भी मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। तुलसी, स्टीविया, एलोवेरा, अश्वगंधा, सर्पगंधा, गिलोय आदि के लगभग 100 प्रकार के औषधीय पौधों की नर्सरी तैयार करके अच्छी आय अर्जित की जा सकती है। छोटे स्टार्टअप के तौर पर नर्सरी शुरू करने के लिए सरकार की ओर से भी कई स्कीम शुरू की गई हैं। बैंकों से ऋण सुविधा भी ली जा सकती है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि ग्रामीण युवा नर्सरी व्यवसाय को अपनाकर स्वरोजगार के साथ-साथ अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। नर्सरी व्यवसाय के लिए विभिन्न कृषि विज्ञान केंद्रों में प्रशिक्षण दिया जाता है। कृषि विश्वविद्यालयों में भी प्रशिक्षण होते रहते हैं। इसके अलावा कई संस्थाएं ऑनलाइन प्रशिक्षण भी देती हैं।
नर्सरी कारोबार के लिए बढ़ रही हैं संभावनाएं
डॉ. रंजीत सिंह का कहना है कि होटल, मॉल, व्यापारिक प्रतिष्ठान जैसी जगहों पर गार्डन विकसित करने का भी चलन है लिहाजा फल-फूल, सजावटी पौधों, औषधीय व सुगंधीय पौधों की नर्सरी के कारोबार की संभावनाएं बहुत तेजी से बढ़ रही हैं। सड़क, हाईवे और एक्सप्रेस वे के किनारे और शहरों के आसपास नर्सरी खोलना काफी लाभदायक हो चुका है। नर्सरी में पौधे तैयार करना, टिश्यु कल्चर लैब बनाकर लाखों पौधे तैयार करना, लॉन की घास, गमलों की खाद और पैकिंग सामग्री बेचने जैसे कामों को रोजगार के अच्छे अवसर के तौर पर देखा जा सकता है।