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कोरोना हुआ बेकाबू, शासन ने बरेली को किया अतिसंवेदनशील घोषित
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Corona in india
- फोटो : पीटीआई
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प्रदेश के सात अतिसंवेदनशील जिलों की सूची में किया शामिल
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एल-2, एल-3 कोविड अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के निर्देश
बरेली। कोविड-19 की समीक्षा कर बरेली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सात जिलों को संक्रमण की तेजी से बढ़ रही रफ्तार को देखते हुए अतिसंवेदनशील घोषित कर दिया है। इसमें बरेली का चौथा स्थान है। पहले नंबर पर लखनऊ, दूसरे पर कानपुर नगर और तीसरे पर प्रयागराज है। मुख्यमंत्री ने डीएम और सीएमओ को विशेष सतर्कता बरतने के साथ ही, एल-2 और एल-3 कोविड अस्पतालों और सैंपलिंग की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद की ओर से रविवार को जारी सर्कुलर के मुताबिक लोक भवन के मीडिया सेंटर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए प्रदेश के सात जिलों, लखनऊ, कानपुर नगर, प्रयागराज, बरेली, गोरखपुर, झांसी और वाराणसी को अतिसंवेदनशील घोषित कर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए है। सैंपलिंग की तादाद बढ़ाने के साथ ही बरेली में तीन सौ बेड अस्पताल को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने, संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने, कोरोना कमांड एवं कंट्रोल सेंटर को प्रभावी बनाने, मेडिकल कॉलेज में आईसीयू बेड की संख्या दोगुनी करने, होम आइसोलेशन समेत अस्पतालों में आइसोलेट मरीजों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने, इलाज में कोताही न बरतने और शिकायत मिलने पर प्रभावी कार्रवाई करने, सैनिटाइजेशन और सुविधाएं मुहैया कराने में तेजी लाने के डीएम और सीएमओ को आदेश दिए हैं। साथ ही, प्रतिदिन शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है।
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निजी अस्पतालों में अपने खर्च पर इलाज करा सकेंगे संक्रमित
शासन से निर्देश मिलने के बाद एल-2 अस्पतालों की तादाद बढ़ाने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। राजेंद्रनगर, सिविल लाइंस, स्टेडियम रोड, डेलापीर चौराहा और पीलीभीत बाईपास स्थित अस्पतालों को कोरोना के निजी खर्च पर इलाज के लिए एल-2 कोविड अस्पताल बनाया जाना प्रस्तावित है। डीएम के मुताबिक, कोविड अस्पताल बनाए जाने से पहले अस्पताल संचालकों के साथ बैठक की जाएगी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल का निरीक्षण करेगी।
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स्टाफ और संसाधनों की कमी दूर करेगा शासन
बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने में तमाम अड़चनें आ रही हैं। इसे देखते हुए शासन ने डीएम और सीएमओ से संबंधित वांछित संसाधनों का ब्योरा मांगा है। ताकि जल्द से जल्द मुहैया कराकर कोरोना संक्रमियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें। इस बाबत डीएम ने सीएमओ से अस्पताल संचालन के लिए स्टाफ और संसाधनों की जानकारी मांगी है, ताकि शासन को रिपोर्ट भेजी जा सके।
तीन सौ बेड अस्पताल को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने के साथ ही वहां एल-2 स्तर की सभी सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश शासन ने दिए हैं। मुख्यमंत्री समीक्षा बैठक में अफसरों ने इसकी हामी तो भर दी, लेकिन जब संसाधन परखे तो तमाम खामियां दिखाई दीं। दो साल पहले जब मलेरिया का कहर था, उस समय तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने 300 बेड अस्पताल को तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया था, लेकिन अस्पताल चालू नहीं हो सका। अब जब कोरोना महामारी के समय जरूरत पड़ी तो आधी-अधूरी तैयारी के साथ अस्पताल चालू कर दिया गया, लेकिन इसमें कोविड-19 एल-2 स्तर की चिकित्सा व्यवस्था शुरू करने में तमाम मुश्किलें हैं। बता दें कि तीन सौ बेड अस्पताल के भवन को राजकीय निर्माण निगम ने अभी तक स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित नहीं किया है।
चिकित्सक और प्रशिक्षित स्टाफ का टोटा
अस्पताल संचालन के लिए स्टाफ पहली प्राथमिकता है। सीएमओ के मुताबिक, स्वीकृत पदों के सापेक्ष करीब 50 फीसदी पद फिलहाल खाली हैं। वहीं, बिना प्रशिक्षित स्टाफ के अस्पताल का संचालन हो ही नहीं सकता है, क्योंकि एल-2 कोविड अस्पताल में संक्रमितों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित स्टाफ का होना जरूरी है। हालांकि, शासन ने अबकी बार डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ देने का आश्वासन दिया है।
निजी चिकित्सकों का भी लिया जाएगा सहयोग
कोरोना महामारी में डेडिकेटेड कोविड अस्पताल संचालन में आ रही स्टाफ की कमी को लेकर निजी चिकित्सकों का सहयोग लेने की तैयारी प्रशासन कर रहा है। डीएम नितीश कुमार के मुताबिक, डेडिकेटेड कोविड अस्पताल के संचालन को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए निजी चिकित्सकों का भी सहयोग लिया जाएगा। आईएमए और निजी अस्पताल के संचालकों के साथ इस बाबत जल्द बैठक की जाएगी।
आईसीयू संचालन के दावे भी हवाहवाई
जिला अस्पताल में तीन साल पहले आईसीयू संचालन के लिए विधान परिषद सदस्य और शायर वसीम बरेलवी ने दो वेंटिलेटर अपनी निधि से दिए थे। मगर प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में उनका संचालन नहीं हो सका है। दो साल से चल रही कवायद के बाद भी अब तक कोई अफसर वेंटिलेटर का संचालन कब तक हो सकेगा, इसका जवाब नहीं दे पा रहा है। ऐसे में तीन सौ बेड अस्पताल शुरू होगा इस पर संशय है।
संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए शासन से मिले आदेशों का पालन किया जा रहा है। डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने में स्टाफ की कमी सामने आ रही है। अगर जरूरत पड़ी तो निजी चिकित्सकों का भी सहयोग लिया जाएगा। जो समस्याएं हैं, उसकी सूचना शासन को भेजी जा रही है। - नितीश कुमार, डीएम
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एल-2, एल-3 कोविड अस्पतालों की संख्या बढ़ाने के निर्देश बरेली। कोविड-19 की समीक्षा कर बरेली से लौटने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सात जिलों को संक्रमण की तेजी से बढ़ रही रफ्तार को देखते हुए अतिसंवेदनशील घोषित कर दिया है। इसमें बरेली का चौथा स्थान है। पहले नंबर पर लखनऊ, दूसरे पर कानपुर नगर और तीसरे पर प्रयागराज है। मुख्यमंत्री ने डीएम और सीएमओ को विशेष सतर्कता बरतने के साथ ही, एल-2 और एल-3 कोविड अस्पतालों और सैंपलिंग की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित मोहन प्रसाद की ओर से रविवार को जारी सर्कुलर के मुताबिक लोक भवन के मीडिया सेंटर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संक्रमण के लगातार बढ़ रहे मामलों को देखते हुए प्रदेश के सात जिलों, लखनऊ, कानपुर नगर, प्रयागराज, बरेली, गोरखपुर, झांसी और वाराणसी को अतिसंवेदनशील घोषित कर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए है। सैंपलिंग की तादाद बढ़ाने के साथ ही बरेली में तीन सौ बेड अस्पताल को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने, संक्रमितों को अस्पताल पहुंचाने, कोरोना कमांड एवं कंट्रोल सेंटर को प्रभावी बनाने, मेडिकल कॉलेज में आईसीयू बेड की संख्या दोगुनी करने, होम आइसोलेशन समेत अस्पतालों में आइसोलेट मरीजों की प्रतिदिन मॉनिटरिंग करने, इलाज में कोताही न बरतने और शिकायत मिलने पर प्रभावी कार्रवाई करने, सैनिटाइजेशन और सुविधाएं मुहैया कराने में तेजी लाने के डीएम और सीएमओ को आदेश दिए हैं। साथ ही, प्रतिदिन शासन को रिपोर्ट भेजने के लिए कहा है।
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निजी अस्पतालों में अपने खर्च पर इलाज करा सकेंगे संक्रमित
शासन से निर्देश मिलने के बाद एल-2 अस्पतालों की तादाद बढ़ाने के लिए प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। राजेंद्रनगर, सिविल लाइंस, स्टेडियम रोड, डेलापीर चौराहा और पीलीभीत बाईपास स्थित अस्पतालों को कोरोना के निजी खर्च पर इलाज के लिए एल-2 कोविड अस्पताल बनाया जाना प्रस्तावित है। डीएम के मुताबिक, कोविड अस्पताल बनाए जाने से पहले अस्पताल संचालकों के साथ बैठक की जाएगी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम अस्पताल का निरीक्षण करेगी।
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स्टाफ और संसाधनों की कमी दूर करेगा शासन
बरेली। तीन सौ बेड अस्पताल को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने में तमाम अड़चनें आ रही हैं। इसे देखते हुए शासन ने डीएम और सीएमओ से संबंधित वांछित संसाधनों का ब्योरा मांगा है। ताकि जल्द से जल्द मुहैया कराकर कोरोना संक्रमियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें। इस बाबत डीएम ने सीएमओ से अस्पताल संचालन के लिए स्टाफ और संसाधनों की जानकारी मांगी है, ताकि शासन को रिपोर्ट भेजी जा सके।तीन सौ बेड अस्पताल को डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने के साथ ही वहां एल-2 स्तर की सभी सुविधाएं मुहैया कराने के निर्देश शासन ने दिए हैं। मुख्यमंत्री समीक्षा बैठक में अफसरों ने इसकी हामी तो भर दी, लेकिन जब संसाधन परखे तो तमाम खामियां दिखाई दीं। दो साल पहले जब मलेरिया का कहर था, उस समय तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री ने 300 बेड अस्पताल को तत्काल शुरू करने का निर्देश दिया था, लेकिन अस्पताल चालू नहीं हो सका। अब जब कोरोना महामारी के समय जरूरत पड़ी तो आधी-अधूरी तैयारी के साथ अस्पताल चालू कर दिया गया, लेकिन इसमें कोविड-19 एल-2 स्तर की चिकित्सा व्यवस्था शुरू करने में तमाम मुश्किलें हैं। बता दें कि तीन सौ बेड अस्पताल के भवन को राजकीय निर्माण निगम ने अभी तक स्वास्थ्य विभाग को हस्तांतरित नहीं किया है।
चिकित्सक और प्रशिक्षित स्टाफ का टोटा
अस्पताल संचालन के लिए स्टाफ पहली प्राथमिकता है। सीएमओ के मुताबिक, स्वीकृत पदों के सापेक्ष करीब 50 फीसदी पद फिलहाल खाली हैं। वहीं, बिना प्रशिक्षित स्टाफ के अस्पताल का संचालन हो ही नहीं सकता है, क्योंकि एल-2 कोविड अस्पताल में संक्रमितों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित स्टाफ का होना जरूरी है। हालांकि, शासन ने अबकी बार डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ देने का आश्वासन दिया है।निजी चिकित्सकों का भी लिया जाएगा सहयोग
कोरोना महामारी में डेडिकेटेड कोविड अस्पताल संचालन में आ रही स्टाफ की कमी को लेकर निजी चिकित्सकों का सहयोग लेने की तैयारी प्रशासन कर रहा है। डीएम नितीश कुमार के मुताबिक, डेडिकेटेड कोविड अस्पताल के संचालन को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए निजी चिकित्सकों का भी सहयोग लिया जाएगा। आईएमए और निजी अस्पताल के संचालकों के साथ इस बाबत जल्द बैठक की जाएगी।आईसीयू संचालन के दावे भी हवाहवाई
जिला अस्पताल में तीन साल पहले आईसीयू संचालन के लिए विधान परिषद सदस्य और शायर वसीम बरेलवी ने दो वेंटिलेटर अपनी निधि से दिए थे। मगर प्रशिक्षित स्टाफ के अभाव में उनका संचालन नहीं हो सका है। दो साल से चल रही कवायद के बाद भी अब तक कोई अफसर वेंटिलेटर का संचालन कब तक हो सकेगा, इसका जवाब नहीं दे पा रहा है। ऐसे में तीन सौ बेड अस्पताल शुरू होगा इस पर संशय है।संक्रमण का फैलाव रोकने के लिए शासन से मिले आदेशों का पालन किया जा रहा है। डेडिकेटेड कोविड अस्पताल बनाने में स्टाफ की कमी सामने आ रही है। अगर जरूरत पड़ी तो निजी चिकित्सकों का भी सहयोग लिया जाएगा। जो समस्याएं हैं, उसकी सूचना शासन को भेजी जा रही है। - नितीश कुमार, डीएम