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गुस्ल और इबादत में महकता है कन्नौज का इत्र
बरेली।
Updated Wed, 15 Nov 2017 01:58 AM IST
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गुस्ल और इबादत में महकता है कन्नौज का इत्र
उर्स के मेले में लगे इत्र के स्टालों पर है इसकी बेहद मांग
ग्राहक मांग रहे सफेद ऊद, इत्र समामा, कस्तूरी, व्हाइट मस्क
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
उर्स में तमाम चीजों के छोटे-बड़े स्टाल लगे हैं। हर स्टाल पर भीड़ भी खूब है। इन सब के बीच कन्नौज के इत्र की महक फैली है। मेले में आ रहे जायरीन गुस्ल और इबादत के लिए तरह-तरह की बेहतरीन खुशबू वाले इत्र खरीदकर ले जा रहे हैं। कन्नौज से आए ज्यादातर दुकानदार ग्राहकों की डिमांड को ध्यान में रखकर ही इत्र की वैरायटी लेकर आए हैं।
इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर लगे मेला में इत्र की करीब सौ दुकानें लगी हैं। सभी पर कन्नौज के बेहतरीन इत्र हैं। दूर-दूर से आए जायरीन विशेष तौर पर सफेद ऊद, इत्र समामा, कस्तूरी, व्हाइट मस्क, दाना इत्र आदि की मांग रहे हैं। कन्नौज से दुकान लेकर आए अब्दुर्रहमान ने बताया वह यहां चार साल से आ रहे हैं। तमाम जगह उर्स के मेलों में दुकान लगाते हैं। उनके पास इन इत्रों के अलावा हिना, गुलाब, केबड़ा, मोतिया, चमेली, बेला, रातरानी, खस, कालाभूत आदि भी हैं। अलसऊद, एस्टीन और मीना कंपनी के इत्र की भी डिमांड है। तीन दिन में बढ़िया कारोबार हो जाता है। गुलाब, बेला, संदल, सफेद ऊद आदि कुछ इत्र ऐसे हैं, जो गर्मियों में इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें फोड़े-फुंसी और जले कटे पर भी लगा लिया जाता है। वहीं इत्र समामा, व्हाइट मस्क और कस्तूरी इत्र सर्दी के लिए अच्छा होता है। इसके इस्तेमाल से सर्दी-जुकाम नहीं होता है।
नमाज-पूजा में इस्तेमाल होता है इत्र
कन्नौज से आए आलम ने बताया कि इत्र नमाज, इबादत और पूजा में इस्तेमाल होता है। ऐसा इसलिए कि इसमें अल्कोहल नहीं होता है, जबकि परफ्यूम में अल्कोहल होता है। उसे इबादत में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। वह केवल लगाने के लिए होता है।
उर्स के मेले में लगे इत्र के स्टालों पर है इसकी बेहद मांग
ग्राहक मांग रहे सफेद ऊद, इत्र समामा, कस्तूरी, व्हाइट मस्क
अमर उजाला ब्यूरो
बरेली।
उर्स में तमाम चीजों के छोटे-बड़े स्टाल लगे हैं। हर स्टाल पर भीड़ भी खूब है। इन सब के बीच कन्नौज के इत्र की महक फैली है। मेले में आ रहे जायरीन गुस्ल और इबादत के लिए तरह-तरह की बेहतरीन खुशबू वाले इत्र खरीदकर ले जा रहे हैं। कन्नौज से आए ज्यादातर दुकानदार ग्राहकों की डिमांड को ध्यान में रखकर ही इत्र की वैरायटी लेकर आए हैं।
इस्लामिया इंटर कॉलेज मैदान पर लगे मेला में इत्र की करीब सौ दुकानें लगी हैं। सभी पर कन्नौज के बेहतरीन इत्र हैं। दूर-दूर से आए जायरीन विशेष तौर पर सफेद ऊद, इत्र समामा, कस्तूरी, व्हाइट मस्क, दाना इत्र आदि की मांग रहे हैं। कन्नौज से दुकान लेकर आए अब्दुर्रहमान ने बताया वह यहां चार साल से आ रहे हैं। तमाम जगह उर्स के मेलों में दुकान लगाते हैं। उनके पास इन इत्रों के अलावा हिना, गुलाब, केबड़ा, मोतिया, चमेली, बेला, रातरानी, खस, कालाभूत आदि भी हैं। अलसऊद, एस्टीन और मीना कंपनी के इत्र की भी डिमांड है। तीन दिन में बढ़िया कारोबार हो जाता है। गुलाब, बेला, संदल, सफेद ऊद आदि कुछ इत्र ऐसे हैं, जो गर्मियों में इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्हें फोड़े-फुंसी और जले कटे पर भी लगा लिया जाता है। वहीं इत्र समामा, व्हाइट मस्क और कस्तूरी इत्र सर्दी के लिए अच्छा होता है। इसके इस्तेमाल से सर्दी-जुकाम नहीं होता है।
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नमाज-पूजा में इस्तेमाल होता है इत्र
कन्नौज से आए आलम ने बताया कि इत्र नमाज, इबादत और पूजा में इस्तेमाल होता है। ऐसा इसलिए कि इसमें अल्कोहल नहीं होता है, जबकि परफ्यूम में अल्कोहल होता है। उसे इबादत में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। वह केवल लगाने के लिए होता है।
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