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मंदी की मजबूरी ही सही, कैशलेस पर आ गए

Thu, 01 Dec 2016 01:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली Updated Thu, 01 Dec 2016 01:03 AM IST
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Compulsion recession right, come on cashless
Compulsion recession right, come on cashless - फोटो : बरेली, अमर उजाला
नोटबंदी के बाद  बैंक से लिमिटेड रकम की निकासी ही हो पाने से उद्योग धंधे भी संकट के दौर से गुजर रहे हैं। अस्थायी मंदी को भविष्य के आइने में बेहतर देखने वाले उद्यमी अब  डेबिट और क्रेडिट कार्ड के अलावा ई बैंकिंग, पेटीएम से ट्रांजेक्शन न केवल स्वयं करने लगे हैं बल्कि अपने अफसर और कर्मचारियों को भी कैशलेस लेनदेन के तरीके सिखा रहे हैं। नोट बंदी के असर से वही कारोबार सफर कर रहे हैं जिनका अधिकांश लेन देन कैश से होता है। परसाखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में उद्यमियों से बातचीत पर आधारित एक रिपोर्ट ---
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ब्रेेड का प्रोडक्शन 35 फीसदी कम हो गया
धीर फूड कंपनी के डायरेक्टर उमेश मौर्य का कहना है कि आठ नवंबर से रोजाना 30 हजार ब्रेड बनती थी। अब ये आंकड़ा घटकर 20 हजार पर आ गया। उत्पादन में औसतन 35 फीसदी तक गिरावट है। कंपनी में 50 कर्मचारी काम करते हैं । निकाला किसी को नहीं गया। दो सौ से ज्यादा लोग अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार से जुड़े हैं। नोट बंदी से उनकी कमाई भी घटी है। 12 घंटे की शिफ्ट आठ घंटे की रह गई है।  भविष्य में कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी लेकिन बैंकों की व्यवस्था ठीक नहीं है। कर्मचारियों को रेजगारी देनी पड़ती है। 
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बैंक ट्रांजेक्शन से बेहतर होगी व्यवस्था 
 कैंफर एंड एलाइड प्रोडक्शन लिमिटेड में फार्मा केमिकल बनता है। कंपनी के एचआर हेड जे पाठक का कहना है कि महीने में करीब दौ सौ करोड़ का टर्न ओवर है। ढाई सौ कर्मचारी काम करते हैं। पूरा कारोबार थोक का है जो कि बैंक ट्रांजेक्शन से पहले से ही हो रहा है। पांच सौ और एक हजार के नोट बंद होने से बैंक ट्रांजेक्शन से लेन देने करने वालों पर कोई असर नहीं है। जो कारोबार कैश से होते थे, उन पर ही असर पड़ा है।  नई करेंसी मार्केट में आने के बाद समस्याएं सुलझेंगी।  बैंकिंग माध्यम से कारोबार होना उद्योगों के लिए भी अच्छा रहेगा। 
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आइस्क्रीम कारोबार 20 फीसदी घटा 
बॉडीलाल आइस्क्रीम इंडस्ट्री के एचआर हेड दिनेश सिंह का मानना है कि नोट बंदी के बाद कारोबार में 15 से 20 प्रतिशत की कमी है। बड़े उद्योगों का ज्यादातर कारोबार बैंकिंग सिस्टम से ही चलता है। समस्या उनको है जो कि नगद लेन देन कर रहे थे। कंपनी में 158 कर्मचारी काम करते हैं। अस्थायी मंदी के बाद किसी को भी निकाला नहीं गया है। बैंकिंग व्यवस्थाएं सुधरते ही मंदी का असर भी खत्म हो जाएगा। सरकार के नोट बंदी और देश को बैंकिंग अर्थव्यवस्था की ओर ले जाने का असर कुछ दिन बाद नजर आएगा।  


कोल्ड ड्रिंक की सेल 80 फीसदी घटी  
कोक, थम्सअप, स्प्राइट, मांजा, फेंटा, सिटरा का उत्पादन करने वाली वृंदावन बेवरेज प्राइवेट लिमिटेड के एचआर हेड राजकुमार शर्मा के अनुसार कंपनी के अधिकांश प्रोडक्ट गर्मी के हैं। पांच महीने 80 फीसदी सेल होती है और बाकी के महीनों में 20 फीसदी। नोट बंदी के बाद सेल पर 40 से 50 फीसदी असर पड़ा है। हालांकि इसमें कुछ ऑफ सीजन की वजह से भी है। पांच सौ का नया नोट मार्केट में आया नहीं है। हमने अपने कर्मचारियों को पेटीएम और ई बैंकिंग सिखाना शुरू कर दिया है। रोजाना 20 लोगों को पेटीएम सिखाता हूं ताकि कैश लेश अर्थव्यवस्था में हर किसी का योगदान हो सके। हालांकि बैंकों का सिस्टम खराब है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को आसानी से कैश नहीं मिल पा रहा। 
   
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